Sunday, Nov 28, 2021
-->
priyanka draw a big line in front of akhilesh yadav, emerged as the new face of fighting

प्रियंका ने अखिलेश के सामने खींच दी बड़ी लकीर, सत्ता से अड़ने-लड़ने के नए चेहरे के तौर पर उभरीं

  • Updated on 10/7/2021

नई दिल्ली/शेषमणि शुक्ल। लखीमपुर खीरी की हिंसक घटना ने न केवल सियासी जंग की नई जमीन तैयार की कर दी है, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों की भी इबारत लिख दी है। इस घटना को लेकर प्रियंका गांधी वाड्रा ने सत्ता और शासन से लडऩे की जो हिम्मत दिखाई, उसने उनके सियासी रसूख को बढ़ाने का काम किया है। प्रियंका ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के सामने भी एक बड़ी सियासी लकीर खींच दी है।

लखीमपुर हिंसा: मारे गए किसानों के लिये पंजाब और छत्तीसगढ़ ने की 50-50 लाख रुपये की घोषणा

यूपी में कांग्रेस को चौथे नंबर की पार्टी के तौर पर माना जाता है। भाजपा के बाद विपक्ष में सपा सबसे बड़ी पार्टी है। लेकिन लखीमपुर खीरी की घटना में सपा कहीं न कहीं कांग्रेस से पिछड़ती दिखी है। सियासत में परसेप्शन और टाइमिंग की काफी अहम भूमिका होती है। लखीमपुर खीरी की घटना को लेकर जो तत्परता प्रियंका गांधी वाड्रा ने दिखाई, उसमें बाकी दलों के नेता कहीं चूक कर गए। प्रियंका उत्तर प्रदेश कांग्रेस की प्रभारी महासचिव हैं और पिछले काफी वक्त से राज्य में कांग्रेस के लिए सियासी जमीन तैयार करने में लगी हैं।  यूपी में कांग्रेस संगठन लगभग मृतप्राय अवस्था में है। प्रियंका इसमें जान फूंकने की कोशिश कर रही हैं। इसके लिए वे राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार से बार-बार टकरा रही हैं। हर मुद्दे पर सरकार से भिड़ रही हैं। 

राहुल और प्रियंका को लखीमपुर जाने की मिली इजाजत, दो पीड़ित परिवारों से होगी मुलाकात

2019 में सोनभद्र के उम्भा गांव में 10 ग्रामीणों की हुई हत्या के बाद भी प्रियंका इसी तरह पीडि़त परिवारों से मिलने  गई थीं। उस वक्त भी उन्हें रास्ते में रोक लिया गया था और शांति भंग के आरोप में हिरासत में रखा गया था। प्रियंका ने तब भी यही कहा था कि पीडि़त परिवारों से मिले बगैर वे लौटेंगी नहीं। वे गेस्ट हाउस में ही अनशन पर बैठ गई थीं। आखिर में प्रशासन ने पीडि़त परिवारों के सदस्यों से उनकी मुलाकात करवाई थी। प्रियंका हाथरस में एक दलित युवती के बलात्कार और हत्या के बाद पीडि़त के परिवार से मिलने पहुंची थीं। उस दौरान भी खूब हंगामा मचा था और उन्हें रोक लिया गया था। बाद में प्रियंका और राहुल गांधी दोनों ही हाथरस पीडि़ता के परिजनों से मिले थे।

लखीमपुर खीरी हिंसा पर बोले CM केजरीवाल- हत्यारों को बचाया जा रहा है

लखीमपुर खीरी की घटना के तत्काल बाद जब बाकी दलों के नेता सोशल मीडिया पर केवल ट्विट कर रहे थे, प्रियंका दिल्ली से लखनऊ पहुंच गईं और वहां से लखीमपुर खीरी के लिए निकल पड़ीं। उनके लखीमपुर जाने की सूचना से शासन-प्रशासन में हडक़ंप तो मचा ही, सियासी दलों में भी हलचल मच गई। आनन-फानन में बसपा प्रमुख मायावती ने पार्टी महासचिव सतीश मिश्रा को पीडि़त परिवारों से मिलने को कहा और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी अगली सुबह लखीमपुर खीरी जाने का ऐलान किया। लेकिन पुलिस दोनों को उनके घरों से निकलने नहीं दिया। 

उत्तर प्रदेश रवाना हुए पायलट, सीतापुर और लखीमपुर जाने का करेंगे प्रयास

वहीं, जिला और पुलिस प्रशासन ने प्रियंका को लखनऊ में उनके आवास पर घेरने की कोशिश की तो वे चकमा देकर बाहर निकल गईं। हालांकि सीतापुर में उन्हें पकड़ लिया गया। हिरासत में लेकर पीएसी कैंप के गेस्ट हाउस में ले जाकर रखा गया। उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कर दी गई है। अब प्रियंका हिरासत से बाहर हैं और राहुल गांधी के साथ लखीमपुर खीरी पहुंच गई हैं। राज्य की सियासत को करीब से देख रहे जानकारों की माने तो सत्ता से लडऩे-अडऩे के प्रियंका के इन कदमों ने न केवल उनका सियासी रसूख बढ़ाने का काम किया है, बल्कि यूपी में कांग्रेस की स्थिति को भी मजबूती दी है, जिसका आने वाले चुनाव में भी असर दिखेगा।
 

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।

comments

.
.
.
.
.