Saturday, Jul 21, 2018

विधायक बैंस का बड़ा आरोप, दवा खरीद में करोड़ों के घपले की तैयारी

  • Updated on 7/11/2018

नई दिल्ली/(रमनजीत)। लोक इंसाफ पार्टी के प्रधान व विधायक सिमरजीत सिंह बैंस ने स्वास्थ्य विभाग में दवा खरीद में घपलेबाजी का आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री को दी शिकायत में बैंस ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा ने दवा खरीद के लिए ऐसे नियम बनवाए हैं ताकि उनकी चहेती कंपनियां ही टैंडर प्रक्रिया में शामिल हों।

इससे आम दुकानों पर मिलने वाली दवाओं को 2-2 हजार प्रतिशत अधिक मूल्य पर खरीदने की तैयारी की है। उनका कहना है कि दवा कंपनियों के साथ 80 करोड़ की डील से 25 करोड़ रुपए कमीशन के तौर पर देने की बात तय हुई है। इसलिए मुख्यमंत्री टैंडर को तत्काल रद्द कर जांच करवाएं। 

विधायक बैंस ने शिकायत में कहा कि उन्होंने अपने स्तर पर पता किया है जिसके मुताबिक दवा खरीद के लिए जारी टैंडर को 2 बार इसलिए टाला गया क्योंकि तब तक कंपनी वालों से डील फाइनल नहीं हुई थी। इसके बाद कंपनी की शर्तों को ही टैंडर में शामिल किया गया ताकि स्थानीय स्तर की कंपनियां दौड़ से बाहर हो जाएं।

बैंस ने कहा कि टैंडर में शर्त रखी है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 50 करोड़ का कारोबार करने वाली कंपनी ही हिस्सा ले पाएगी। बैंस ने कहा कि दवा की गोली का मूल्य आम दुकानों पर 4 रुपए का है उसे 40 रुपए में बेचकर 25 करोड़ का स्कैंडल किया जाएगा। बैंस ने कहा कि सीटागलिप्टिन नामक गोली, जो 40 पैसे की मिल जाती है, उसका मूल्य 50 रुपए तय किया है।

ऐसे ही अन्य विल्डागलिप्टिन गोली भी 40 पैसे की बजाय 30 रुपए की खरीदी जानी है। यह गोलियां शूगर पेशैंट्स के लिए हैं। वहीं, पेट जलन और एसीडिटी में इस्तेमाल होने वाली एंटासिड दवा, जो बाजार में 12 से 15 रुपए में मिलती है, उसे 44 रुपए में खरीदा जाना है। यही नहीं, बाजार में आमतौर पर 35-40 पैसे प्रति गोली के मूल्य पर मिलने वाली कैल्शियम टैबलेट्स को भी 4.53 रुपए में प्रति गोली के हिसाब से खरीदने के लिए कमर कसी गई है। 

उधर, स्वास्थ्य मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा ने कहा कि विधायक सिमरजीत सिंह बैंस मानहानि केस के लिए तैयार रहें। बैंस को मनगढ़ंत आरोप लगाने की आदत हो गई है। उन्होंने कहा कि जब दवा खरीद के लिए टैंडर हुआ ही नहीं तो घपला कहां से हो गया। उन्होंने कहा कि सी.बी.आई. क्या बैंस का बस चलता है तो के.जी.बी. और सी.आई.ए. से भी जांच करवा लें। जिस कंपनी को बैंस उनकी बता रहे हैं, उसके खिलाफ कैग रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने ही कार्रवाई की है।

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