Monday, Feb 06, 2023
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India will emerge as an ideal society for the world: Mohan Bhagwat

भारत दुनिया के लिए आदर्श समाज बनकर उभरेगा:मोहन भागवत

  • Updated on 8/21/2022

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस समाज को जगाने और एकजुट करने में जुटा है, ताकि भारत दुनिया के लिए आदर्श समाज के रूप में बनकर उभरे। रविवार को संघ के दिल्ली प्रांत द्वारा अंबेडकर कंवेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम-सुयश(समर्पित युवा, समर्थ समाज) में उन्होंने लोगों से समाज की सेवा के लिए व्यक्तिगत रूप से अधिक सामुदायिक भाव के साथ आगे आने की अपील की। उन्होंने इस अवसर पर आरएसएस स्वयंसेवकों के जनहित से जुड़े काम का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि सेवा के पीछे एक प्रकार का अपनापन होता है और सेवा की प्रेरणा के लिए अपनापन जरूरी है और यह अपनापन ही समाज को जोड़ता है।  

भारत को परम विश्व गुरु बनाना ही संघ का उद्देश्य है 

उन्होंने कहा कि काम करते समय यह देखना होगा कि किस भाव से कार्य करना है, उसी आधार पर प्रतिष्ठा मिलती है। उन्होंने कहा कि संघ में संख्या बढ़ाना उद्देश्य नहीं है। अ'छे आचरण के जरिये भारत को परम विश्व गुरु बनाना ही संघ का उद्देश्य है। समाज का हरेक वर्ग, अ'छा करने के लिए मिलकर प्रयास करे। जिसके सामने एक समान उद्देश्य होता है और सब मिलकर काम करते हैं उसको ही समाज कहते हैं। 

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भागवत ने विभिन्न धर्म को लेकर हो रही तमाम बातों पर भी साफ किया कि देश की स्वतंत्रता के लिए समाज के विभिन्न वर्गो से अनेक हस्तियों ने योगदान एवं बलिदान दिया। लेकिन उनका किया हुआ 1947 के बाद बाहर आने में इतना समय क्यों लग रहा है,क्योंकि बेहतर खाद-पानी देने से पहले जमीन को तैयार नहीं किया गया। इसलिए संघ अब इसी जमीन को तैयार करने का काम कर रहा है, ताकि समाज अपने अहंकार को भूलकर भारत को आगे बढ़ाने के लिए एकजुट होकर काम करें।

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संघ प्रमुख ने कहा कि भारतीयों का डीएनए और बुनियादी स्वभाव है कि वे समाज के रूप में सोचते हैं, व्यक्तिगत रूप से नहीं। उन्होंने कहा कि हमें इन्हें और प्रोत्साहित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अपने देश के बारे में बुरा हो रहा बताने के साथ-साथ अधिक महत्वपूर्ण है कि जो अ'छा हो रहा है उस पर भी चर्चा करें। उन्होंने कहा कि समाज खड़ा हो इसके लिए हम पर जोर देना होगा। इसके लिए जो अपने आप में देख रहे हो वो पहले सभी में देखो। भागवत ने कहा कि कल्याण कार्य करते समय मैं और मेरा के भाव से ऊपर उठने की जरूरत है और इससे एक समाज के रूप में विकसित होने में मदद मिलेगी। 

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