Wednesday, Oct 27, 2021
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सहकारिता सम्मेलन में बोले अमित शाह, देश को साल 2022 में मिलेगी नई सहकारी नीति

  • Updated on 9/25/2021

नई दिल्ली /सुनील पाण्डेय  : देश के पहले सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज यहां कहा कि सहकारी समितियों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का काम उनका मंत्रालय करेगा। भारत सरकार का सहकारिता मंत्रालय सभी राज्यों के साथ सहकार, सहयोग करके चलेगा। ये किसी राज्य से संघर्ष के लिए नहीं बना है। देश के पहले सहकारिता सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए अमित शाह ने कहा कि उन्हें गर्व है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें पहला सहकारिता मंत्री होने का मौका दिया है। शाह ने कहा कि सहकारिता को मजबूत करने की दिशा में सरकार नई सहकारी नीति लाएगी। दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में शनिवार को पहले सहकारिता सम्मेलन का आयोजन किया गया। शाह ने स्टेडियम में मौजूद दो हजार से अधिक सहकारिता सहयोगियों और सोशल मीडिया के माध्यम से जुड़े करीब छह करोड़ लोगों को सहकारिता मंत्रालय के उद्देश्यों और सहकारिता से समृद्धि पाने के मूल मंत्र का अर्थ बताया। शाह ने कहा, मैं सहकारिता मंत्री के नाते देशभर के नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहना चाहता हूं कि अब लापरवाही का समय समाप्त हो गया है। प्राथमिकता का समय शुरू हुआ है। इसलिए सब साथ मिलकर सहकारिता को आगे बढ़ाएं। अमित शाह ने विश्व की नंबर एक सहकारी समिति इफको द्वारा निर्मित विश्व के पहले नैनो तरल यूरिया को सराहा। साथ ही कहा कि नैनो तरल यूरिया कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाएगा।

अमित शाह ने कहा, भारत में सहकारिता आंदोलन कभी अप्रासंगिक नहीं हो सकता। यहां के विचारों, जनता के स्वभाव में सहकारिता घुल मिल गई है। ये कोई उधार लिया हुआ विचार नहीं है। सहकारिता आंदोलन भारत के ग्रामीण समाज की प्रगति करेगा और एक नई सामाजिक पूंजी की अवधारणा भी खड़ी करेगा। सहकारिता आंदोलन के ऐतिहासिक महत्व के बारे में शाह ने कहा, मैं 25 साल तक सहकारिता आंदोलन से जुड़ा रहा हूं। देश पर जब-जब कोई विपदा आई है, सहकारिता आंदोलनों ने देश को बाहर निकाला है। 

लिज्जत पापड़ से हजारों महिलाओं को रोजगार मिला

   कॉपरेटिव बैंक बिना मुनाफे की चिंता किए लोगों के लिए काम करते हैं। क्योंकि, भारत के संस्कारों में सहकारिता है। प्रधानमंत्री जी के मन की इच्छा है कि छोटे से छोटे व्यक्ति को विकास की प्रक्रिया में हिस्सेदार बनाना, सहकारिता की प्रक्रिया से हर घर को समृद्ध बनाना और हर परिवार की समृद्धि से देश को समृद्ध बनाना, यही सहकार से समृद्धि का मंत्र है।  शाह ने सहकारिता के क्षेत्र में अमूल व लिज्जत का उदाहरण देते हुए कहा कि अमूल से जहां देश के करोड़ों किसान जुड़े हुए हैं तो लिज्जत पापड़ से हजारों महिलाओं को रोजगार मिला है। देश में सहकारिता को मजबूत करने के साथ-साथ अब इसका आधुनिकीकरण भी करना है। अमित शाह ने कहा कि हमने तय किया है कि कुछ समय के अंदर नई सहकारी नीति जो पहले 2002 में अटल जी लेकर आए थें और अब 2022 में मोदी जी लेकर आएंगे और आजादी के अमृत महोत्सव में नई सहकारी नीति बनाने की हम शुरुआत करेंगे। 

देश की 5 ट्रिलियन की इकोनॉमी के लिए सहकारिता की जरूरत

  देश के विकास में सहकारिता के योगदान का महत्व बताते हुए अमित शाह ने ये भी कहा कि भारत के 91 प्रतिशत गांवों में सहकारी सहमितियां हैं। देश की 5 ट्रिलियन की इकोनॉमी के लिए सहकारिता की जरूरत है। अमित शाह ने कहा कि सहकारिता गरीबों और पिछड़ों के विकास के लिए है। आज सहकारिता से 36 लाख करोड़ परिवार जुड़े हुए हैं। सहकारिता भारत के संस्कारों में हैं, सबको साथ लेकर चलना है।    कार्यक्रम को सहकारिता राज्य मंत्री  बी. एल. वर्मा और इंटरनैशनल कोआपरेटिव एलांयस (ग्लोबल) के अध्यक्ष डॉ. एरियल ग्वार्को इफको के चेयरमैन सरदार बलविंदर सिंह, इफको के प्रबंधन निदेशक उदय शंकर अवस्थी, सहकारिता मंत्रालय के सचिव देवेंद्र कुमार सिंह कृभको के चेयरमैन चंद्रपाल सिंह यादव आदि ने भी संबोधित किया।

इफको ने गरीब क्रांति को एक नई दिशा दी 

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि इफको ने गरीब क्रांति को एक नई दिशा देने का काम किया।  अमित शाह ने कहा कि गरीब कल्याण और अंत्योदय की कल्पना सहकारिता के बिना हो ही नहीं सकती और देश में पहले जब भी विकास की बात होती थी तब सबसे पहले पंडित दीनदयाल ने अंत्योदय की बात की और आज उनका जन्मदिन लाखों-करोड़ों कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा प्राप्त करने का दिन है। अमित शाह ने कहा कि आजादी के 75 सालों के बाद और ऐसे समय पर जब सहकारिता आंदोलन की सबसे ज्यादा जरूरत थी, उस समय देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय बनाया। 
 
सहकारिता के आंदोलन को आगे बढ़ाना होगा : अमित शाह 

  केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश के विकास में सहकारिता बहुत महत्वपूर्ण योगदान देती है और ये योगदान आज भी है, लेकिन अब भी कई आयामों तक पहुंचना अभी बाकी है। उन्होंने कहा कि इसके बारे में नए सिरे से सोचना होगा, नए सिरे से रेखांकित करना होगा, हमारे काम का दायरा बढ़ाना होगा, काम में पारदर्शिता लानी होगी, और काम में सहकारिता की भावना को स्वभाव और संस्कार की तरह शामिल कर सहकारिता के आंदोलन को आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों किसानों, वंचितों, पिछड़ों, दलितों, गरीबों, उपेक्षितों, महिलाओं के विकास का मार्ग केवल सहकारिता के माध्यम से ही प्रशस्त हो सकता है।
 

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