Friday, May 14, 2021
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यौन-शोषण के मसले पर छोटे कोर्ट के लापरवाही भरे फैसलों के खिलाफ 9 महिला वकील पहुंची SC

  • Updated on 10/16/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। यौन उत्पीड़न (Sexual harassment) के मामलों में आरोपी को जमानत देते समय रखी जाने वाली शर्तों के खिलाफ 9 से ज्यादा महिला वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में याचिका दाखिल की है। जिसमें सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि ऐसी शर्तें अपराध की गंभीरता को कम करती है और पीड़िता की तकलीफ को और बढ़ाती है उन्होंने इस मसले पर कोर्ट की सहायता मांगी है।

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9 महिला वकीलों ने उठाया मुद्दा
इन 9 महिला वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के सामने मध्यप्रदेश (Madhay Pradesh) का एक केस सामने रखा है। जिसमें जज ने आरोपी को जमानत  देने से पहले शर्त रखी थी कि वह पीड़ित के घर जाकर उससे राखी बंधवाए और उसे शगुन के तौर पर मिठाई खिलाए। कई बार जज इस तरह के फैसले सुना देते हैं जो बाद में पीड़ित को बहुत ज्यादा परेशान करने वाले होते हैं।  

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यौन-उत्पीड़न को लें गंभीरता से
ऐसे में अपर्णा भट्ट समेत सुप्रीम कोर्ट के करीब 9 महिला वकीलों ने इस तरह के मामले को उठाया है। उनका कहना है कि यौन-उत्पीड़न एक गंभीर मामला है। जिसमें कई बार महिला कुछ कहने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाती। ऐसे में पीड़ित को दोषी से मिलने के लिए कहना और भी ज्यादा कष्टदायक होता है। 

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2 नवंबर को होगी सुनवाई
इन महिला वकीलों के इस मामले पर 2 नंवबर को सुनवाई होने  वाली है। इसकी सुनवाई जस्टिस ए एम खानविलकर और बी आई गवई की बेंच सुनवाई करने वाली है। जजों ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है और अटार्नी जनरल से सलाह मांगी है कि वह इस मामले में हमारी मदद करें।  

 

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