Thursday, Mar 21, 2019

मोदी की विदेश नीति पर ऊंगली उठाने वालों को सुषमा ने लताड़ा

  • Updated on 3/15/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दुनिया को पता है कि जैश सरगना आतंकवादी मौलाना मसूद अज़हर को पाकिस्तान ने शरण दे रखी है। पुलवामा आतंकी हमले सहित कई आतंकी घटनाओं को लेकर मसूद अज़हर भारत में वांछित है।

अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने इस खूंखार आतंकवादी को संयुक्त राष्ट्र के जरिए ग्लोबल आतंकी घोषित करने में चौथी बार अंतरराष्ट्रीय कोशिश की थी।  चीन ने मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव पर वीटो लगाकर भारत की सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इसके साथ ही ये प्रस्ताव भी रद्द हो गया।

दरअसल इसके बाद लगातार विदेश नीति को लेकर प्रधानमंत्री को सभी विपक्षी घेरने लगे थे। इसलिए सुषमा स्वराज ने प्रधानमंत्री के बचाव में ट्वीट पर ट्वीट करके विपक्षियों की बोलती बंद कर दी। सुषमा स्वराज ने एक के बाद एक कई ट्वीट करके कहा कि, 'मैं यह सभी फैक्ट इसलिए सामने रख रही हूं, क्योंकि कुछ नेताओं का मानना है कि मसूद को संयुक्त राष्ट्र से ग्लोबल आतंकी घोषित नहीं करा पाना मोदी सरकार की नाकामी है।

जो लोग ये आरोप लगा रहे हैं वो एक बार साल 2009 की स्थिति देख लें, जब भारत संप्रग सरकार के तहत यूएन में अकेला प्रस्तावक था । सुषमा ने बताया कि साल 2009 में भारत अकेला था, जो मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगवाना चाहता था, जबकि 2019 में हमारे साथ पूरा विश्व है। साथ ही सुषमा ने बताया कि मसूद को सूचीबद्ध करने के प्रयासों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अभूतपूर्व समर्थन मिला है।

सुषमा ने अपने ट्वीट में लिखा कि, अब तक ऐसी कोशिश चार बार हो चुकी है और अभी तक इस खूंखार आतंकी को यूएन से ग्लोबल आतंकी घोषित करने में सफलता नहीं मिल पायी है।

आतंकी गुट जैश ए मोहम्मद के मुखिया मौलाना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने में चीन के रोड़ा बनने पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से डरे हुए हैं।  राहुल ने ट्वीट कर दावा किया था कि पीएम गुजरात में शी जिनपिंग के साथ झूला झूलते हैं, दिल्ली में गले मिलते हैं, चीन में उनके सामने झुक जाते हैं, चीन उन्हें घुटने टेका रहा है।

खैर जिस मसूद अजहर को आतंकवादी करार दिए जाने को लेकर भारत के साथ- साथ यूएनओ में माथापच्ची का दौर चल रहा है, उसी मसूद अज़हर के संगठन को 15 मुल्कों वाली सुरक्षा परिषद पहले ही आतंकवादी संगठन करार दे चुकी है।

तो ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर चीन मसूद अजहर को लेकर क्यों आनाकानी में लगा हुआ है। क्या चीन को मसूद अजहर से कोई फायदा होता है। गौरतलब है कि चीन की इस हरकत के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा, जब तक आतंकियों के खिलाफ पाकिस्तान कोई ठोस कार्रवाई नहीं करता है, तब तक पाकिस्तान से कोई बातचीत नहीं होगी।

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