Wednesday, Apr 14, 2021
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अलर्ट रहना ही आपको बचा सकता है साइबर अटैक से: अन्येश राय

  • Updated on 4/5/2021

नई दिल्ली/ संजीव यादव। विड के साथ एक बार फिर से साइबर क्राइम का ग्राफ तेजी से बढऩे लगा है, तरीके भी नए इजाद होने लगे हैं। क्राइम इस कदर देश में बढ़ा है कि जहा हर मिनट पर एक व्यक्ति इसका शिकार हो रहा है। वहीं महज 2 घंटे के दौरान राजधानी दिल्ली में किसी न किसी के साथ साइबर क्राइम से जुड़ा अपराध हो रहा है। इस अपराध के कई रूप हैं और हर बदले रूप में ये आपको किसी न किसी तरह से ऐसी चोट पहुंचाता है, जिससे न सिर्फ आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा ही चोटिल होती है बल्कि आप चंद मिनट में कंगाल भी हो सकते हैं।

हालांकि बढ़ते साइबर क्राइम को रोकने के लिए जहां केंद्र सरकार ने एक अंतरराष्ट्रीय पहल करते हुए नेशनल पोर्टल बनाया है। वहीं दिल्ली पुलिस भी एक्सपर्ट के जरिए इन पर अंकुश लगा रही है। हाल के बीते दिनों में दिल्ली साइबर सेल ने कई बड़े फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है, साथ ही चोरी, के्रडिट कार्ड धोखाधड़ी, कंप्यूटर से व्यक्तिगत डेटा हैक करना, अवैध डाउनलोडिंग, साइबर स्टॉकिंग, वायरस प्रसार जैसी चीजों पर अंकुश लगाया है। आखिर कैस इन पर दिल्ली पुलिस अंकुश लगा रही है और कैसे आप इस क्राइम का शिकार होने से बच सकते हैं, इसी पर दिल्ली साइबर सेल के डीसीपी अन्येश राय से नवोदय टाइम्स के लिए संजीव यादव ने विशेष बातचीत की। 

मौजूदा समय में साइबर क्राइम तेजी से बढ़ रहा है, पता नहीं कब कौन कहां से इसका शिकार हो जाए, ऐसा कैसे होता है? 

मौजूदा समय डिजिटल का है और जिस युग में हम रह रहे हैं, यहां पर टेक्नोलॉजी के दो मायने हैं, अगर उसे सही रूप में उपयोग किया जाए तो इसके परिणाम आपको सुखद और अच्छे मिलते हैं। इसे अगर यू कहें कि शैतानी दिमाग वाला इस्तेमाल करें तो बड़ी चोट पहुंच सकती है। ये क्राइम अदृश्य हैं और इसके लिए व्यक्ति का मौजूद होना जरूरी नहीं होता, कहीं से भी किसी भी समय क्रिमनल दिमाग का व्यक्ति साइबर के जरिए किसी को भी चोट पहुंचा सकता है। रही बात इसके बढऩे की तो जब डिजिटल अपने पैर पसारेगा तो ऐसे परेशानियां जरूर बढ़ेंगी क्योंकि इस डिजिटल युग में जितने बेरिकेड डिजिटल प्लेटफार्म पर होते हैं, उतने ही गेट भी ओपन होते हैं। 

हाल में दिल्ली साइबर सेल ने एक माह के दौरान कई फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया, जो राजधानी में बैठकर विदेशों में सैकड़ों लोगों के साथ ठगी कर चुक हैं, आखिर कैसे ये लोग ठगी करते हैं और किस तरह की तकनीक का प्रयोग करते हैं ?

