Friday, May 14, 2021
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UPSC के छात्रों को SC से बड़ा झटका, महामारी की वजह से छूटी परीक्षा को नहीं दे पाएंगे दोबारा

  • Updated on 2/24/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। देश में सिविल सेवा की परीक्षा देने वाले उन छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है, जो पिछले साल कोरोना महामारी (Corona pendemic) की वजह से स्थगित परीक्षा में नही बैठ पाए थे। ऐसे लोगों ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में एक याचिका डाली थी। जिसमें अपील की गई थी कि महामारी की वजह से उनका आखिरी अटेम्प्ट खराब हो गया है। ऐसे में वह चाहते थे कि कोर्ट ने उन्हें दोबारा परीक्षा में बैठने की इजाजत मिले। मगर सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया।  

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कोर्ट ने छात्रों को नहीं दिया मौका 
बता दें कोर्ट से पहले केंद्र सरकार ने छात्रों को एक मौका देने की बात कही थी। छात्रों का कहना है कि महामारी की वजह से उनकी पढ़ाई प्रभावित हुई है, इसलिए वह चाहते हैं कि उन्हें एक बार फिर से उन्हें नया मौका मिलना चाहिए। लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका को यह कहते हैं हुए खारिज कर दिया है  कि अगर हम ऐसे आपकी बात मानते हैं तो फिर एक-एक करके सब हमसे यही मांग करने लगेंगे। जो कि सही नहीं है।   

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कोरोना में हुई थी काफी परेशानी 
बता दें पिछले साल कोरोना महामारी में सबसे ज्यादा परेशानी छात्रों को हुई थी। इसकी वजह से अचानक उनकी पढ़ाई रुक गई और सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए सभी कोचिंग संस्थान और कॉलेजों को भी बंद कर दिया गया था। जिस वजह से छात्रों को परीक्षाएं देने में बहुत परेशानी हुई थी। देश के अलग-अलग हिस्सों में इन परीक्षाओं को टालने के लिए भी उस समय आवाज उठाई जा रही थी मगर यह सब कुछ काम नहीं आया। सरकार ने किसी भी बड़ी परीक्षाओं को स्थगित नहीं किया । हालांकि इसकी लिए पूरे देश में आवाज उठाई जा रही थी। 

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9 फरवरी को सुरक्षित रखा था फैसला 
गौरतलब है कि इस याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति एमए खानविलकर, न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा और न्याय मूर्ति अजय रस्तोगी वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले में अपना निर्णय दिया है। बता दें कोर्ट के आदेश से उन लोगों को बड़ा झटका लगा है। जिन्होंने अक्टूबर 2020 की परीक्षा कोरोना महामारी की वजह से छूट गई थी। यह लोग कोर्ट जाकर दोबारा परीक्षा में बैठने की मांग कर रहे थे मगर कोर्ट ने उम्र का बैरिकेड होने की वजह से ऐसे लोगों को मना कर दिया था। इन लोगों ने मांग की थी दोबारा से परीक्षा में बैठने का मौका दिया जाए। कोर्ट ने इस फैसले को अपने 9 फरवरी के फैसले के दिन सुरक्षित रख लिया था। 

 

 

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