Friday, Jan 21, 2022
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Rahul''s allegation, govt in possession of anti-poor group, said- govt is afraid to discuss

राहुल का आरोप, गरीब विरोधी समूह के कब्जे में मोदी सरकार, कहा-चर्चा कराने से डरती है सरकार

  • Updated on 11/29/2021

नई दिल्ली/नेशनल ब्यूरो। कांग्रेस ने संसद के दोनों सदनों में चर्चा के बिना कृषि विधि निरसन विधेयक को पारित कराए जाने को लेकर सोमवार को सरकार पर निशाना साधा, पार्टी ने सवाल किया कि आखिर सरकार को इस विधेयक पर चर्चा करने से डर क्यों लग रहा है? कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने दावा किया कि इस सरकार पर कुछ ऐसे लोगों के समूह का कब्जा है जो गरीब विरोधी है तथा किसानों-मजदूरों के हितों को नुकसान पहुंचा रहा है।

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राहुल गांधी ने संसद के बाहर संवाददाताओं से कहा कि इन कानूनों का निरस्त किया जाना किसानों, मजदूरों की जीत है और अब सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) समेत उनकी अन्य मांगें भी स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमने कहा था कि तीनों काले कानून को वापस लेना पड़ेगा। हमें मालूम था कि तीन-चार बड़े पूंजीपतियों की ताकत देश के किसानों के सामने टिक नहीं सकती। यही हुआ कि तीनों कानूनों को निरस्त करना पड़ा। यह किसानों और मजदूरों की सफलता है, एक प्रकार से देश की सफलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये कानून जिस प्रकार से बिना चर्चा के रद्द किए गए, वह दिखाता है कि सरकार चर्चा से डरती है और सरकार ने गलत काम किया है।

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कांग्रेस नेता ने कहा कि 700 किसानों ने जान दी, उनके बार में चर्चा होनी थी। चर्चा इस बारे में भी होनी थी कि इन कानूनों के पीछे कौन सी ताकत थी, ये क्यों बनाए गए? एमएसपी और किसानों को दूसरी समस्याओं, लखीमपुर खीरी और गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को लेकर चर्चा होनी थी। सरकार ने यह नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि सरकार सोचती है कि किसान और मजदूर गरीब हैं, उन्हें दबाया जा सकता है। लेकिन इस घटनाक्रम ने दिखाया है कि ऐसा नहीं किया जा सकता। एक सवाल के जवाब में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि ये तीनों कानूनों किसानों और मजदूरों पर आक्रमण था।

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राहुल गांधी ने एक सवाल के जवाब में दावा किया कि इन कानूनों के पीछे वही ताकते हैं जिन्होंने नोटबंदी करवाई, त्रूटिपूर्ण जीएसटी लागू करवाई और कोरोना काल में गरीबों को मदद नहीं देने दी। उन्होंने कहा कि सवाल यह नहीं है कि सरकार फिर ये ऐसे कानून लाने का प्रयास करेगी, बल्कि सवाल यह है कि इस सरकार पर एक ऐसे समूह का कब्जा है जो गरीब लोगों के खिलाफ है और उनके हितों को नुकसान पहुंचा रहा है।

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वहीं, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने कहा कि हमारी ओर से नियम 267 के तहत नोटिस दिया गया। हम चाहते थे कि इस विधेयक पर चर्चा हो। लेकिन लोकसभा में सरकार ने बिना चर्चा के ही इस विधेयक को पारित करा लिया। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि राज्यसभा में सारी चीजों पर चर्चा हो जाए। उन्होंने कहा कि 17 ऐसे विधेयकों पर अतीत में चर्चा हो चुकी है। लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने संसद के बाहर संवाददाताओं से कहा कि कृषि कानूनों को निरस्त करने संबंधी विधेयक पर चर्चा करने से सरकार को परेशानी क्या है? अतीत में जितने भी कानून निरस्त किए गए हैं, उन पर चर्चा हुई है। उन्होंने सवाल किया कि सरकार को चर्चा से क्या परेशानी है? सरकार को किस बात का डर है?

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इसके पहले कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्विट किया, ‘तीनों कृषि विरोधी काले क़ानूनों को न पारित करते चर्चा हुई, न खत्म करते हुए चर्चा हुई। क्योंकि चर्चा होती तो हिसाब देना पड़ता, जबाब देना पड़ता। खेती को मुट्ठी भर धन्ना सेठों की ड्योढ़ी पर बेचने के षड्यंत्र का। 700 से अधिक किसानों की शहादत का। फसल का एमएसपी न देने का।’

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