Tuesday, Feb 20, 2018

अगर है भरोसेमंद ब्रोकर की तलाश तो जरूर पढ़िए ये ख़बर

  • Updated on 3/1/2017

Navodayatimes

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। रियल एस्टेट ब्रोकर एक खरीददार और विक्रेता अथवा डिवैल्पर को मिलवाने से लेकर सौदे को अमली जामा पहनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अमेरिका, इंगलैंड या दुबई जैसे विकसित बाजारों में जहां ब्रोकर पंजीकृत, प्रमाणित और लाइसैंसधारी होते हैं वहीं भारत में आज भी यह क्षेत्र असंगठित तथा अव्यवस्थित है। ऐसे में ग्राहकों के लिए भरोसेमंद ब्रोकर की तलाश करना भी आसान नहीं है।

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 रियल एस्टेट (रैगुलेशन एंड डिवैल्पमैंट) एक्ट को इस वर्ष लागू किया जा रहा है। इसके तहत ब्रोकर या एजैंट की भूमिका को पहचान मिलेगी और उन्हें नियामक प्राधिकरण के पास खुद को पंजीकृत भी करवाना होगा। जब तक यह कानून पूरी तरह लागू नहीं होता तब तक एक भरोसेमंद रियल एस्टेट एजैंट या ब्रोकर की तलाश करने के लिए आपको निम्र बातों का ध्यान रखना होगा। 

पड़ताल पर मेहनत करें

इन दिनों इंटरनैट जैसे माध्यमों की वजह से ग्राहकों के पास जानकारी जुटाने के अनेक सुगम साधन हैं। उन्हें सुनिश्चित करना चाहिए कि सम्पत्तियों के लेन-देन के बारे में वे हमेशा सतर्क रहें और केवल ब्रोकर द्वारा दी जाने वाली जानकारी पर ही निर्भर न करें। खरीददारों को सुनिश्चित बनाना चाहिए कि वे सम्पत्ति से जुड़ी लेन-देन की सभी बारीकियों को भी अच्छे से समझ लें।

निर्माणाधीन सम्पत्तियों के खरीददारों को और भी ज्यादा सावधान रहना चाहिए। उन्हें निर्माता या डिवैल्पर की कार्यशैली पर भरोसा होने पर ही उसकी परियोजना में निवेश करना चाहिए। सलाह दी जाती है कि खरीददार केवल अच्छी प्रतिष्ठा तथा बेहतर ट्रैक रिकार्ड वाले बिल्डरों से  ही सम्पत्ति खरीदें। 

यह भी जरूरी है कि खरीददार खुद को जरूरी दस्तावेजों के बारे में जागरूक रखें। दो पहलुओं से यह बात और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है। पहला- यह सुनिश्चित बनाया जा सकता है कि बिल्डर के पास सभी जरूरी स्वीकृतियां हैं और दूसरा इससे ब्रोकर की लेन-देन संबंधी ज्ञान व योग्यता की पड़ताल भी हो सकती है। 

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खरीददारों को बाजार के बारे में अपनी ओर से भी रिसर्च कर लेनी चाहिए। कोई सम्पत्ति खरीदने से पहले संबंधित इलाके में निकट भविष्य में विकास की संभावनाओं पर गौर करना चाहिए। इसके लिए उस इलाके में सड़क या रेल मार्ग से आसान सम्पर्क  होना चाहिए। साथ ही सभी आवश्यक मूल सुविधाएं जैसे पानी व बिजली की अच्छी उपलब्धता के साथ-साथ शॉपिंग के लिए बाजार, बच्चों की पढ़ाई के लिए शैक्षिक संस्थान, इलाज के लिए अस्पताल तथा मनोरंजन के लिए मॉल या सिनेमा आदि भी करीब होने चाहिएं।

जरूरत तथा बजट

खरीददार को अपनी उन सभी जरूरतों के बारे में पता होना चाहिए जिसकी चाह उन्हें अपने नए घर से हो। इसके लिए परिवार में सदस्यों की संख्या तथा उनकी अलग-अलग जरूरतों पर विचार करना होगा। ब्रोकर से सम्पर्क करने से पहले इन सभी जरूरतों की सूची बनाने के साथ-साथ अपना बजट भी तय कर लेना चाहिए। यह इसलिए भी जरूरी है कि बजट तय करने के बाद आप अपनी क्षमता से अधिक महंगी सम्पत्तियों के लालच में नहीं फंसेंगे जिनमें आपकी जरूरत से भी ज्यादा सुविधाएं उपलब्ध हों। 

याद रखें कि अतिरिक्त सुविधाएं सम्पत्ति के मूल्य में इजाफा करती हैं। इसके अलावा आपको हर महीने ज्यादा मैंटीनैंस चार्ज भी अदा करने पड़ सकते हैं।  सलाह यही दी जाती है कि खरीददार अपनी जरूरतों व वित्तीय क्षमता का ध्यान से आकलन करें और उसके बाद ही फैसला लें कि उन्हें कितनी महंगी सम्पत्ति की जरूरत है और किसे वे सच में खरीद भी सकते हैं।  

आमतौर पर होम लोन की मदद से खरीदी जाने वाली सम्पत्ति के बाद अदा की जाने वाली मासिक किस्त कुल आय के 35 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। यदि खरीददार कोई एक सम्पत्ति खरीद रहा है तो उसे इस पर अदा किए जाने वाले कैपिटल गेन्स टैक्स का भी ध्यान रखना होगा। 

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ब्रोकर के बारे में जानकारी जुटाएं

खरीददार सुनिश्चित करें कि वे ब्रोकर का चयन करने से पहले उसके बारे में कुछ जरूरी जानकारी जुटा लें। पहले उसकी सेवाएं ले चुके लोगों से उसके बारे में काफी कुछ पता चल सकता है। साथ ही इससे पहले ब्रोकर द्वारा किए गए सौदों से भी उसके कामकाज के तौर-तरीकों तथा उसकी सत्यता के बारे में अंदाजा लग जाएगा। अच्छे अनुभव वाला ब्रोकर चुनना ही अकलमंदी होगी। 

फीस की बात स्पष्ट कर लें

आमतौर पर ब्रोकर कमिशन के एवज में काम करते हैं जो सम्पत्ति के कुल मूल्य का तय प्रतिशत होता है।  एक खरीददार के लिए ब्रोकर की फीस के ढांचे को अच्छे से समझना होगा। भी जान लें कि वह दूसरे पक्ष से कितना कमिशन ले रहा है। इससे आप उसकी नीयत के बारे में भी पता चल जाएगा। 

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प्रतिष्ठित ब्रोकर की ही सेवा लें

जहां तक संभव हो खरीददारों को  बड़े व स्थापित ब्रोकर की सेवाएं ही लेनी चाहिएं। वे अपने काम में अधिक पेशेवर होते हैं और ग्राहकों से जरूरी बातें नहीं छिपाते हैं। साथ ही वे अपने क्लाइंट को कुछ ऐसी अन्य सेवाएं भी प्रदान कर सकते हैं जो एक छोटा ब्रोकर नहीं दे सकता। कम जाने-माने ब्रोकर या एजैंट के बारे में जानने के लिए स्थानीय ब्रोकर एसोसिएशन की मदद ले सकते हैं क्योंकि अधिकतर ब्रोकर ऐसे संगठनों से जुड़े होते हैं।

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