Sunday, Mar 07, 2021
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politicians hanging out will not enter mp without investigation of corona virus

कोरोना वायरस की जांच के बिना मध्य प्रदेश में दाखिल नहीं हो सकेंगे विधायक

  • Updated on 3/14/2020

नई दिल्ली /टीम डिजिटल। मध्य प्रदेश (madhya pradesh) इन दिनों अपने सियासी भूचाल के लिए देश भर में सुर्खियों में है। कांग्रेस (congress) के बागी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया (jyotiraditya scindia) गुट के 22 विधायक फिलहाल दूसरे प्रदेशों में अपने अलगे सियासी दांव का इंतजार कर रहे हैं।

सूबे के सियासी भूचाल में कोरोना वायरस की धमाकेदार एंट्री
इस बीच अचानक मध्य प्रदेश शासन को कोरोना वायरस के खिलाफ अपनी जंग में इन विधायकों का ख्याल आ गया है। प्रदेश के बाहर घूम रहे और होटलों में रहने के बाद सूबे में वापस लौटने पर इन विधायकों की कोरोना के टेस्ट के लिए स्क्रीनिंग की जाएगी।

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सिर्फ कोरोना के खिलाफ जागरुखता या फिर कुछ और...
हालांकि फौरी तौर पर इस खबर को सिर्फ कोरोना वायरस के खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार के एहतियात के तौर पर देखा जा सकता है। मगर दरहकीकत इसके कई और सियासी मायने भी तलाशे जा रहे हैं। गौरतलब है कि फिलहाल सूबे की सत्ता पर कांग्रेस के कमलनाथ काबिज हैं। मगर सियासी हलचल को देखते हुए कहा जा सकता है कि वो इस कुर्सी पर कुछ ही दिनों के मेहमान हैं। जाने से पहले अपनी कुर्सी को बचाने के वो हर मुमकिन-गैर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं।

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छुपे हुए बागी विधायकों से मिलने की जुगत तो नहीं कोरोना स्क्रीनिंग
किसी भी तरह वे कांग्रेस के बागी विधायकों और भाजपा के टूट सकने योग्य विधायकों से मुलाकात का बहाना तलाश रहे हैं। मगर सिंधिया गुट के विधायकों और भाजपा विधायकों को फिलहाल उनकी छिपा कर दूसरे शहरों में रखा गया है। ऐसे में अचानक कोरोना की स्क्रीनिंग के लिए भाजपा और कांग्रेस के बागी विधायकों की याद आने को महज इत्तेफाक तो नहीं माना जा सकता।

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11 विधायकों को नोटिस, जीतू यादव के साथ धक्का मुक्की
विधानसभा अध्यक्ष ने 11 विधायकों को नोटिस थमाया है। जिसमें अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। उधर कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने बीजेपी और सिंधिया पर आरोप लगाया कि मंत्री जीतू पटवारी और लाखन सिंह यादव के साथ उस समय धक्का-मुक्की हुई जब वे अपने विधायक साथियों से मिलने रिसॉर्ट पहुंचे हुए थे।

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कितना सटीक बैठेगा कोरोना वायरस का नया दांव
सियासी जानकारों की मानें तो कोरोना वायरस से स्क्रीनिंग का कोई खास लाभ कांग्रेस को नहीं मिल सकेगा। जानकार दावा करते हैं कि अगर कमलनाथ इसी बहाने भाजपा और कांग्रेस के बागी नेताओं को समझाने की कोशिश करती है तो भी सिंधिया गुट के चेहरों को इस दांव में आसानी से फंसाया नहीं जा सकेगा।

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