Saturday, May 26, 2018

बड़े होने के बाद भी दर्द देता है बचपन का सदमा

  • Updated on 5/12/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। एक रिसर्च से खुलासा हुआ है कि जिन लोगों ने अपने बचपन या किशोरावस्था में किसी भी तरह का सदमा झेला है वो बड़े होकर अधिक दर्द का अनुभव करते हैं। ऐसे लोग अक्सर बुरे मूड या खराब नींद से पीड़ित होते हैं, जो स्पष्ट रूप से उनकी शारीरिक असुविधा को बढ़ाता है।

पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के सह-लेखक जेनिफर ग्राहम-एंजलैंड ने शोध के परिणामों की घोषणा करते हुए कहा कि अध्ययन से साफ हो गया है कि बचपन के सदमे का असर जिंदगीभर के लिए होता है। इसमें पाया गया कि यह प्रभाव आशावाद के दृष्टिकोण, या नियंत्रण में महसूस करने से कुछ कम हो जाता है। 

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अंबिका माथुर के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में ब्रोंक्स, न्यूयॉर्क में एक आवास परिसर के 265 निवासी शामिल थे। प्रतिभागी 25 और 65 वर्ष की आयु के बीच के थे। उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने कभी यौन उत्पीड़न, बड़ी बीमारी, नशीली दवाओं के उपयोग, या माता-पिता के तलाक जैसी किसी भी आठ प्रकार की बचपन में परेशानी अनुभव की है। सभी ने बताया कि उन्होंने कम से कम एक अनुभव की है। उन्होंने पिछले हफ्ते के तनाव, गुस्से और चिंतित भावनाओं के बारे में भी बताया।

इसके अलावा न सो पाने के कारण और अपने जीवन नियंत्रण के बारे में भी बताया। उन्होंने अपने वर्तमान स्तर के दर्द, पिछले हफ्ते के दौरान उनके औसत स्तर, और किस हद तक दर्द ने उनकी दैनिक गतिविधियों में हस्तक्षेप किया इस बारे में भी बताया।

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शोधकर्ताओं ने बताया कि हमने पाया कि पुरानी परेशानियों के ज्यादा होने से अब का दर्द भी ज्यादा होता है। अध्ययन में ये भी पता चला है कि इन भावनात्मक आघातों से मनोदशा और नींद में गड़बड़ी पैदा होती है, जिससे शारीरिक दर्द से निपटने में उनके लिए मुश्किल होती है। जिन लोगों ने शुरुआती जीवन में परेशानी देखी है वे विशेष रूप से न केवल मनोदशा के साथ संघर्ष करते हैं, बल्कि नींद और दर्द से भी जुझते हैं।

अच्छी खबर यह है कि एक सकारात्मक दृष्टिकोण ने उन्हें अपनी असुविधा के बावजूद बेहतर काम करने में मदद की। इस अध्ययन के दौरान प्रतिभागी जो अधिक आशावादी महसूस करते हैं या अपने जीवन को नियंत्रण में रखते हैं उन्हें दर्द से लड़ने में ज्यादा मदद मिलती है। 

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