Tuesday, Nov 30, 2021
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टिकरी बॉर्डर: नहीं मानी सरकार तो नए साल के साथ मकर संक्राति और लोहडी भी धूमधाम से मनाएंगें

  • Updated on 12/28/2020

नई दिल्ली (अनामिका सिंह): 33 दिन किसानों को टिकरी बाॅर्डर (Tikri Border) पर आंदोलन करते हुए हो गए हैं। ऐसे में किसानों का लंगर और खाना राजनीतिक गलियारों में खासा चर्चा का विषय बना हुआ है। कहीं बिरयानी व पिज्जा बन रहा है तो कहीं मिठाईयां, पकौडे, कचैरियां छन रही हैं। ऐसे में किसानों ने तय कर लिया है कि अगर केंद्र सरकार ने उनकी बातों को नहीं माना तो बाॅर्डर पर ही धूमधाम से नया साल भी मनाएंगें और मकर संक्राति और लोहडी भी। इसकी तैयारियां भी किसानों ने अभी से करनी शुरू कर दी है।  

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किसानों ने टेक्टर पर लगाए बड़े बड़े स्पीकर
किसानों ने अपने ट्रेक्टर पर बडे-बडे स्पीकर, बूफर सिस्टम लगवा लिए हैं ताकि नए साल को तेज म्यूजिक बजाकर जबरदस्त डांस किया जा सके। रातभर जगने के लिए बडी मात्रा में लकडियां भी मंगवाई गई हैं और कई टन मूंगफली, रेवडी, गज्जक, पापकाॅर्न सहित विशेष पकवानों का भी इंतजाम किया जा रहा है। ताकि रात के समय जगह-जगह आग जलाकर नाच व गाने के साथ भरपूर खाने का भी लुत्फ उठा सकें। इतना ही नहीं छुट्टियां होने की वजह से टिकरी बाॅर्डर पर भारी संख्या में युवा भी नए साल पर एकत्र होने वाले हैं। सूत्रों ने बताया कि कई मंडलियां भी इस दौरान आएंगी जो कीर्तन-भजन के साथ ही भांगडा व गिद्दे जैसे नृत्यों का आयोजन करेंगीं। यानि तय है कि इस बार दिल्ली के बाॅर्डर पर जबरदस्त रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन भी किसान करने वाले हैं। 

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पंजाब के लोग जीवट हैं जो हमेशा रहेंगे: रिया चैधरी
रोहतक विश्वविद्यालय से एलएलबी की स्टूडेंट रिया चैधरी पहले दिन से ही इस आंदोलन का हिस्सा हैं। रोजाना रात में वो अपने घर चली जाती हैं और सुबह तडके ही टिकरी बाॅर्डर पहुंच जाती हैं। रिया ने कहा कि पंजाब के लोग बहुत जीवट हैं और हमेशा रहेंगे। अपने इस सांस्कृतिक विरासत को पंजाब हमेशा जिंदा रखना जानता है और विश्व में कहीं भी रहें इसे जिंदा रखा भी है। तो फिर ये तो टिकरी बाॅर्डर है अपना ही इलाका यहां त्यौहार मनाने से कैसे चूक जाएं। 

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जब सब साथ हैं तो क्यों ना मनाएं खुशी से त्यौहार: बलदेव सिंह
यहां पंजाब-हरियाणा ही नहीं बल्कि हरेक प्रदेश के किसान इकट्ठा हुए हैं। ऐसे में जब सभी प्रांतों के किसान भाई यहां मौजूद हैं तो इस मौके को क्यों छोडा जाए। पता नहीं फिर कब ऐसा किसानों का समागम देखने को मिलेगा। इसलिए इस बार यदि केंद्र सरकार नए साल से पहले नहीं मानी तो किसान यहां खुशी-खुशी नया साल भी मनाएंगें और मकर संक्राति और लोहडी भी। हमें अपने भगवान पर पूरा विश्वास है कि वो हमारी मेहनत को सफल जरूर करेगें और किसान एक नया अध्याय लिखेंगे। 

 

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