Tuesday, Oct 04, 2022
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dda housing scheme on the verge of flop again: 70 percent flats remained unsold

फिर से फ्लॉप होने के कगार पर डीडीए आवासीय योजना:70 फीसदी फ्लैट्स बिना बिके रहे

  • Updated on 4/18/2022

नई दिल्ली/ निशांत राघव: डीडीए की सोमवार को 18 हजार 335 फ्लैट्स की विशेष आवासीय योजना फ्लॉप होने के रास्ते पर चलती नजर आई। अंतिम समय में डीडीए ने किरकिरी से बचने के लिए करीब पचास फीसदी फ्लैट्स को ड्रा से हटा लिया था। लेकिन यदि कुल 18335 फ्लैट्स के आधार पर बात की जाए तो इस बार लगभग 70 फीसदी फ्लैट्स बिना बिके ही रह गए। इसे डीडीए की लगातार गिरती साख के तौर पर देखा जाए या फिर डीडीए के इलाकावार फ्लैट्स में लोगों की कम रुचि।

पहली बार कुल फ्लैट्स के मुकाबले कम आवेदन मिले

महज 5227 लोगों को ही उनकी पसंद के फ्लैट्स ड्रा में आवंटित करने में अधिकारी सफल हो सके। हैरत की बात यह है कि योजना की शुरुआत में डीडीए ने 18 हजार से अधिक फ्लैट शामिल करते हुए आवेदन मांगे थे, लेकिन ड्रा में अंतिम समय में केवल 9790 फ्लैटों को ही शामिल किया गया। नरेला, जसोला, वसंत कुंज, द्वारका जैसे इलाकों में फ्लैट्स रखे थे। 

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डीडीए अधिकारी ने कहा कि ऑनलाइन ड्रा से पहले ही कुल 18335 फ्लैट्स में से लगभग पचास फीसदी फ्लैट्स को हटा लिया गया था। क्योंकि संबंधित इलाके अथवा उक्त फ्लैट्स के लिए आवेदन नहीं मिले थे। ऐसे में ड्रा में केवल 9 हजार 790 फ्लैट्स ही शामिल किये गए थे। कुल 12387 आवेदकों के लिए यह ड्रा हुआ। जिसमें 5227 फ्लैट्स का आबंटन कर दिया गया। अधिकारी ने कहा कि चूंकि आवेदन के समय ही आवेदकों से 7 प्राथमिकताओं के आधार पर फ्लैट्स और इलाका चयन करने के लिए कहा गया था, उसी आधार पर फ्लैट्स की संख्या कम की गई और ड्रा में रखे गए फ्लैट्स में से भी उसी आधार पर ड्रा किया गया। 

नरेला में लोगों की रुचि नहीं 

डीडीए के सब सिटी नरेला में करोड़ों रुपये खर्च करके तैयार फ्लैट्स के लिए लोगों की रुचि नहीं है। पिछली स्कीम के बाद सोमवार को फिर से यह बात जाहिर हुई। अकेले सेक्टर-जी-7(एलआईजी फ्लैट्स) और ए-1 से ए-4 तक ईडब्ल्यूएस 
फ्लैट्स  के लिए कुल 687 व 2234 आवेदन ही मिले। जबकि डीडीए ने 6546 व 5033 फ्लैट्स स्कीम में रखे थे।नतीजतन आवेदनों की संख्या को देखते हुए डीडीए ने अंतिम समय में आवेदकों से अतिरिक्त फ्लैट्स को स्कीम से हटा लिया। 

लगातार 9 साल से फ्लॉप हो रही डीडीए की स्कीम
डीडीए की आवासीय योजना 2014 से लगातार पिछले 9 वर्ष से फ्लॉप हो रही है। इस समस्या को दूर करने के लिए डीडीए ने इस बार कमेटी का गठन करके कई तरह मुद्दों पर ध्यान भी दिया था, लेकिन सोमवार को फिर से वही नतीजा सामने आया। कमेटी ने हाल ही में रिपोर्ट में कहा था कि साइज अपेक्षाकृत छोटा है और बाजार मूल्य के मुकाबले रेट भी अधिक आवेदकों को महसूस हो रहे हैं। इसके बाद इस बार स्कीम में डीडीए ने फ्लैट्स को पुराने दाम पर ही शामिल किया तथा कुछ इलाकों में दो फ्लैट्स को भी जोड़ा। मगर यह प्रक्रिया भी लोगों को रास नहीं आई।

पहली बार नहीं बनी वेटिंगलिस्ट
डीडीए की इस विशेष आवासीय योजना में नया रिकार्ड भी बना है। इस रिकार्ड को लेकर हालांकि डीडीए खुश नहीं होगा। लेकिन डीडीए के अब तक के इतिहास में पहली बार आवासीय फ्लैट्स योजना के ड्रा के बाद कोई वेटिंग लिस्ट नहीं बनी है। क्योंकि पहली बार कुल आवेदकों की संख्या के मुकाबले फ्लैट्स इतने अधिक थे कि आवेदकों की प्राथमिकता के आधार पर अंतिम समय में कई ब्लॉक से फ्लैट्स की संख्या को कम करना पड़ा।  
 

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