Saturday, Jul 31, 2021
-->
punjab fighter jet mig 21 crash search operation for pilot anjsnt

पंजाब: फाइटर जेट Mig- 21 हुआ क्रैश, पायलट की मौत

  • Updated on 5/21/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। पंजाब में वायु सेना का फाइटर जेट मिग 21 क्रैश हो गया है। इस हादसे में सुबह तक किसी के मौत की सूचना नहीं मिली थी लेकिन कुछ देर बाद ही पायलट के मौत की खबर सामने आई। पायलट अभिनव की मौत की सूचना मिलने के बाद से पूरे परिवार में मातम  पसर गया।

चल रहा था सर्च ऑपरेशन
इंडियन एयरफोर्स के अधिकारियों का कहना है कि ट्रेनिंग के चलते अभिनव ने राजस्थान के सूरतगढ़ से मिग 21 में उड़ान भरी थी और अचानक मोगा के पास पहुंचने पर जेट क्रेश हो गया। बताया जा रहा है कि ये घटना रात करीब 1 बजे हुई। जिसके बाद सेना के अधिकारी मौके पर पहुंचकर मामले की जांच की और पायलट अभिनव के नहीं मिलने पर सर्च ऑपरेशन भी शुरु कर दिया था। जिसकी बाद में लाश मिली है।

1960 में वायुसेना में शामिल हुआ था मिग 21
आपको बता दें कि फाइटर जेट मिग-21 एक वक्त में भारतीय सेना के सबसे ज्यादा विश्वासजनक विमान थे लेकिन अब इनकी हातल खश्ता हो गई है। जिसके कारण कई पायलटों ने अपनी जान भी गंवाई है। भारतीय वायु सेना 1960 से मिग-21 का इस्तेमाल कर रही है।

कोरोना संकट में अपनी मांगों को लेकर ट्रेड यूनियनों ने काला दिवस मनाने का किया ऐलान

विमान से जुड़ी जानकारी
धुआंधार रफ्तार और तमाम खूबियों से लैस होने के साथ ही यह प्लेन सबसे ज्यादा क्रैश होता है। यही वजह है कि इस प्लेन पर सवाल मंडराते रहते हैं। 1963 के बाद से वायु सेना में शामिल हुए 800 से ज्यादा मिग-21 विमानों में से करीब 280 विमान हादसों का शिकार हो चुके हैं। 2013 में तत्कालीन रक्षा मंत्री A.K. Antony ने बताया था कि पिछले तीन साल में क्रैश हुए वायु सेना के कुल 31 विमानों में से 14 विमान MiG-21 थे। 2006 में आई बॉलीवुड फिल्म 'रंग दे बसंती’ भी MiG-21 विमानों के दुर्घटनाग्रस्त होने पर आधारित थी।

इस विमान को रूस ने 1956 में  बनाया था। जिसके बाद भारत में 1970 से अब तक मिग 21 से 170 पायलट और 40 नागरिक की जान गई हैं। इसमें 872 में आधे विमान दुर्घटनाग्रस्त हुए हैं। इस विमान को 1985 में रूस ने सेवा से हटाया जिसके बाद बांग्लादेश और अफगानिस्तान भी इसे सेवा से निकाल चुका है।  


ये हैं इसकी कमियां

  • मिग-21 विमानों में 50 के दशक में इस्तेमाल होने वाली तकनीक पर काम करता है।
  • इसकी लैंडिंग 340 किमी प्रति घंटे जितनी तेज रफ्तार में हो सकती है। टेक-ऑफ के लिए भी हाई-स्पीड चाहिए। इससे यह काफी खतरनाक हो जाता है।
  • इसकी कैनोपी का डिजायन ऐसा है जिससे पायलट रनवे को ठीक से देख नहीं पाता।
  • सिंगल इंजन होने के चलते यह हमेशा खतरे के घेरे में रहता है। किसी चिड़िया के टकरा जाने या इंजन फेल हो जाने पर प्लेन क्रैश की संभावना बढ़ जाती है।
  • इसे हाई एल्टीट्यूड इंटरसेप्टर के तौर पर डेवलप किया गया था, लेकिन भारतीय वायु सेना इसे मल्टी-रोल फाइटर प्लेन के तौर पर इस्तेमाल करती है।​
comments

.
.
.
.
.