Monday, Mar 30, 2020
threat over the rs seat of digvijay singh aftet the change in politics

मध्य प्रदेश में तख्ता पलट के बाद राज्यसभा चुनाव स्थगित, दिग्गी राजा की सीट पर संकट मंडराया

  • Updated on 3/26/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कोरोना वायरस (corona virus) से मध्य प्रदेश के कांग्रेसी दिग्गज दिग्गी राजा की सीट पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। दिग्विजय सिंह (digvijay singh) के अलावा भाजपा के प्रभात झा और सत्यनारायण जटिया का कार्यकाल भी 9 अप्रैल को खत्म हो रहा है। हालांकि मार्च तक ये हालात कांग्रेस के पक्ष में थे और दिग्विजय सिंह की सीट को सुरक्षित माना जा रहा था, मगर अब हवा का रुख बदल चुका है।

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पार्टी की नीतियां बरैया को आगे ले जाने के पक्ष में
सिंधिया गुट के विधायकों के इस्तीफे के बाद अब दो सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों को जिताया जा सकता है। फिलहाल राज्ससभा में कांग्रेस के दो प्रत्याशियों के लिए अब एक ही सीट बची है। लिहाजा फूल सिंह बरैया और दिग्विजय सिंह में से किसी एक नेता को ही सदन में जाने का मौका मिलेगा। पार्टी की नीती पिछड़ी जातियों के पक्ष में है जिसके चलते बरैया की उम्मीदवारी ज्यादा आसान दिखाई दे रही है।

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दोनों गुट के नेताओं को मिला लामबंदी का वक्त
अब चुनावों में ज्यादा वक्त मिल गया है तो दोनों नेता अपनी पार्टी के नेताओं को लामबंद कर सकते हैं। हालांकि इस आंकड़े को दिग्विजय सिंह ने पहले ही भांप लिया था और सिंधिया गुट के दस विधायकों को वापस लाने की भूरी-भूरी कोशिशें भी की थी। मगर कोई फायदा नहीं हो सका।

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पहले से चल रही थी दिग्विजय की कवायद
ऐसा नहीं है कि राज्यसभा की इस सीट के लिए दिग्विजय सिंह की भागदौड़ कोई नई है। इससे पहले उन्होंने ज्योतिरादित्य को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाए जाने से रोक कर अपना रास्ता क्लीयर करवा लिया था। मगर ज्योतिरादित्य के भाजपा में जाने के बाद उनका राज्यसभा में जाना तय हो चुका है मगर उनका पत्ता कांग्रेस से काटने वाले दिग्विजय सिंह खुद कहीं के नहीं रहे। माना जा रहा है कि पार्टी में बढ़ते असंतोष और ज्योतिरादित्य की ताकत को आंकने में दिग्गी राजा चूक गए।

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कौन कहां तक पहुंचेगा, क्या कहते हैं आंकड़े
फिलहाल एमपी विधानसभा में 206 सदस्य हैं। जिनमें से 107 भाजपा के और 92 कांग्रेसी विधायक हैं। चार निर्दलीय विधायकों में से पहले चार कांग्रेस के साथ खड़े थे उनमें से भी अब दो बचे हैं। बसपा और सपा पहले ही भाजपा का दामन थाम चुकी हैं। हर राज्यसभा प्रत्याशी के लिए कम से कम 52 वोट चाहिए, लिहाजा भाजपा अपने दम पर ही दो प्रत्याशियों को आगे ले जा सकती है। दिग्विजय सिंह और बरैया में से एक का पत्ता कटना तय है।

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