Friday, May 07, 2021
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पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेताया, देहरादून में कड़े कदम, सख्त कानून से नियंत्रित होगा वायु प्रदूषण

  • Updated on 4/11/2018

देहरादून/ब्यूरो। उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और गति फाउंडेशन की तरफ से देहरादून के वायु प्रदूषण पर आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने ठोस उपाय सुझाए। कार्यक्रम में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार, कारोबारी व नागरिक समूहों के स्तर पर मिलकर काम करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। 

उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव एसपी सुबुद्धि ने कहा कि देहरादून के प्रदूषण को कम करना, हम सबकी प्राथमिकता होनी चाहिए। भयानक वायु प्रदूषण के चलते लोगों के फेफड़े खतरे में पड़ गए हैं। इस दशा को बदलने के लिए सभी एजेंसियों व समाज को मिलकर काम करना होगा। अगर हम एक परिवार की तरह काम नहीं करेंगे, तो हालात असहनीय हो जाएंगे।

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गंगाराम अस्पताल में फेफड़ा रोग व कैंसर उपचार विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार ने कहा कि भारत के अधिकतर शहरों में हर कोई स्मोकर है। जन्म लेने वाला बच्चा भी स्मोकर हो गया है। इसकी वजह वायु प्रदूषण है। वायु प्रदूषण इतने भयानक स्तर पर पहुंच चुका है कि हर कोई स्मोकर कैटेगरी में आ गया है। इस वजह से जो लोग धूम्रपान नहीं करते हैं, वे भी कैंसर के शिकार हो रहे हैं। नॉन स्मोकर्स भी कैंसर की जद में आ रहे हैं। 

पिछले बीस साल में इनका अनुपात कई गुना बढ़ है। पहले जहां पांच फीसदी नॉन स्मोकर कैंसर की जद में आते थे, वहीं यह संख्या चालीस फीसदी तक पहुंच गई है। रीजनल ट्रांसपोर्ट अधिकारी सुधांशु गर्ग ने कहा कि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ कड़ा अभियान चलाने की दरकार है। कानून को लागू किए बिना हालात नियंत्रित होने वाले नहीं हैं। 

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हमने अगले कुछ महीनों में डीजल व पेट्रोल ऑटो की जगह दस हजार ई-रिक्शा चलाने का फैसला लिया है। इससे प्रदूषण पर नियंत्रण लगेगा। इसके अलावा शासन स्तर पर बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। कार्यक्रम सहभागी संयोजक गति फाउंडेशन के प्रमुख अनूप नौटियाल ने कहा कि देहरादून में वायु प्रदूषण भयानक स्तर पर पहुंच गया है। 

इसके लिए सरकारों की नीतियां जिम्मेदार हैं। देहरादून में अनियंत्रित विकास के कारण तमाम प्रदूषण बढ़े हैं। इसके लिए शार्ट टर्म व मीडियम टर्म स्तर पर काम होना चाहिए। हमें अपनी जीवन शैली में भी बदलाव लाना होगा। 

राष्ट्रीय नगर कार्य संस्थान के निदेशक जगन शाह ने कहा कि प्रदूषण को रोकने के लिए नागरिकों को साथ लेना आवश्यक है। अगर इस दिशा में बड़े व समन्वयात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो हालात बेकाबू हो जाएंगे। पुणे शहर में जबरदस्त काम हुआ है। वहां से प्रेरणा लेकर हमें काम करना होगा।

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डर पैदा करती है रिपोर्ट
भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड की तरफ से 2017 में वायु प्रदूषण पर गहन शोध अध्ययन किया गया था। इसमें पाया गया कि पांच साल में वायु प्रदूषण दोगुना बढ़ा है। शोध कमेटी के हेड अंबरीष गोयल ने प्रजेंटेशन में बताया कि देहरादून में वायु प्रदूषण का मुख्य खलनायक वाहन हैं। वाहनों की तादाद बहुत बढ़ गई है। 

इसके साथ ही प्रदूषण करने वाले वाहन भी बहुतायत में हैं। गर्मियों में प्रदूषण तो बहुत ज्यादा बढ़ गया। अभी जो मानक हैं, पीएम 2.5 वाले हैं, लेकिन अब इससे कम मानक हो जाएगा। वायु प्रदूषण तमाम तरह से नुकसान पहुंचा रहा है। सामाजिक, आर्थिक स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ रहे हैं। देहरादून में तमाम तरह की गैसों का प्रवाह बहुत बढ़ गया है। 

घंटाघर, आईएसबीटी, राजपुर रोड, सहारनपुर चौक में हालात बहुत खराब हैं। रिपोर्ट में वाहनों की श्रेणी व उपयोग अवधि आदि से मानक तय किए गए। इसके अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्तर पर किए गए शोध में भी डरावनी तस्वीर सामने आई। वर्ष 2018 में घंटाघर, राजपुर व आईएसबीटी में प्रदूषण 2013 के मुकाबले बीस फीसदी बढ़ गया। 

उदाहरण के लिए 2013 में घंटाघर में पीएम 2 की दर 138.7 थी, वहीं इस वर्ष यह मात्रा 190.4 पर पहुंच गई है। राजपुर में यह मात्रा वर्ष 2013 में 128 थी, तो 2018 में 223 से अधिक हो गई। आईएसबीटी में यह मात्रा वर्ष 2013 में 167 थी, तो वहीं इस साल 302 जा पहुंची है। इस मौके पर बोर्ड के राजेंद्र कठैत, बीएचईएल के अंबरीष गोयल, डा. नवीन, प्रार्थना बोरा समेत बड़ी तादाद में लोग शामिल रहे। 

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