Friday, Dec 03, 2021
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टिकरी बाॅर्डर: रोजाना तैयार होती हैं 20 क्विंटल आटे की रोटियां, एक दिन में बनती है 50 हजार कप चाय

  • Updated on 12/26/2020

नई दिल्ली(अनामिका सिंह): बडी-बडी कडाहियों में गूंथा जा रहा आटा, जिससे कहीं पूडी तो कहीं नान व रोटी बन रही है। तो कहीं पुलाव, विभिन्न प्रकार की सब्जियां और गाजर का हलवा व खीर बनाया जा रहा है। इन सब बातों को सुनकर आपको लगेगा कि शायद हम किसी शादी या समारोह की बात करने जा रहे हैं लेकिन हम आपको बताने जा रहे हैं टिकरी बाॅर्डर पर किसानों द्वारा किए जा रहे आंदोलन की व्यवस्थाओं के बारे में। जहां रोजाना 20-25 हजार लोगों का तीनों समय का खाना तैयार किया जा रहा है।

दरअसल किसान आंदोलन जो पहले पंजाब-हरियाणा के किसानों तक सीमित था पिछले 31 दिनों में देशव्यापी रूप लेता जा रहा है। यही वजह है कि अब देश के विभिन्न राज्यों के किसान हीं नहीं बल्कि समर्थन देने के लिए आम जनता, एनजीओ व विभिन्न वर्गों से जुडे लोग टिकरी बाॅर्डर पहुंच रहे हैं। ऐसे में किसानों का मानना है कि जब हम अन्नदाता हैं तो किसी को खाली पेट कैसे जाने दें, इसके लिए किसानों द्वारा विभिन्न तैयारियां रोजाना की जाती हैं और चैबीसों घंटे चलने वाले लंगर भी लगाए जा रहे हैं।   

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4-5 क्विंटल आटे की बनती हैं रोटियां
बता दें कि टिकरी बाॅर्डर पर पहले दिन तकरीबन 4 से 5 क्विंटल आटे की रोटियां बनाई गईं थीं, अब 31 दिन पूरे होने के बाद आटे की खपत बढकर 20 क्विंटल प्रतिदिन जा पहुंची है। जबकि बात यदि सब्जियों की करें तो रोजाना 3 ट्रक सब्जियां और 5-6 क्विंटल दाल बनाई जा रही है। यही नहीं रोजाना 1 हजार किलो गाजर का हलवा वो भी शुद्ध देशी घी का तैयार किया जाता है। इसके अलावा 4 से 5 क्विंटल चावल बन रहे हैं।

700-800 लीटर दूध की 50 हजार कप चाय लोग पी रहे हैं। दोपहर को 5 हजार लीटर दूध की खीर बनाई जाती है इसके अलावा 1 हजार लीटर दूध को मेवे, इलायची, केसर डालकर कडाहा दूध के रूप में तैयार किया जाता है ताकि रात को किसान इसे पीकर सो सकें और उनके शरीर को सर्दी से लडने में मदद मिल सके। इसके अलावा यहां खालसा एड व बंगला साहिब गुरूद्वारे के अलावा हरियाणा के गुरूद्वारा प्रबंधकों द्वारा भी लंगर लगाया जा रहा है। ये खाना तीनों समय का है इसके अलावा पूरे मौसमी फलों, पानी की बोतलों, समोसे, ब्रैड पकौडे, लड्डूओं इत्यादि का अलग से लंगर समर्थक लाकर लगा रहे हैं। 

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कौन बनाता है इतना खाना 
टिकरी बाॅर्डर पर खाना बनाने की जिम्मेदारी जमींदारा स्टूडेंट आर्गनाइजेशन (जेएसओ) के 150 वालंटियर्स की देख-रेख में चल रही है। जेएसओ पंजाब-हरियाणा के गांवों में एजुकेशन, कल्चर व स्पोटर््स पर काम करती है। इसके वालंटियर मीतमान जोकि झज्जर के रहने वाले हैं उन्होंने बताया कि जेएसओ किसान आंदोलन की बात सुनकर पहले ही दिन पहुंच गया था और तबसे उसके वालंटियर्स यहां खाना बनाने और वितरण करने के साथ ही किसानों को मेडिकल सुविधा उपलब्ध करवाने का भी काम कर रहे हैं।

कहां से आता है इतना खाद्यान्न
बता दें कि पंजाब-हरियाणा बाॅर्डर पर किसानों ने कलेक्शन प्वाइंट बना रखे हैं। जहां जेएसओ के वालंटियर्स द्वारा खाद्यान्न सामाग्री रोजाना एकत्र की जाती है जोकि मुंडका भाईचारा ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन द्वारा पहले दिन से ही किसानों के सपोर्ट में फ्री लाकर यहां पहुंचाई जा रही है। 

समर्थन देने आई महिलाएं भी बंटवाती हैं हाथ
जेएसओ ने अपने 3 बडे प्वाइंट बना रखे हैं। एक प्वाइंट को मुख्य कलेक्शन प्वाइंट बनाया गया है जहां खाद्यान्न के साथ ही पानी की बोतलें, रिफाइंड, मसाले, सब्जियां व डिस्पोजल बर्तन पहुंचाए जाते हैं। जबकि अन्य दो प्वाइंट्स का काम खाना तैयार करना व वितरण करना है। यहां किसानों के आंदोलन को समर्थन देने रोजाना सैंकडों की संख्या में महिलाएं पहुंच रही हैं जबकि दर्जनों ऐसी भी महिलाएं हैं जो यहां रूक भी जाती हैं और खाना बनवाने के दौरान सब्जी काटने, आटा गूंथने, पूडी बेलने या फिर खाना वितरण करने के काम में लगी हुई हैं।

10 मिनट में बंटी 30 क्विंटल मूंगफली
हिसार से आए किसानों ने अपना समर्थन व किसान आंदोलन में सहयोग के लिए मूंगफली बांटने का निर्णय किया और वो यहां 30 क्विंटल मूंगफली के पैकेट बनाकर पहुंचे। आपको सोचकर हैरानी होगी कि उनके साथ करीब 50 लोगों का जत्था आया था। उनकी 30 क्विंटल मूंगफली मात्र 10 मिनट में ही बंट गई। इसी तरह लुधियाना के एक किसान अपने साथ गर्म मफलर, गर्म चादरें व लोई भी बुजुर्ग किसानों के लिए लेकर आए थे जोकि चंद मिनटों में ही बंट गए। 

 

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