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2 major attacks on security forces by Pakistani terrorists in Ramadan after Pulwama ALJWNT

पुलवामा हमले के बाद 'रमजान में' पाकिस्तानी 'आतंकवादियों' के सुरक्षा बलों पर '2 बड़े हमले'

  • Updated on 5/5/2020

सम्पूर्ण विश्व सहित भारत जहां इस समय अपने नागरिकों को कोरोना वायरस के प्रकोप से बचाने के लिए अपने सभी संसाधन झोंक रहे हैं, वहीं ऐसी विकट परिस्थिति में भी पाकिस्तान के शासक अपनी भारत विरोधी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं और पाकिस्तानी सेना द्वारा युद्ध विराम का उल्लंघन व उसके पाले हुए आतंकवादियों द्वारा हिंसा लगातार जारी है।

इसके 2 प्रमाण 3 और 4 मई को को मिले जब जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा में पाकिस्तान के पाले हुए आतंकवादियों के हमले में हमारे सुरक्षा बलों की भारी प्राण हानि हुई। 3 मई को आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में भारतीय सेना के कर्नल आशुतोष शर्मा, मेजर अनुज सूद, एस.आई. सगीर अहमद, नायक राजेश कुमारऔर लांस नायक दिनेश शहीद हो गए।

4 मई को दूसरी घटना भी हंदवाड़ा क्षेत्र में ही हुई जहां सी.आर.पी. एफ.  पर आतंकवादियों के हमले में हमारे 3 जवान शहीद हो गए। इसी दिन एक अन्य हमला श्रीनगर के बाहरी इलाके में सी.आई.एस.एफ. पर किया गया जिसमें एक जवान घायल हो गया।

14 फरवरी 2019 को पाकिस्तान के आतंकवादी गिरोह जैश-ए-मोहम्मद द्वारा पुलवामा जिले में सी.आर.पी.एफ. के काफिले पर फिदाइन के आत्मघाती हमले द्वारा 40 जवानों को शहीद और अनेक घायल कर दिए जाने के बाद ये सबसे बड़े हमले हैं।

इस बीच जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी सेना और उसके पाले हुए आतंकवादियों की ओर से लगातार जारी हमलों के बीच 2 मई को गुप्तचर सूत्रों ने एक अलर्ट भी जारी किया था जिसमें कहा गया है कि भारतीय सेना द्वारा अप्रैल महीने में 28 आतंकवादियों की हत्या का बदला लेने के लिए संभवत: पाकिस्तान का आतंकी गिरोह जैश-ए-मोहम्मद जम्मू-कश्मीर में 11 मई को कई आतंकी हमलों की योजना बना रहा है।

2 मई को इस बाबत जानकारी देते हुए एक अधिकारी ने कहा, 'ये आत्मघाती हमले हो सकते हैं और वे जम्मू-कश्मीर में सेना तथा अर्धसैनिक बलों के ठिकानों को निशाना बना सकते हैं।' उक्त अधिकारी के अनुसार,'जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक मसूद अजहर काफी समय से बीमार है और उसकी जगह उसका भाई मुफ्ती अब्दुल असगर इस आतंकी गिरोह की कमान सम्भाले हुए है।' बताया जाता है कि असगर ने 2 मई को इस्लामाबाद के बाहरी इलाके रावलपिंडी में पाकिस्तानी गुप्तचर एजैंसी आई.एस.आई. यानी इंटर सर्विसेज इंटैलीजैंस के अधिकारियों के साथ बैठक भी की।

कश्मीर के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी के अनुसार हमलों के लिए 11 मई का दिन इसलिए चुना गया है क्योंकि यह रमजान के 17वें दिन के साथ मेल खाता है। इस दिन सऊदी अरब में बद्र की लड़ाई कुछ सौ सैनिकों द्वारा लड़ी और जीती गई थी। इतिहास में इसे इस्लाम के शुरूआती दिनों में बड़ी जीत और एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जाता है। गुप्तचर अधिकारियों के अनुसार गत एक महीने के दौरान पाकिस्तान सेना समर्थित घुसपैठ की कोशिशें तेज हो गई थीं जिसके बाद माना जा रहा था कि जैश ऐसी कोई योजना बना रहा है।

अनुमानत: 25-30 जैश आतंकवादी पाकिस्तानी सेना की मदद से कश्मीर घाटी में घुसने में सफल हो चुके हैं और ऐसे संकेत हंै कि जैश-ए-मोहम्मद के 70 से अधिक आतंकवादी लीपा घाटी के रास्ते आगामी कुछ सप्ताह में घुसपैठ की कोशिश कर सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार यह असंभव है कि पाकिस्तान इन घुसपैठों का समर्थन नहीं कर रहा हो। उक्त घटनाक्रम इस तथ्य का मुंह बोलता प्रमाण है कि पाकिस्तान के शासक अपनी सेना और अपने पाले हुए आतंकवादियों के माध्यम से भारत में खून-खराबा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।

मुसलमानों में रमजान के महीने को अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस महीने लोग रोजे रखने के अलावा अल्लाह की इबादत करते हैं तथा अपने मित्रों, सगे संबंधियों से मिलकर प्रेम और भाईचारे का संदेश देते हैं। रमजान के महीने में हिंसा पूर्णत: निषिद्ध है और माना जाता है कि  इस महीने किए गए नेक कामों का फल कई गुणा बढ़ कर मिलता है परन्तु स्वयं को एक ‘इस्लामी देश’ बताने वाले पाकिस्तान के शासक इसके बिल्कुल विपरीत आचरण कर रहे हैं। राजनीतिक प्रेक्षकों के अनुसार पाकिस्तान कभी भी सुधरने वाला नहीं है। लिहाजा भारत को इस मामले में अधिक सतर्कता बरतने और अपनी रणनीति में जरूरी परिवर्तन करने की आवश्यकता है।

—विजय कुमार

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