Sunday, Nov 28, 2021
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tree authority had only 3 meetings and 8 times get together out of 104

ट्री अथॉरिटी ने की सिर्फ 3 बैठक और 8 मुलाकात, करनी थी 104

  • Updated on 9/8/2021

नई दिल्ली। अनामिका सिंह। ट्री अथॉरिटी की जिम्मेदारी दिल्ली में ग्रीन एरिया बढ़ाने व उसके लिए सुझाव देते हुए अमल में लाना है। लेकिन जब ट्री अथॉरिटी की बैठक ही नहीं हो पाती तो ऐसे में काम होना तो अपने आपमें बढ़ा सवाल है। हाल यह है कि 1995 में गठित की गई ट्री अथॉरिटी की अब तक केवल 3 बैठकें व 8 मुलाकात हुईं हैं। जबकि दिल्ली संरक्षण अधिनियम (डीपीटीए) की धारा 4 के अनुसार अथॉरिटी को तीन महीने में कम से कम एक बार मिलना वैधानिक रूप से अनिवार्य है। अब तक करीब 104 मीटिंग होनी चाहिए थी लेकिन रिकॉर्ड निराशा पैदा करने वाले हैं और वैधानिक दायित्वों की अवहेलना है।
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आरटीआई से मिली सारी जानकारी 
यह मामला तब सामने आया जब आदित्य एन.पाण्डेय ने इसे लेकर लगातार सूचना के अधिकार का उपयोग करते हुए विभाग से सवाल किया। उन्होंने 18 जुलाई 2013, 31 मई 2018, 3 जून 2019 व 1 जनवरी 2021 को आरटीआई डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेस्ट एंड वाइल्ड लाइफ में लगाई। उन्होंने इसमें पूछा कि कब-कब ट्री अथॉरिटी की मीटिंग की गई है उसके  मिनट्स मुहैया करवाए जाएं। जिसके बाद विभाग द्वारा बताया गया कि पहली मीटिंग 5 अक्तूबर 2007 को हुई थी जबकि 5 अप्रैल 2011 को मीटिंग होनी थी जो नहीं हो पाई। इसके बाद 2 फरवरी 2012, 14 सितंबर 2012, 22 जुलाई 2013, 2 दिसंबर 2016, 9 नवंबर 2017 व 25 सितंबर 2019 को हुई थी। पाण्डेय ने इसे लेकर दिल्ली के मुख्य सचिव को भी पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने कहा है कि पेड़ों के संरक्षण और वनीकरण के प्रति बैठक ना होना गंभीरता की कमी को दर्शाता है। उन्होंने मुख्य सचिव से इस मामले में संज्ञान लेते हुए जांच करने के लिए कमिटी गठित करने की भी सिफारिश की है। साथ ही कहा है कि ट्री अथॉरिटी अपनी नियमित बैठकें, उनका एजेंडा और मिनट्स को सार्वजनिक डोमेन पर अपलोड करे।
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जाने क्या काम होता है ट्री अथॉरिटी का
-अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर सभी पेड़ों का संरक्षण करना।
-मौजूदा पेडों की जनगणना करना और जब भी आवश्यक समझा जाए सभी मालिकों से उनकी भूमि में पेड़ों की संख्या के बारे में सूचना प्राप्त करना।
-नर्सरी का विकास और रखरखाव और उन व्यक्तियों को बीज, पौधे और पेड की आपूर्ति करना जो नए पेड़ लगाने या बदलना चाहते हों।
-पेड़ों का रोपण और प्रत्यारोपण निर्माण कार्यों के दौरान सुनिश्चित करवाना।
-वृक्षारोपण से जुड़े निजी और सार्वजनिक संस्थानों की सहायता प्रदान करना।
-सरकार द्वारा निर्देशित उपायों योजनाओं पर कार्य करना।
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शहर के बदलते स्वरूप के लिए जरूरी है ट्री अथॉरिटी
शहरों में तेजी से निर्माण परियोजनाओं में वृद्धि हो रही है। ऐसे में हरित आवरण बना रहे ये एक चैलेंज सभी के लिए है। ऐसे में नियमित बैठकें आयोजित करना बेहद जरूरी है। देखा गया है कि राजधानी में कुछ वर्षों में वृक्षों के आवरण में तेजी से गिरावट आई है। यही नहीं पेड़ हवा में खतरनाक पीएम 2.5 को हटाने का बड़ा प्राकृतिक और मुक्त स्त्रोत है।
 

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