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दो अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे राम मंदिर के निर्माण का शुभारंभ ?

  • Updated on 2/7/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। अयोध्या (ayodhya) में श्रीराम मंदिर (shri ram mandir)के निर्माण के लिए नवगठित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मंदिर का शुभारंभ 2 अप्रैल से कर सकता है। शिलान्यास के कार्यक्रम में खुद प्रधानमंत्री मोदी मौजूद रहेंगे। इस भव्य उद्घाटन समारोह में पीएम के अलावा विदेशों से भी मेहमानों के मौजूद इस दौरान देश के अलावा विदेशी मेहमानों के भी मौजूद रहने की उम्मीद है।

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अखिल भारतीय संत समिति के महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि गर्भगृह निर्माण के दौरान शायद कुछ वक्त के लिए भगवान राम की मूर्ति को कुछ वक्त के लिए यहां से हटाया भी जा सकता है।

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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में शामिल किए गए युगपुरुष स्वामी परमानंद जी महाराज ने मवईधाम में बताया कि भव्य मंदिर का निर्माण प्रभु राम के दिन यानी रामनवमी से ही शुरू किया जाना चाहिए। उन्होंने दोबारा भगवान राम के भव्य मंदिर के दोबारा स्थापित होने और इस ट्रस्ट में खुद के शामिल होने पर अधिकारियों का आभार जताया।

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राम मंदिर पर सियासत पर होता था अफसोस
सालों से राम मंदिर के मुद्दे पर सियासत होने पर अफसोस जाहिर करते हुए स्वामी परमानंद ने कहा कि कई बार मंदिर पर सियासत होने पर अफसोस होता था। सिर्फ चुनाव के वक्त ही आंदोलन की बातें की जाती थी। सवाल किए जाते थे तो उनसे भी कोई जवाब नहीं बन पड़ता था। मगर अब सालों का सपना सच होने जा रहा है। ये देखकर खुशी मिलती है।

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भरोसा था, VHP और RSS राष्ट्रहित के विपरीत नहीं जा सकते
स्वामी बताते हैं कि सियासत के दौर में उनका भरोसा किसी पर नहीं रहा था। मगर फिर भी ये यकीन था कि कुछ भी हो जाए, विहिप और संघ कभी राष्ट्रहित के खिलाफ नहीं जाएंगे। अब ट्रस्ट बन चुका है। सब मिल कर सुझाव साझा करेंगे। भव्य मंदिर का निर्माण किया जाएगा।

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मंदिर का मॉडल वही रहेगा जो सालों से देखा है
स्वामी ने उम्मीद जताई कि हालांकि भव्य मंदिर बनने जा रहा है, फिर भी मंदिर का मूल मॉडल वही रहना चाहिए जिसे सालों से देखा है। जिसकी तस्वीर की पूजा की है। मंदिर भव्य होगा, विशाल होगा, मगर पत्थर वही होंगे जिन्हें सालों से तराशा जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि अस्सी प्रतिशत काम तो पहले से ही हो चुका है। बड़ी-बड़ी मशीनें हैं, रखती चली जाएंगी।

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लोग ताना देते थे, महात्मा हो तो भजन करो सियासत नहीं
ट्रस्ट में शामिल स्वामी परमानंद ने भावुक होते हुए कहा कि कई बार लोग ताना देते थे कि महात्मा हो, भजन करो, राजनीति में क्यों पड़े हो। मगर मंदिर बनाना उनके दिल की इच्छा थी, कोई सियासत होती तो कभी की छोड़ चुके होते।

मोहम्मद गौरी से मिली प्रेरणा, कभी हार नहीं मानी
स्वामी ने दोटूक कहा कि अक्सर वो अपना आदर्श मोहम्मद गौरी को मानते थे, जो सालों तक लगातार हारता रहा, मगर कभी दोबोरा कोशिश करने से नहीं चूका।

जन्मभूमि का प्रतिद्वंदी है निर्मोही अखाड़ा, फिर भी कोर्ट के आदेश पर दी ट्रस्ट में जगह
निर्मोही अखाड़े के दिनेंद्र दास को मताधिकार नहीं देने के सवाल पर सफाई देते हुए समिति के महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने दोटूक कहा कि निर्मोही अखाड़ा शुरु से ही जन्मभूमि न्यास का प्रतिद्वंदी रहा है। मगर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर उसे भी ट्रस्ट में जगह देनी पड़ी है। मगर इसके सदस्य दिनेंद्र दास को मताधिकार नहीं दिया गया है। ये ट्रस्ट का फैसला है।

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