इनके दो तरीके हैं, जिसमें पहला है टेक्सट का बोर्ड फार्म, जिसमें शातिर अपराधी बड़ी नामचीन कंपनियों का सहारा लेता है, जैसे एचपी, माइक्रोसाफ्ट, अमेजन, एडोब सहित कई कंपनियां। हैकर पॉपअप के जरिए एक फर्जी साइट का टैक्सट मैसेज फ्लैश कराते हैं, इन वेबसाइटों के ईदगिर्द कराते है। यू कहें कि (मालवेयर) की तरह एक वायरस का अटैक की तरह होता है, जबकि ये अटैक नहीं होता है लेकिन यूएस, कनाडा सहित विदेश में बैठे लोग में करीब 10 फीसदी इसमें फंसते हैं और उस लिंक को ओपन कर देते हैं, जिसके बाद उन्हें ये लगता है कि उनका सिस्टम खराब हो गया, फिर ये लोग उस साइट पर एक हेल्पलाइन नंबर भी देते हैं, जिस पर जब व्यक्ति कॉल करता है तो यहां बैठे कॉल सेंटर के लोग उन्हें अपने झांसे में लेते हैं और पासवर्ड लेकर उनके कंप्यूटर को हैक कर लेते हैं, जिसके बाद वह ठगी का शिकार बना लेते हैं। 

हाल ही में कॉल सेंटर के जरिए करीब 500 से अधिक विदेशी लोगों को ड्रग्स में फंसे होने को थ्रेट दी गई, वह भी भारतीय वित्त मंत्रालय के विभाग के आईआरएस की एक फर्जी मॉलवेयर टेक्सट के जरिए ठगी की गई। इन ठगों को आपने कैसे पकड़ा?

यह नई बात नहीं है, विदेशों में ऐसा होता देखा गया है लेकिन राजधानी दिल्ली में ऐसा केस पहली बार आया, जिसमें बिंदापुर में एक और जनकपुरी में 2 फर्जी कॉल सेंटर चल रहे थे। गिरफ्तार मालिकों में 3 साइबर एक्सपर्ट थे, इसके अलावा एक वित्त मंत्रालय में काम करता था, जिसके जरिए इन लोगों ने कहीं से डाटा चुरा लिया। इसके बाद इन लोगों ने उसी टेक्सट मॉलवेयर के जरिए विदेशों में अपना नेटवर्क चला रहे थे। जो लोग इनके झांसे में आए, उन्हें बताया गया कि आपका सोशल सिक्योरिटी नंबर, जोकि बैंक एकाउंट से लिंक है, उसमें कुछ ऐसे पैसे भी आए हैं जो ड्रग्स नेक्सस के हैं। हालांकि कइयों ने इस पर रिप्लाई नहीं दिया लेकिन कुछ डर गए, जिसके बाद उन्होंने दी गई हेल्प्लाइन पर संपर्क किया। इसमें ये लोग बताते थे कि सोशल सिक्योरिटी नंबर के एडमिन की तरफ से बात की जा रही है और आपका जो नम्बर है वो क्राइम सीन पर पाया गया है।

उससे जो भी बैंक अकाउंट ङ्क्षलक है वो सीज हो जाएगा। गिरफ्तारी की धमकी दी जाती थी, जिसके बाद डर कर लोग इन्हें उनके बैंक की डिटेल ले दे देते थे, जिसके बाद हो उनका एकाउंट खाली हो जाता था। हमने इस गैंग के 37 लोगों को गिरफ्तार किया है और नेशनल पोर्टल पर कुछ डिटेल भी साझा की है, जिसके बाद हैदराबाद, तेंलगाना, बेंगलूरू समेत 6 राज्यों की साइबर पुलिस ने ऐसे ही गैंग और फर्जी सेंटर पर रेड कर उन्हें पकड़ा। इसके अलावा साइबर सेल ने इस वर्ष 214 जालसाजों को गिरफ्तार किया है। साइबर सेल ने अभी तक की कार्रवाई में 278 वेबसाइट-प्रोफाइल को आपत्तिजनक कंटेंट के कारण बंद कराया है। आयुष्मान योजना विकास की फर्जी वेबसाइट से ठगी, सौर ऊर्जा संयंत्र और लैपटॉप बांटने की स्कीम, पीएम शिशु विकास योजना स्कीम, स्वास्थ्य एवं जनकल्याण संस्थान की फर्जी वेबसाइट से ठगी की वारदातों का खुलासा किया। 

यू कहें कि साइबर क्राइम तेजी से बढ़ रहा है और रोकथाम भी हो रही है लेकिन दिल्ली पुलिस कैसे सजग है। इस पर और अधिकांश सर्वर विदेशी होने के बाद इस पर कैसे अंकुश लगेगा ?

