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वजह चाहे कितनी भी वाजिब क्यों न हो, सड़क ब्लॉक नहीं कर सकते: SC

  • Updated on 2/18/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के खिलाफ शाहीनबाग (shaheen bagh) में चल रहे प्रदर्शन पर सुप्रीमकोर्ट (superme court) ने सोमवार को कहा कि प्रदर्शन (protest) करने का लोगों के पास मूल अधिकार है लेकिन सड़कों को अवरुद्ध किया जाना चिंता का विषय है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में अवश्य ही एक संतुलन रखना होगा।

शाहीन बाग प्रदर्शनकारियों से बात करने को SC ने नियुक्त किए वार्ताकार

दो वरिष्ठ वकील और एक नौकरशाह की मध्यस्थता 

कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों से बात करने और उन्हें किसी वैकल्पिक स्थान पर जाने के लिए मनाने को दो वरिष्ठ वकील और एक पूर्व नौकरशाह को मध्यस्थ नियुक्त किया है। सीएए के खिलाफ काङ्क्षलदी-शाहीन बाग मार्ग पर 15 दिसंबर से बैठे प्रदर्शनकारियों के कारण पूरा रास्ता बंद है।

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न्यायालय की भी अपनी सीमाएं हैं: SC
इसके खिलाफ दायर की गई याचिकाओं की सुनवाई करते हुए सुप्रीमकोर्ट के न्यायमूर्ति एस. के. कौल और न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ की पीठ ने कहा कि न्यायालय को इस बात की चिंता है कि यदि लोग सड़कों पर प्रदर्शन करना शुरू कर देंगे, तो फिर क्या होगा। न्यायालय ने कहा कि लोकतंत्र विचारों की अभिव्यक्ति पर चलता है लेकिन इसके लिए भी सीमाएं हैं।निर्भया के दोषियों के लिए आज जारी हो सकता है नया डेथ वारंट

कौन हैं ये सर्वोच्च न्यायालय के मध्यस्थ
पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े और वकील साधना रामचंद्रन और पूर्व नौकरशाह वजाहत हबीबुल्लाह को अपनी ओर से मध्यस्थता के लिए चुना है। प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के लिए कोर्ट ने तीन मध्यस्थ नियुक्त किए

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संजय हेगड़े
सुप्रीमकोर्ट के वरिष्ठ वकील संजय आर हेगड़े ने 1989 में वकालत शुरू की। हाल के दिनों में वे एनआरसी के मसले में, कश्मीर के एक मसले में, मॉब लिंचिंग से जुड़े मामलों में और मुंबई के आरे वन केस में शीर्ष अदालत में दलीलें देते नजर आए थे। वे कई हाई प्रोफाइल मामलों पर काम करने के लिए जाने जाते हैं। साथ ही सरकार की ओर से अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता ट्रिब्यूनल में भी उपस्थित हुए थे। वे सुप्रीमकोर्ट में आने से पहले 1996 से 1993 तक यूनियन ऑफ आर्गुइंग पैनल मे भी रहे। हेगड़े को 2015 में सुप्रीमकोर्ट ने वरिष्ठ वकील नामित किया था।

साधना रामचंद्रन
सुप्रीमकोर्ट की वरिष्ठ वकील साधना रामचंद्रन दिल्ली हाईकोर्ट के प्रस्ताव पर मध्यस्थता एवं सुलह केंद्र की आयोजन सचिव के रूप में काम किया है। वे कई वकीलों के प्रशिक्षण में भी शामिल रहीं। 1978 से वे सुप्रीमकोर्ट में प्रैक्टिस कर रही हैं और 2006 से मध्यस्थता के प्रयासों में शामिल रही हैं।

वजाहत हबीबुल्लाह
पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष रहे वजाहत हबीबुल्लाह पूर्व नौकरशाह हैं। वे 1991 से 1993 तक जम्मू-कश्मीर राज्य के कश्मीर डिवीजन के आठ जिलों में डिवीजनल कमिश्नर रहे। उन्होंने तीन किताबें लिखी है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने संबंधी मोदी सरकार के कदम के वे घोर आलोचक रहे।

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