Wednesday, Aug 17, 2022
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निलंबित सांसदों का संसद परिसर में धरना, सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाया

  • Updated on 12/1/2021

नई दिल्ली/नेशनल ब्यूरो। राज्यसभा से निलंबित विभिन्न दलों के 12 सांसदों ने बुधवार को संसद परिसर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास धरना दिया और निलंबन रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि निलंबन रद्द होने तक वे इसी तरह हर रोज धरना देंगे। इस दौरान सदन के भीतर भी विपक्ष ने इसी मुद्दे पर जमकर हंगामा काटा, जिसके चलते प्रश्नकाल और शून्यकाल बाधित रहा और राज्यसभा की कार्यवाही नहीं चलने दी।

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संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन सोमवार को राज्यसभा में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के 12 सांसदों को मौजूदा सत्र की शेष अवधि तक के लिए उच्च सदन से निलंबित कर दिया गया था। निलंबित सांसद बुधवार को संसद परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने धरने पर बैठे। उनका कहना है कि जब तक निलंबन रद्द नहीं होगा, तब तक वे संसद की कार्यवाही के दौरान सुबह से शाम तक महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने धरने पर बैठे रहेंगे। निलंबित सांसदों का समर्थन करते हुए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने फेसबुक पोस्ट में कहा, ‘‘तानशाही के खिलाफ हम गांधीवादी खड़े हैं। हम झुके नहीं।’’

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निलंबित सांसदों में शामिल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य राजमणि पटेल ने कहा कि सरकार ने षड्यंत्र के तहत सांसदों का निलंबन किया है। उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों की वापसी विधेयक, पेगासस, महंगाई, बेरोजगारी, चीन की आक्रामकता, पेट्रोल-डीजल-रसोई गैस की बढ़ती कीमतों जैसे जनमुद्दों पर कोई चर्चा न हो सके और न ही कोई सरकार से सवाल कर सके, इसलिए विपक्षी सदस्यों के खिलाफ यह कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि मॉनसून सत्र के दौरान कुछ सांसदों को विदेश भेजने के बाद सरकार ने अचानक से कृषि कानून पेश किया था। यह सरकार की षड्यंत्रपूर्ण रणनीति थी। राजमणि ने आरोप लगाया कि सरकार बहुमत के नाम पर तानाशाही करना चाहती है। जिन सांसदों को निलंबित किया गया, उन्हें न इसकी सूचना दी गई और न ही उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया, जो कि नियम विरुद्ध तो है ही, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के भी खिलाफ है।

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वहीं, कांग्रेस के निलंबित सांसद सैयद नासिर हुसैन ने कहा कि हम लोगों को जनता की आवाज उठाने की सजा दी गई है। सरकार की ओर से असंवैधानिक तरीके से निलंबन का प्रस्ताव लाया गया। इसको वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से माफी के लिए कहा गया है। माफी मांगने का सवाल ही नहीं उठता। सदन में जनता की आवाज उठाने के लिए माफी क्यों मांगी जाएगी? निलंबित सांसद और कांग्रेस नेता रिपुन बोरा ने कहा कि निलंबन का फैसला अलोकतांत्रिक है। सरकार मनमाने ढंग से निलंबन का प्रस्ताव लेकर आई।

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इस मुद्दे पर विपक्ष ने पूरे दिन राज्यसभा की कार्यवाही भी नहीं चलने दी। विपक्ष के लगातार हंगामे की वजह से राज्यसभा में प्रश्नकाल और शून्यकाल बाधित रहा और तीन पर सदन की बैठक स्थगित करनी पड़ी। इसके बाद भी सदन व्यवस्थित नहीं हो सका और चौथी बार दिन भर के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।

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