Sunday, Sep 19, 2021
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shivsena gives support to mamta banerjee tmc in west bengal sobhnt

ममता को मिला SP, RJD और शिवसेना का साथ तो भड़की कांग्रेस, कहा- नहीं झेला TMC का आतंक

  • Updated on 3/5/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और समाजवादी पार्टी (SP) के समर्थन के बाद अब शिवसेना (Shivsena) ने भी बंगाल चुनाव से पहले ममता बनर्जी को अपना समर्थन दे दिया है। वहीं दूसरी तरफ बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस ने वामदलों के साथ अपना गठबंधन कर लिया है। हालांकि कांग्रेस ने महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ गठबंधन कर रखा है और आरजेडी ने बिहार चुनाव के दौरान आरजेडी के साथ गठबंधन किया था। 

कांग्रेस ने दी सफाई 
इस गठबंधन के बाद एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने सफाई देते हुए कहा है कि 'इन पार्टियों को राज्य में कोई जनाधार नहीं है'। हालांकि इन दलों का वाम-कांग्रेस के गठबंधन पर भरोसा न दिखाकर ममता को समर्थन करने से यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस और वाम मिलकर भी राज्य में बीजेपी को नहीं रोक सकते। इसके अलावा अगर ममता बनर्जी को बंगाल में जीत मिलती है और कांग्रेस अन्य राज्यों में अच्छा नहीं करती है तो इसका मतलब है कि आने वाले चुनावों में यह लोग बीजेपी के खिलाफ कांग्रस के नेतृत्व की जगह तीसरे मोर्चे के नेतृत्व को देखना चाहेंगे। पहले से ही यह बात काफी सामने आ रही है कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस विपक्ष का नेतृत्व करने लायक नहीं है।  

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राज्य में 'दीदी बनाम सब' चल रहा 
शिवसेना नेता संजय राउत ने अपने एक ट्वीट में कहा है कि राज्य में 'दीदी बनाम सब' चल रहा है। वह आरोप लगाते हैं कि राज्य में बीजेपी सभी 'एम' का इस्तेमाल कर रही है। बीजेपी दीदी के खिलाफ मनी, मसल और मीडिया सबकुछ इस्तेमाल कर रही है। वह कहते हैं इसलिए शिवसेना ने राज्य में चुनाव न लड़ने का निर्णय लेते हुए ममता बनर्जी को अपना समर्थन देने का निर्णय लिया है। हम ममता दीदी के साथ मजबूती से खड़े हैं।

कांग्रेस टीएमसी और बीजेपी दोनों से पीड़ित
लोकसभा में कांग्रेस के नेता और बंगाल कांग्रेस के प्रमुख अधीर रंजन चौधरी ने शिवसेना, सपा और राजद के समर्थन पर कहा है कि सबका अपना-अपना अनुभव है। वह कहते हैं इन सभी बाहरी क्षेत्रीय पार्टियों ने ममता को अपना समर्थन अपने अनुभव के आधार पर दिया है। जिस पर हम आरोप नहीं लगाएंगे। वह कहते हैं मगर राज्य मे कांग्रेस पीड़ित है। कांग्रेस ने टीएमसी का अत्याचार झेला है। अगर यही सब उत्तरप्रदेश, बिहार या महाराष्ट्र में हो रहा होता तो इनका निर्णय अलग होता।  

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राष्ट्रीय स्तर पर नहीं पड़ेगा फर्क
चौधरी कहते हैं कि वह उन पर कोई आरोप नहीं लगाएंगे क्योंकि बीजेपी का खतरा सच है मगर वह कहते हैं हम राज्य में टीएमसी की तानाशाही और बीजेपी के सांप्रदायिकता दोनों से पीड़ित है। राज्य में हाल में हुए पंचायत चुनावों में करीब 60 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और टीएमसी ने 20,000 से ज्यादा सीटों पर बिना किसी विरोध के जीत हांसिल की थी। अगर इस तरह की स्थिति यूपी, बिहार या महाराष्ट्र में होती तो इनकी राय अलग होती। मगर फिर भी इससे राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।  

 

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