Tuesday, Aug 21, 2018

खेल मंत्री के दावे साबित हुए हवाहवाई, प्रतियोगिता विजेताओं को न स्कूटी मिली, न नकद पुरस्कार

  • Updated on 3/13/2018

देहरादून/ब्यूरो। 800 मीटर दौड़ कराकर धावक प्रतिभाओं को खोजने और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए उपहार में स्कूटी देने के खेल मंत्री अरविंद पांडेय के बड़े-बड़े दावे हवा में नजर आ रहे हैं। स्थिति यह है कि दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन हुए एक माह का समय बीतने जा रहा है, लेकिन विजेताओं को अभी तक स्कूटी का इंतजार है। हालांकि, अभी दावा किया जा रहा है कि स्कूटी के बदले उसकी कीमत जल्द ही विजेताओं तक पहुंचा दी जाएगी। स्कूटी के अलावा दो सर्वश्रेष्ठ धावकों को मिलने वाली 51 हजार रुपये की धनराशि भी शासनादेश में अटकी हुई है।
 
800 मीटर दौड़ के प्रतिभावान खिलाड़ियों की खोज के लिए खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरविंद पांडेय ने खेल महाकुंभ 2017 के तहत पूरे प्रदेश में ब्लॉक स्तर पर 800 मीटर दौड़ स्पर्धा आयोजित करवाई थी। मकसद था कि इस आयोजन के जरिए खिलाड़ियों को प्रोत्साहित कर आगे लाया जाए। उन्हें उच्च स्तरीय प्रशिक्षण दिया जाए।  10 व 11 फरवरी 2018 को देहरादून सहित सभी जनपदों में ब्लॉक स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। 

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15 फरवरी को राज्य स्तरीय दौड़ प्रतियोगिता का समापन हुआ था। अरविंद पांडेय ने घोषणा की थी कि दौड़ के 46 बालक और 47 बालिका विजेताओं को उपहार में स्कूटी दी जाएगी, जो हीरो मोटोकॉर्प की ओर से सीएसआर के माध्यम से दी जानी थी। 15 फरवरी को परेड ग्राउंड में आयोजित समापन समारोह में बाकायदा 95 स्कूटी प्रदर्शित की गई थी। 

हीरो मोटोकॉर्प के पदाधिकारी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। दौड़ संपन्न हुए एक माह का समय पूरा होने को है, लेकिन अभी तक किसी भी विजेता को स्कूटी नहीं मिल पाई है। स्कूटी न मिलने से विजेता प्रतिभागी सरकार के इस रवैये से निराशा हैं, जबकि मंत्री इसके बाद जिलास्तर पर होने वाले ओलंपियाड में उपहार के लिए कार देने की घोषणा कर चुके हैं। 

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स्कूटी की कीमत नकद देगी कंपनी
800 मीटर दौड़ की प्रतियोगिता होने से पूर्व यह तय हुआ था कि सभी विजेताओं को स्कूटी समारोह में बांटी जाएगी। लेकिन विजेताओं की घोषणा होने से पहले तकनीकी पेच फंसा रहा। कारण कंपनी किसके नाम पर स्कूटी जारी करेगी, उसका पता नहीं था। तय हुआ कि कंपनी की ओर से विजेताओं को प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। 

वे अपने जिले में नजदीकी डीलर से उस प्रमाणपत्र के आधार पर स्कूटी ले सकेंगे। लेकिन अब कंपनी ने इसमें नया पेच फंसा दिया है। सूत्रों के अनुसार अब स्कूटी की कीमत का पैसा कंपनी की ओर से विभाग को जारी किया जाएगा। उसमें यह शर्त होगी कि विजेता प्रतिभागी पैसे से कंपनी की ही कोई गाड़ी खरीद सकता है। लेकिन यह प्रक्रिया अभी अधर में है। अधूरे होमवर्क के साथ की गई इस घोषणा से एक बार फिर सरकार की किरकिरी हो रही है।

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51 हजार का पुरस्कार भी नहीं मिला
प्रतियोगिता के आखिर में एक फाइनल दौड़ कराई गई थी। बालक-बालिका वर्ग में हुए फाइनल में सर्वश्रेष्ठ रहने वाले धावक को 51 हजार रुपये देने की घोषणा भी हुई थी। दौड़ हुई और विजेता भी बने, लेकिन उन्हें भी केवल सर्टिफिकेट ही मिल पाया। ईनामी राशि की जगह सिर्फ डमी चेक ही मिल पाए हैं। 

इस संबंध में खेल मंत्री अरविंद पांडेय का कहना है कि कंपनी की ओर से एक साथ स्कूटी उपलब्ध कराने में तकनीकी पेच फंसा रहा है। इसका हल यह निकाला गया है कि कंपनी से 95 स्कूटी की कीमत दो किस्तों में विभाग के खाते में ली जाएगी। यहां से विजेताओं के नाम चेक बनाकर संबंधित जिलों में भेजे जाएंगे, जहां से विजेता इस धनराशि से वहां कंपनी के डीलर से स्कूटी खरीद सकते हैं। 

जल्द ही यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। साथ ही 51 हजार रुपये के नकद पुरस्कार के लिए शासनादेश हो गया है। विजेताओं को जल्द ही यह धनराशि उपलब्ध करा दी जाएगी। साथ ही सभी जिलाधिकारियों को भी निर्देश दिए जा रहे हैं कि कार्यक्रम आयोजित कर विजेताओं को सम्मानित करें।

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