Monday, Sep 27, 2021
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तो क्या इसलिए अमृता प्रीतम ने अपनी आत्मकथा का नाम रखा 'रसीदी टिकट'

  • Updated on 8/31/2020

नई दिल्ली/कामिनी बिष्ट। अमृता प्रीतम (Amrita Pritam) पंजाबी और हिंदी साहित्य की वो लेखिका जिन्होंने प्रेम, दर्द और जीवन की वास्तविकता के ऐसे मुद्दों को अपने जादुई शब्दों से स्पष्ट किया जिनका तीव्र एहसास आत्मा को झिंझोड़ देता है, लेकिन उनको व्यक्त करने के लिए हमें शब्द नहीं मिल पाते। अपने लेखन के अलावा अमृता साहिर से किए गए प्रेम के लिए भी जानी जाती हैं। जो समाज की नजरों में भले ही अधूरा रह गया हो, लेकिन वो मुकम्मल प्रेम से भी ज्यादा संपूर्ण था और अमर भी।

साहिर के लिए अमृता के प्रेम को हिंदी साहित्यकार निर्मला वर्मा की एक पंक्ति स्पष्ट करती है और वो है 'कुछ लोग इतने संपूर्ण ढंग से अधूरे होते हैं कि उनके आगे अपना अधूरापन पोंगा जान पड़ता है'। साहिर के प्रेम में अमृता इसी प्रकार संपूर्ण ढंग से अधूरी रहीं। साहिर और अमृता की कहानी पर एक ऐसा उपन्यास लिखा जा सकता है जो प्रेम ग्रंथ बन सकता है। 

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जब खुशवंत सिंह ने जाननी चाही अमृता और साहिर की प्रेम कहानी
इसी प्रकार अमृता और साहिर की प्रेम के किस्सों से प्रभावित होकर मशहूर लेखक खुशवंत सिंह ने उनसे पूछा कि वो अपने और साहिर की प्रेम कहानी उन्हें बताएं। खुशवंत सिंह ने उनके उपन्यास पिंजर का अंग्रेजी में अनुवाद किया था और उसके बदले में उनके और साहिर के बारे में जानने की इच्छा व्यक्त की थी। खुशवंत ने अपने एक लेख में लिखा कि मैं अमृता और साहिर की कहानी सुनकर मैं बहुत निराश हुआ था, क्योंकि उनका मानना था कि इस कहानी को तो एक टिकट भर में लिखा जा सकता है। 

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'अज्ज आखां वारिस शाहू नूं'

भारत पाकिस्तान के बीच बंटवारे के बाद जो दोनो ओर की महिलाओं पर बीती उन्हें अमृता ने शब्द दिए और गीत लिखा 'अज्ज आखां वारिस शाहू नूं' जो भारत और पाकिस्तान दोनो देशों की महिलाओं की पीड़ा को बयां करता है और दोनों ही देश में खूब प्रचलित भी है। खुशवंत का मानना था कि बस यही एक गीत है जो अमृता को अमर बनाता है। इसके अलावा उन्होंने ऐसा कुछ खास नहीं लिखा। अमृता ने हिंदी और पंजाबी में लगभग 100 किताबें लिखी हैं। जिनमें कविता, गीत कहानियां शामिल हैं। 

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रसीदी टिकट का एक किस्सा
खुशवंत की बात शायद अमृता के मन में इस कदर घर कर गई कि जब उन्होंने अपनी आत्मकथा लिखी उसका नाम रखा 'रसीदी टिकट'। इस आत्मकथा में साहिर से जुड़े कई किस्से हैं। जिनमें एक किस्सा अमृता के साहिर के लिए प्रेम की इंतेहां को बयां करता है। वो किस्सा कुछ इस प्रकार है- 'रसीदी टिकट में अमृता लिखती हैं कि जब साहिर उनसे मिलने उनके घर आया करते थे तो सिगरेट पीते रहते थे। आधी सुलगाई सिगरेट को वो राखदान में डाल देते। साहिर के जाने के बाद अमृता उन सिगरेट के टुकड़ों को संभालती और अकेले में उनको सुलगाया करती। उस सिगरेट को हाथ में लेकर उनको साहिर को स्पर्श करने का एहसास होता।' रसीदी टिकट में लिखे गए इस एक छोटे से किस्से पर ही एक उपन्यास लिखा जा सकता है। 

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