Sunday, Jan 23, 2022
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talibani thinking should not be allowed to become part of farmers'''''''' movement: bjp

तालिबानी सोच को किसान आंदोलन का हिस्सा नहीं बनने देना चाहिए: बीजेपी

  • Updated on 10/16/2021

नई दिल्ली/टीम डीजिटल भारतीय जनता पार्टी ने राजधानी दिल्ली-हरियाणा सीमा पर किसानों के प्रदर्शन स्थल के पास कुंडली में एक व्यक्ति की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या किए जाने पर किसान नेताओं को निशाने पर लिया है। साथ ही कहा कि इन प्रदर्शनों के पीछे के 'अराजकतावादियों को बेनकाब करने की जरूरत है, क्योंकि वे देश का बड़ा नुकसान कर रहे हैं।

हरियाणा के सोनीपत जिले में शुक्रवार को एक शख्स का शव बेरिकैड से लटका मिला, जिसके हाथ काट दिए गए थे। सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक वीडियो में दिख रहा है कि कुछ निहंग जमीन पर खून में लथपथ पड़े व्यक्ति के पास खड़े हैं और उसका कटा हुआ हाथ भी वहीं पड़ा है।

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग ने बयान जारी कर कहा की सिंघू बॉर्डर पर एक निर्दोष व्यक्ति की नृशंस हत्या ने स्पष्ट रूप से साबित किया है कि आपराधिक लोगो ने किसान आंदोलन को पीछे छोड़ दिया है। चुग ने कहा की किसानों द्वारा विरोध स्थल पर किसी भी तरह का अपराध एक खतरनाक संकेत है और नृशंस हत्या ने संकेत दिया कि आंदोलन के इरादे से सब ठीक नहीं है।

चुग ने कहा- किसान नेताओं को विरोध स्थल पर आपराधिक गतिविधियों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अपराधी खुद को आत्मसमर्पण करें।  चुग ने कहा की तालिबानी सोच को इस आंदोलन का हिस्सा नहीं बनने देना चाहिए।

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  भाजपा आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय ने किसान नेता राकेश टिकैत और राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव पर निशाना साधते हुए एक ट्वीट में कहा कि अगर टिकैत ने लखीमपुर में भीड़ द्वार हत्या किए जाने को जायज नहीं ठहराया होता, जब यादव उनके बगल में खामोश बैठे थे तो कुंडली बॉर्डर पर युवक की हत्या नहीं हुई होती।

उन्होंने कहा कि इन प्रदर्शनों के पीछे के अराजकतावादियों को बेनकाब करने की जरूरत है। घटना की कड़ी निंदा करते हुए भाजपा के प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि यह एक वीभत्स हत्या है और यह किसानों का काम नहीं है, जो दूसरे नागरिकों के लिए अपनी जान दे देंगे।

भाटिया ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा, ये पेशेवर प्रदर्शनकारी खुद को किसान बताकर राष्ट्र का बड़ा नुकसान कर रहे हैं, जिन्होंने निर्देष व्यक्ति की जान ली है। महिलाओं का बलात्कार किया है और तिरंगे का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि क्रिया की प्रतिक्रिया के तौर पर नागरिकों की हत्याओं को जायज ठहराया है, उन्हें किसान नहीं कहा जा सकता है।

बता दें कि किसानों का प्रदर्शन स्थल सिंघू, दिल्ली- हरियाणा सीमा के नजदीक स्थित है। किसान पिछले करीब 10 महीनों से केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।  

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