Sunday, Dec 04, 2022
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पुलिस हिरासत में हर साल होती है करीब 98 की मौतें, पढ़ें ये रिपोर्ट

  • Updated on 6/18/2016

 नई दिल्ली (टीम डिजिटल): पुलिस हिरासत में हर रोज कितने ही लोगों को लिया जाता है ये आंकलन लगाना थोड़ा कठिन हैं। लेकिन हिरासत में लेने के बाद होने वाली मौतों को लेकर एक आंकड़ा पेश किया गया है , जो बेहद चौंकाने वाला है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े देश में पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों के बारे में आंकड़ा पेश किया है। इन आंकड़ों के मुताबिक, देश में साल 2001 से 2013 के बीच पुलिस हिरासत में 1,275 लोगों की मौत हुई हैं। वहीं, इनमें से आधे के ही मामले दर्ज किए गए हैं।

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जबकि एनएचआरसी ने जेल या न्यायिक हिरासत में मौतों का जो आंकड़ा दिया है, वह और भी अधिक है। 2001 साल से साल 2011 के बीच न्यायिक हिरासत में 12,727 लोगों की मौत हुई। इस सदी की शुरुआत के बाद से सबसे कम मौतें साल 2010 में दर्ज की गई थीं। 

एशियन सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स  की एक रिपोर्ट च्टॉर्चर इन इंडिया 2011 के मुताबिक, ये आंकड़े सच्चाई बयान नहीं करते क्योंकि इसमें सशस्त्र बलों की हिरासत में हुई मौतों का आंकड़ा शामिल नहीं है। साल 2001-2013 के बीच महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश व गुजरात में पुलिस हिरासत में सर्वाधिक मौतें हुईं।

जबकि बिहार में ऐसे केवल छह मामले दर्ज किए गए। तुलनात्मक रूप से महाराष्ट्र में हिरासत में मौत के केवल 11.4 फीसदी मामले दर्ज किए गए। राष्ट्रीय स्तर पर पुलिस हिरासत में हर 100 लोगों की मौत पर केवल दो पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया गया।

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हर दर्ज 100 मामलों में से औसतन केवल 34 पुलिसकर्मियों पर आरोप पत्र दाखिल किया गया और इसमें केवल 12 फीसदी पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया गया। उत्तर प्रदेश में 71 पुलिसकर्मियों पर आरोप पत्र दाखिल किया गया। वहीं, छत्तीसगढ़ में जिन पुलिसकर्मियों पर आरोप पत्र दाखिल किया गया, उनमें से 80 फीसदी को दोषी ठहराया गया।

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