Friday, Jun 25, 2021
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आंखों में रोशनी नहीं और छू रही हैं आसमान

  • Updated on 4/9/2016

Navodayatimes

नई दिल्ली (प्रियंका तिवारी)। जिनके आंखों में रोशनी नहीं होती उनकी जिंदगी दुनिया का कोई भी रंग नहीं देख पाती। उनकी दुनिया में सिर्फ अंधेरा होता है। आम तौर पर उनकी ख़त्म मान लिया जाता है, लेकिन इन अंधी लड़कियों की दुनिया को रोशनी से भरने का काम किया सोशल वर्कर शालिनी खन्ना ने किया है।

उन्होंने आंखों से देख पाने में असमर्थ इन लड़कियों के अंदर सेल्फ कॉन्फिडेंस भरा और उन्हें स्पा मसाज, कैफे मसाज की  ट्रेनिंग, रिसर्च स्टडीज, क्राफ्ट, कंप्यूटर वगैरह की ट्रेनिंग दे कर इन्हें मुख्यधारा में लाया हैं। अपने काम में कुशल ये लड़कियां अब अपने पैरों पर खड़ी हैं और सम्मान के साथ अपना जीवन जी रही हैं।  

नेशनल  एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड संस्था की शुरुआत वर्ष 2002 में हुआ। तब यह संस्था लगातार ब्लाइंड लड़कियों के जीवन में रोशनी फ़ैलाने का काम कर रही है। यह संस्था ब्लाइंड गर्ल्स को स्पा की ट्रेनिंग देकर उन्हें रोजगार मुहैया करा रही और उन्हें आत्म निर्भर बना रही है।  

ब्लाइंड लेकिन सेंसेस काफी डेवलप 
दोनों तरह के ये मसाज ब्लाइंड लड़कियां कुशलता से कर रही हैं। संस्था की संस्थापक शालिनी खन्ना ने बताया कि मसाज के लिए हाथ इस्तेमाल ज्यादा  होता है। आंखों से अक्षम होने के बाद भी इन लड़कियों के सेंसेस काफी डेवलप होते हैं। टच सेंसेस काफी डेवलप होने के कारण ये छू छू कर सबकुछ समझ लेती हैं। इनकी ट्रेनिंग के लिए हम डमी का इस्तेमाल करते हैं। क्लाइंट से ये पूछती हैं की कहा और शरीर के किस हिस्से में उसे तकलीफ है। उसके बाद ये उसे ट्रीट करती हैं।   

यहां दो तरह के ट्रेनिंग प्रोग्राम्स हैं। नॉन मेडिकल थाई मसाज वगैरह और दूसरा मेडिकल मसाज।सिखने के बाद उन्हें रोजगार मुहैया कराया जाता है। जिसके बाद न सिर्फ वे अपने लिए बल्कि अपनी परिवार को भी वे एक मजबूत आधार दे रही हैं। शालिनी खन्ना बताती हैं की हमारा स्पा मसाज का पहला बैच अभी निकला है, जिसका काफी अच्छा रेस्पॉन्स हमें मिल रहा है।   

नॉन मेडिकल 
नॉन मेडिकल में थाई मसाज और आयल मसाज किया जाता है। यह नार्मल बॉडी मसाज होता है।  जिसे सिखने के बाद ये स्पा मसाज पार्लर्स में मसाज वगैरह करती हैं।
   
मेडिकल मसाज 
हमारे यहां खास है जैपनीज मैन्युअल मसाज थेरेपी। यह थेरेपी जैपनीज सिखाते हैं। इसमें जॉइंट रिलेटेड और नर्व रिलेटेड समस्या का समाधान मसाज के जरिये किया जाता है। यह डीप टिश्यूज थेरेपी है। पेसेंट को इसमें 3-4 सिटिंग दी जाती है। यह थेरेपी न्यूरो रिलेटेड प्रॉबलम्स के लिए बेस्ट है।  

ब्लाइंड स्कूल में टैलेंट देख कर मिली प्रेरणा 
शालिनी खन्ना अपने इस सफर के बारे में बताती हैं कि जब वह ब्लाइंड स्कूल में कारपोरेट रिसर्चर थी उस दौरान उन्होंने देखा कि ब्लाइंड गर्ल्स काफी स्मार्ट होते हैं। उनके अंदर भी काफी कुछ करने की चाहत है लेकिन आंखों से ना देख पाने के कारण को हेल्पलेस हैं। उन्हें किसी भी तरह का सहयोग भी हासिल नहीं है।

शालिनी खन्ना को वहां से मोटिवेशन मिला की उन्हें ट्रेंड किया जाये तो ये काफी कुछ कर सकते हैं। शालिनी ने अकेले इस संस्था की नींव डाली थी। बाद में लोग उनके साथ जुड़ते गए। एक टीम के रूप में सबने इस संस्था को बढ़ाने में योगदान दिया।  

ब्लाइंड के लिए सुरक्षित है संस्था 
शालिनी खन्ना ने एक ऐसी संस्था की नीव डाली जो ब्लाइंड गर्ल्स के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है। जहां पेरेंट्स को भी अपनी बेटियों को भेजने में डर ना लगे। उन्हें यह विश्वास हो कि वहां से उनकी बेटियां अच्छा फ्यूचर हासिल करेंगी। शालिनी खन्ना के संस्था की खासियत को देखते हुए अब अच्छे घरों की लड़कियां भी उनके यहां आ रही हैं। 

ए टू जेड ट्रेनिंग 
शालिनी खन्ना बताती हैं कि उनकी संस्था में  ज्यादातर विलेजर्स गर्ल्स आती हैं। जहां माता- पिता अपनी बेटियों को घर से बाहर भी नहीं निकलने देते। इससे उनकी पढाई भी नहीं पूरी हो पाती, क्योंकि गावों में अभी भी अंधे बच्चों के एडुकेशन और डेवलपमेंट के लिए कुछ खास फैसलिटी नहीं है। वे बड़ी होकर संस्था में आती हैं।

यहां उन्हें एजुकेशन के साथ साथ हर तरह की ट्रेनिंग दी जाती हैं। पर्सनालिटी डेवलपमेंट पर भी ध्यान दिया जाता है। यहां ब्रेल ट्रेनर भी एवलेबल है। यहां इन गर्ल्स को  ए टू जेड ट्रेनिंग दी जाती है।  

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