Tuesday, Aug 03, 2021
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UP के बाद MP में लव जेहाद कानून पर भड़के ओवैसी, BJP को दी यह सलाह

  • Updated on 12/29/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। उत्तरप्रदेश (Uttarpradesh) के बाद अब मध्यप्रदेश (Madhay Pradesh) सरकार ने भी लव जिहाद पर नया कानून बना दिया है। ऐसे में एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने शिवराज राज सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने शिवराज के साथ-साथ बीजेपी की सभी राज्य सरकारों को चुनौती देते हुए कहा है कि संविधान में लव जिहाद की कोई परिभाषा नहीं है। 

उन्होंने एक सामाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा है कि संविधान में लव जिहाद की कोई परिभाषा नहीं है। वह कहते हैं कि अगर बीजेपी शासित राज्यों को कानून ही बनाना है तो वह एमएसपी और रोजगार पर कानून बनाएं न कि लव जिहाद पर। उन्होंने भारतीय संविधान के कुछ अनुच्छेदों को जिक्र करते हुए कहा कि आर्टिकल 21, 14 और 25 हमें अपनी मर्जी से जीवन जीने का अधिकार देता है। जबकि राज्य इन्हें छीनने की कोशिश कर रहा है।  

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दोषियों के लिए दस साल की सजा की व्यवस्था
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने पिछले दिनों लव जिहाद पर सख्त कानून बनाने की बात कही थी। अब इस पर विधेयक लाने की तैयारी भी शुरू कर दी गई। 

इस कानून के तहत शुरुआत में दोषियों पर पांच साल की सजा की बात कही गई, लेकिन बाद में सजा बढ़ाकर दस साल करने की मांग हो रही है। हिंदू संगठनों ने भी कानून के प्रविधान को सख्त करने की मांग उठाई है। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने भी कहा है कि दोषियों के लिए दस साल की सजा की व्यवस्था की जाएगी। 

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लव जिहाद की धाराओं के तहत मुकदमा

प्रदेश सरकार चाहती है कि कानून में ऐसे प्रविधान किए जाएं कि दोषियों को वयस्क होने पर अपने जीवन के संदर्भ में निर्णय लेने के अधिकार से प्रस्तावित कानून को चुनौती न मिले। इसके लिए सोच विचार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि ऐसे विवाह को छल से किए गए विवाह की श्रेणी में लाकर रद्द करने की व्यवस्था बनाई जा सकती है। विवाह रद्द होने पर आरोपितों पर लव जिहाद की धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जा सके, ऐसे प्रविधान का भी प्रयास है।   

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कोर्ट ने बताया मौलिक अधिकार
कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए काफी सख्तीसे यह कहा है कि अंतरधार्मिक विवाह दो वयस्कों की चुनने का अधिकार है। यह अधिकार उन्हें भारत का संविधान देता है। उन्हें किसी जाति या धर्म के आधार यह उनसे यह अधिकार नहीं छीना जा सकता। बता दें यह दो लोगों का मौलिक अधिकार है।  

 

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