Wednesday, Mar 22, 2023
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कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों का किसानों के भारत बंद को समर्थन

  • Updated on 9/26/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनरत किसानों की ओर से सोमवार, 27 सितम्बर को आहूत ‘भारत बंद’ का समर्थन किया है। कांग्रेस ने अपने प्रदेश इकाइयों के साथ ही सभी प्रकोष्ठों और कार्यकर्ताओं से किसानों के समर्थन का आह्वान किया है।

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कांग्रेस ने रविवार को अपने सभी कार्यकर्ताओं, प्रदेश इकाई प्रमुखों और पार्टी से जुड़े संगठनों के प्रमुखों से किसानों के आंदोलन की अगुवाई कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा के बंद में शामिल होने की अपील की थी। कांग्रेस महासचिव (संगठन) के सी वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस और उसके कार्यकर्ता सोमवार को किसान यूनियन द्वारा आहूत किये गए शांतिपूर्ण ‘भारत बंद’ को अपना पूरा समर्थन देंगे। उन्होंने ट्विट किया- हम अपने किसानों के अधिकार में विश्वास करते हैं और काले कृषि कानूनों के खिलाफ उनकी लड़ाई में हम उनके साथ खड़े रहेंगे। वेणुगोपाल ने कहा कि सभी प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्षों, संगठन प्रमुखों से अनुरोध है कि वे देशभर में शांतिपूर्ण भारत बंद में हमारे अन्नदाता के साथ आएं। कांग्रेस के अलावा बिहार में विपक्ष की प्रमुख पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने भी पार्टी की ओर से किसानों के भारत बंद में अपना समर्थन देने की घोषणा की है।

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बसपा प्रमुख मायावती ने भी किसानो के भारत बंद के समर्थन का ऐलान करते हुए कहा कि अगर किसान खुशहाल रहेगा, तो देश खुशहाल होगा। उन्होंने कहा कि तीनों विवादित कृषि कानूनों को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। वहीं, आंध्र प्रदेश सरकार का नेतृत्व कर रही वाईएसआर कांग्रेस की ओर से राज्य के सूचना एवं परिवन मंत्री पर्नी वेंकटरमैया ने किसानों के प्रति सरकार और पार्टी का समर्थन जताते हुए भारत बंद में पूर्ण सहयोग का ऐलान किया है। इसके अलावा तेलगू देशम पार्टी (टीडीपी), सीपीआई ने भी किसानों के आंदोलन का समर्थन करने की घोषणा की है। वहीं दिल्ली की सत्ता संभाल रही आम आदमी पार्टी की ओर से आप नेता राघव चड्ढा ने पार्टी की ओर से किसानों के भारत बंद के समर्थन की घोषणा की है। 

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बता दें कि तीनों नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान पिछले साल नवंबर से दिल्ली की सीमाओं को घेर कर बैठे हुए हैं। इस धरना आंदोलन का नेतृत्व 40 से अधिक किसान यूनियन की निकाय संयुक्त किसान मोर्चा कर रहा है। किसानों के विरोध प्रदर्शन को समाप्त कराने और गतिरोध तोडऩे के लिए सरकार और किसान यूनियनों ने अब तक 11 दौर की बातचीत की है। आखिरी बातचीत इसी साल 22 जनवरी को हुई थी। 26 जनवरी को किसान प्रदर्शनकारियों की एक ट्रैक्टर रैली के दौरान व्यापक हिंसा के बाद बातचीत फिर से शुरू नहीं हुई है। किसान समूहों ने आरोप लगाया है कि ये कानून ‘मंडी’ और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) खरीद प्रणाली को समाप्त कर देंगे और किसानों को बड़े कॉरपोरेट की दया पर छोड़ देंगे। किसान हर हाल में तीनों कृषि कानून रद्द करने की मांग पर अड़े हैं।

 

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