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370 पर चिंता की जरूरत नहीं- क्या है सत्यपाल मलिक के इस बयान के मायने

  • Updated on 6/14/2019

जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में लगातार बढ़ रही हिंसा को देखते हुए राज्यपाल (Governer) सत्यपाल मलिक (Satyapal malik) ने पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि चरमपंथियों को बातचीत कर समस्या को सुलझाने के विषय में सोचना चाहिए।

एक ओर देश के प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपना लिया है। दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल वहां के अलगाववादियों से निवेदन कर रहे हैं कि आप प्यार से हमसे सब ले लो,  चाहे तो प्यार से हमारी जान भी ले लो।

प्यार से हल होगा मसला?

सवाल ये है कि पुलवामा जैसे इतने बड़े फिदायीन हमले के बाद जब देश ने अपने 40 से ज्यादा जवान खो दिए हों, पीएम के इशारे पर पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक हो गई हो, लगातार कश्मीर से हिंसा की खबरे आ रही हों, देश के जवान मारे जा रहे हों। क्या पीएम मोदी और पूरा देश इन चरमपंथियों को प्यार से, बातचीत से अपनी जान लेने देगा? पाकिस्तान हजार बार से ज्यादा सीज फायर का उल्लंघन कर चुका है।

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खून से लथपथ वादी में तब्दील हुई घाटी

देश की सेना पर पत्थरबाजी करने वाले ये नौजवान क्या कभी समझ पाएंगे कि ये अपने ही देश भारत से मुकाबला नहीं कर सकते? इनको अपनी गलतियां कभी समझ आएंगी? इतने सालों में इन्होंने स्वार्थी अलगाव वादी नेताओं और आतंकवादियों का अनुसरण कर  देश के सबसे सुंदर और मह्तवपूर्ण भू-भाग को खून से लथपथ घाटी में तब्दील कर दिया।

'चिंता की कोई जरूरत नहीं'

राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि मैं हुर्रियत के नेताओं का सम्मान करता हूं, उन्होंने काफी सहा है, लेकिन गलत बात के लिए। उन्होंने आर्टिकल 370 और 35A पर भी कहा कि कई पार्टियों के घोषणापत्र में इस पर विचार करने के विषय में लिखा है। इस पर चर्चा हो रही है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है जिस पर कश्मीर के लोगों को चिंता करने की ज़रूरत है।

ये कहकर राज्यपाल सत्यपाल मलिक कश्मीर के उन पत्थरबाजों को क्या संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं? 

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35 A हटाकर विकास की योजना!

एक तरफ जहां मोदी सरकार 35A को जम्मू से हटाने की सोच रही है, जिससे वहां व्यापार बढ़ाया जा सके। वहां की जमीन पर वहां के लोगों के एकाधिकार का कोई हल निकाला जा सके। वहां नौकरियों की संभावना को बढ़ाया जाए ताकि वहां का युवा पत्थर चलाने के बजाय अपने भविष्य को उज्जवल बना सके। वहीं दूसरी तरफ राज्यपाल कह रहे हैं कि 35A और 370 पर चिंता करने की जरुरत नहीं।

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'धारा 370 संविधान में स्थाई है'

जहां तक धारा 370 की बात है तो जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट कह चुका है कि जम्मू कश्मीर भारत के दूसरे राज्यों की तरह नहीं है। इसे सीमित संप्रभुता (limited sovereignty) मिली हुई है। इसी वजह से इसे विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ है। धारा 370(1) राज्य पर लागू होती है। इसमें राष्ट्रपति को संविधान के किसी भी प्रावधान को राज्य में लागू करने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए भी राज्य से सलाह लेना जरूरी है। उन्हें किसी भी कानून को लागू करने, बदलने या हटाने का अधिकार है। धारा 370 भारतीय संविधान में स्थाई है। इसे न तो बदला जा सकता है और ही हटाया जा सकता है।

तो क्या धारा 370 और 35A के लिए वाकई कश्मीर के अलगाववादियाों को चिंता की कोई जरूरत नहीं या मोदी सरकार के पास इसका भी कोई तोड़ है। लगातार बढ़ती हिंसा के बीच राज्यापल का संदेश पूरे देश में और कश्मीर के अलगाववादियों पर क्या असर डालता है ये देखना दिलचस्प होगा।  

लेखिका: कामिनी बिष्ट

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा पंजाब केसरी समूह उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है। 

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