ये बात जरूर है कि अधिकांश नेटवर्क ऐक्सस जैैसे गूगल, इंस्टाग्राम, ट्विटर सहित अधिकांश सोशल प्लेटफार्म विदेशी सर्वर के माध्यम से ही भारत में चलते हैं। नतीजतन इन पर बेरीकेड््स आसानी से नहीं लग सकते लेकिन सजग होना ही साइबर अपराध को रोकने का एममात्र उपाय है। साइबर अपराधों को रोकने के लिए भारत सरकार ने बड़ी पहल की है। गृह मंत्रालय के अधीन अब नेशनल साइबर क्राइम रिपोटिंग पोर्टल बनाया गया है, जिसके तहत देश में कहीं भी साइबर से जुड़ा अपराध घटित हो तो व्यक्ति यहां पर अपनी शिकायत दे सकता है। यही नहीं पुलिस सहित राज्य पुलिस भी इस जगह पर अपने पासवर्ड के जरिए एक्सिस पर अलर्ट रहती है।

यहां लोड होते ही शिकायत हर साइबर टीम के पास जाती है और संबंधित राज्यों में पास जरूर, जिसके बाद इस पर एक साथ कार्य शुरू होता है। इसके अलावा राज्यों की साइबर पुलिस भी इस पोर्टल के जरिए अपराधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण डिटेल डालती है, जो एक सर्वर के जरिए साइबर पुलिस से संपर्क में रहती है, इसके बनने से ये काफी सरल हुआ है कि अब हमें किसी भी साइबर अपराध के जरिए निजी तौर पर दूसरे राज्य से संपर्क करने में देरी नहीं होती है और अगर कोई नंबर या डिजिटल साइट से क्राइम हुआ है तो सीधे पता भी चलता है और त्वरित कार्रवाई होती है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने कई सॉफ्टवेयर और साइबर लैब भी तैयार की है। देश की सबसे बड़ी और आधुनिक साइबर लैब दिल्ली पुलिस की ही है, जिसके लिए श्रेय कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव जी को जाता है। पुलिस आयुक्त खुद साइबर अपराध के प्रति सजग रहते हैं और उनके निर्देशन पर द्वारा साइबर घटित अपराधों बारी बारी से कार्य किया जाता है। 


अगर साइबर अटैक से बचना है तो क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, ताकि लोग सुरक्षित रह सकें? 

क्राइम को रोकने दो तरीके होते हैं। पहला है प्रिरवेंशन और दूसरा डिटेक्शन। इन्हीं से जरिए किसी भी क्राइम पर अंकुश लगता है। प्रिरवेंशन क्राइम के तहत आप सड़कों पर बेरीकेटिंग्स, पुलिसिंग और भागोलिक जांच कर उसे रोक सकते है और अंकुश लगाते हैं लेकिन डिटेक्शन में किसी भी चीज को खोजना बेहद आसान नहीं होता है, जब बात डिजिटल मोड की हो। मैने जैसे पहले ही कहा कि जब इस डिजिटल युग में जितने बेरीकेट डिजिटल प्लेटफार्म पर होते हैं, उतने ही गेट भी ओपन होते हैं। इसलिए इसको रोकने का सबसे बड़ा हथियार है, सजग रहना और वेवजह किसी भी चीज में न जाना। इस क्राइम को फिसिंग के जरिए किया जाता है, जैसे कि चारा फेंकना, जो इसमें फंसा उसके लिए निकलना आसान नहीं होता लेकिन फिसिंग से बचना ही एकमात्र उपाय है।

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