Thursday, Feb 09, 2023
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कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव: थरूर भी मनीष- कार्ति की राह, कहा- डेलीगेट्स की सूची सार्वजनिक हो

  • Updated on 9/3/2022

नई दिल्ली/नेशनल ब्यूरो। कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लडऩे की इच्छा जता चुके पार्टी के सांसद शशि थरूर ने भी पार्टी डेलीगेट्स (मतदाता) सूची सार्वजनिक करने की मांग उठा दी है। सूत्रों के मुताबिक थरूर ने पार्टी के केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण के प्रमुख मधुसूदन मिस्त्री को लिखे पत्र में मतदाता सूची प्रकाशित करने की मांग की है। खबर आ रही है कि असम के सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने भी यही मांग रखी है।

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कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और काॢत चिदंबरम ने यही मांग बुधवार को उठा दी थी। अब थरूर की ओर से भी यही मांग रखे जाने का मामला सामने आया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह मांग तेजी से बढ़ती जा  रही है। असम से सांसद प्रद्युत बोरदोलोई की ओर से भी यही मांग रखे जाने की जानकारी सूत्र दे रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि थरूर ने मिी को लिखे पत्र में कहा कि डेलीगेट्स के बारे में जानना महत्वपूर्ण है क्योंकि अगर उनका नाम अंतिम सूची में नहीं आता तो नामांकन पत्र खारिज हो सकता है। उन्होंने कहा कि हर किसी को यह जानने का हक है कि कौन नामित कर सकता है तथा कौन मतदान कर सकता है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। 

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वहीं, मिस्त्री का कहना है कि पार्टी अध्यक्ष पद के चुनाव से जुड़ी सारी प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और कांग्रेस के संविधान के मुताबिक है। उन्होंने कहा कि पार्टी संविधान के अनुसार निर्वाचक मंडल (डेलीगेट) की सूची को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, लेकिन उम्मीदवारों को यह उपलब्ध कराई जा सकती है। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने मतदाता सूची सार्वजनिक करने की मांग कर रहे नेताओं को जवाब देते हुए कहा कि भ्रम नहीं फैलाना चाहिए। मुक्त व्यवस्था पर गर्व होना चाहिए।
बीते हफ्ते कांग्रेस छोड़ चुके वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने पांच पन्ने के अपने इस्तीफे में सबसे पहले कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाया था और कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव को फर्जी बताया था। इसके बाद कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने डेलीगेट्स की सूची को लेकर सवाल खड़े किए। अब यह मामला तूल पकड़ता दिख रहा है। 

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22 साल पहले भी ऐसा ही विवाद उठा था, जब जितेंद्र प्रसाद ने सोनिया गांधी को चुनौती दी थी। हालांकि उस चुनाव में जितेंद्र प्रसाद को 7,542 में से केवल 94 वोट मिले थे। नवम्बर 2000 में कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव हुए और जनवरी 2001 में मस्तिष्क रक्तस्राव के चलते जितेंद्र प्रसाद की मृत्यु हो गई थी।

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