Thursday, Feb 09, 2023
-->
there-was-a-rift-among-the-farmers-a-camp-had-distanced-itself-from-yogendra-yadav

किसानों में दोफाड़, एक खेमे ने योगेंद्र यादव से किया किनारा, कहा आंदोलन से उन्हें रखा जाए दूर 

  • Updated on 8/29/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। किसानों के संयुक्त किसान मोर्चा में भी अब दोफाड़ हो गए हैं। नई दिल्ली में 7 नवम्बर 2020 को एसकेएम गैर-राजनीतिक तरीके से किसानों के हितों के लिए आंदोलन लडऩे के लिए बनाया गया था और उसी सोच को आगे बढ़ाते हुए 22 अगस्त 2022 को जंतर-मंतर पर एक किसान महापंचायत का आयोजन संयुक्त किसान मोर्चा अराजनैतिक द्वारा किया गया जिसमें देशभर से हजारों किसानों ने भाग लिया। इस महापंचायत के मुख्य मुद्दे लखीमपुर खीरी के किसानों को न्याय, एमएसपी गारंटी कानून, किसानों की कजऱ्मुक्ति, गन्ने का भुगतान आदि थे। 
    एसकेएम अराजनैतिक का मकसद सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ किसानों, नौजवानों व अन्य वर्गों को आंदोलन के लिए तैयार करना है। एसकेएम अराजनैतिक किसी अन्य किसान नेता के खिलाफ बयानबाजी करने में विश्वास नहीं रखता लेकिन बड़े दु:ख की बात है कि तथाकथित किसान नेता योगेंद्र यादव ने 22 अगस्त को जंतर-मंतर किसान पंचायत के बाद एसकेएम अराजनैतिक के ऊपर अशोभनीय टिप्पणी करी जो देश के किसानों का अपमान था। 
     किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने आरोप लगाया कि एसकेएम से लेकर अब तक योगेंद्र यादव की भूमिका संदिग्ध रही है जिससे उन पर कई बार कार्रवाई भी की गई है। हाल ही में उन्होने सुझाव रखा कि एसकेएम में शामिल कोई भी नेता राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने व राजनीतिक पार्टियों के साथ मंच साझा करने के लिए स्वतंत्र है। किसानों के नाम पर अपने राजनीतिक हित साधने की मंशा योगेंद्र यादव की शुरू से रही है, पिछले दिनों में यह बात योगेंद्र यादव ने कांग्रेस के कार्यक्रम में शामिल होकर दोबारा सिद्ध कर दी। इसलिए योगेंद्र यादव जैसे राजनेता को किसान आंदोलन से दूर रखा जाए। 
 

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
comments

.
.
.
.
.