Tuesday, Oct 04, 2022
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गुजरात के सरकारी स्कूलों की बदहाली देख दुख होता है: अरविंद केजरीवाल 

  • Updated on 4/11/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। गुजरात बनाम दिल्ली के स्कूलों पर दिल्ली के उपमुख्यंत्री ने जहां गुजरात में जाकर सरकारी स्कूल देखे तो भाजपा नेता दिल्ली में अलग-अलग स्कूल पहुंच गए। इस पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, सरकारी स्कूलों की ये बदहाली देखकर बहुत दु:ख होता है। आजाद हुए 75 साल हो गए। हम अच्छी शिक्षा का इंतजाम नहीं कर पाए। क्यों, हर बच्चे को बेहतरीन शिक्षा नहीं मिलेगी, तो भारत कैसे तरक्की करेगा, आइए, हम प्रण लें कि हर बच्चे को अच्छी शिक्षा मिले, इसके लिए हम सब मिलकर प्रयत्न करेंगे। 
27 साल बाद जर्जर स्कूलों की पोल खोली तो बौखला गई भाजपा: सिसोदिया 
      उपमुख्चमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि आज मैंने गुजरात में बीजेपी के 27 साल के शासन की सरकारी स्कूलों को बर्बाद करने की पोल खोली तो बीजेपी बुरी तरह बौखला गई। आज दिल्ली के सारे बीजेपी सांसद दिल्ली के सरकारी स्कूलों में कमियां ढूंढने के लिए उतार दिए लेकिन अफसोस कि दिल्ली के सारे बीजेपी नेता आज दिल्ली के सरकारी स्कूलों में एक भी स्कूल नहीं ढूंढ पाए जहां मकड़ी के जाले लगे दिखे हों। जहां बच्चों के बैठने के लिए डेस्क न हो, पढ़ाने के लिए बाक़ी सुविधाएं न हों। 
बीजेपी नेता दिखा रहे हैं कमरों की टूटी टायल 
      उन्होने ट्वीट कर कहा कि बेचारे बीजेपी नेता अब दिल्ली के स्कूलों में उन कमरों की तस्वीरें दिखा रहे हैं जहां टायल टूट गई है, कहीं सफेदी पुरानी पड़ गई है, कहीं डेंटिंग-पेंटिंग चल रही है। मुझे गर्व है कि सारी ताकत लगाकर भी बीजेपी इससे ज़्यादा कमियां दिल्ली के सरकारी स्कूलों में नहीं निकाल पाई। 
गुजरात में भाजपा फेल हो गई 
      मनीष सिसोदिया ने कहा कि भाजपा की या तो गुजरात के सरकारी स्कूलों को ठीक करने की मंशा नहीं या फिर उनके शिक्षा मंत्री में नहीं है योग्यता कि वे गुजरात के सरकारी स्कूलों को ठीक कर सकें। सरकारी स्कूलों को ठीक करना राकेट साइंस नहीं, जब पांच साल में दिल्ली के सरकारी स्कूलों को बनाया जा सकता है शानदार तो 27 सालों से गुजरात में क्यों नहीं कुछ किया गया। स्कूलों की हालत जर्जर है, एक-एक महीने के संविदा पर टीचर्स लगे हुए है। गुजरात के सरकारी स्कूलों का हाल देखकर दिल रोता है, हम देश की तरक्की का सपना देखते है क्या ऐसे स्कूलों से देश में कभी तरक्की आ पाएगी। अपने घर परिवार के प्राइवेट स्कूल को बेहतर ढंग से चलाना जानते है जीतू भाई बघानी लेकिन गुजरात के सरकारी स्कूल चलाने में फेल हो गए। 
 

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