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अमेरिका के फंडिंग रोकने से कंगाल हो सकता है WHO! संस्था को होगा बड़ा नुकसान

  • Updated on 5/30/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन से अलग होने का ऐलान कर दिया है। इस इस ऐलान के बाद अब डब्लूएचओ के कंगाल होने के कयास लगाए जा रहे हैं।

ये बात तो जगजाहिर है कि डब्लूएचओ को सबसे ज्यादा फंड अमेरिका से ही मिलता है और अब जब अमेरिका डब्लूएचओ पर चीन से मिले होने के आरोप लगा कर अलग हो चुका है तब सयुंक्त राष्ट्र की इस संस्था पर क्या असर पड़ेगा।

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ट्रंप की नाराजगी
दरअसल, डब्लूएचओ पर नाराज डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से बढ़ती संस्था की नजदीकियों के कारण अपना गुस्सा डब्लूएचओ को देने वाली मदद रोक कर निकाला। ट्रंप ने कहा कि उनकी तरफ से सालाना दिया जाने वाला 40 मिलियन डॉलर का फंड अब बंद कर दिया जाएगा, क्योंकि हमें लगता है कि इतना ज्यादा फंड देने के बाद भी चीन का डब्लूएचओ पर पूरा नियंत्रण है। डब्लूएचओ कोरोना से जुड़ें सुधार करने में नाकाम रहा है इसलिए हम डब्लूएचओ से अपना सम्बंध खत्म कर रहे हैं।

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चीन की पैरवी से टैड्रोस बने चीफ
डब्लूएचओ की कमान संभालने वाले टैड्रोस ऐडरेनॉम गैबरेयेसस ने 2017 में डब्लूएचओ के चीफ बन गये थे। बताया जाता है कि उन्हें इस पद तक पहुंचाने में चीन ने काफी मेहनत की थी और शायद इसलिए डब्लूएचओ चीफ अब चीन के समर्थन में फैसले ले रहे हैं। यहां ये भी बता दें कि गैबरेयेसस पहले अफ्रीकी है जो डब्लूएचओ के प्रमुख बने हैं।

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कैसे मिलता है फंड
डब्लूएचओ दो तरह से फंड अर्जित करता है। ये है असेस्ड कंट्रीब्यूशन और वॉलेंटरी कंट्रीब्यूशन।  
असेस्ड कंट्रीब्यूशन वो फंड है जो डब्लूएचओ के मेंबर्स देश देते हैं और ये कितना होगा ये पहले से ही तय किया गया होता है। इस फंड को देश की इकॉनमी और उसकी पापुलेशन के आंकड़े को देख कर निर्धारित किया जाता है। दरअसल, ये सस्ता का मुख्य फंड है इसी से उसे सबसे ज्यादा फंड मिलता है।

जबकि वॉलेंटरी कंट्रीब्यूशन एक तय कार्यक्रम को लेकर दिए जाते हैं। डब्लूएचओ इस फंस का इस्तेमाल सिर्फ उन्ही कामों के लिए करता है जिसके लिए फंड दिया गया है। जैसे वैक्सीन, महामारी आदि के लिए फंड एकत्र किए जाते हैं और उनकी के लिए इस्तेमाल भी होते हैं।

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डब्लूएचओ और अमेरिकी फंडिंग
डब्लूएचओ को अमेरिका से दोनों तरह की फंडिंग मिलती है। डब्लूएचओ को अमेरिका अकेला 22% असेस्ड फंड देता है और इसके अलावा फंड जरूरत और वॉलेंटरी कंट्रीब्यूशन के तहत दिया जाता है, अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि अकेला अमरीका अगर डब्लूएचओ को 22% फंड देना बंद कर दे तो डब्लूएचओ पर इसका कितना और कैसा असर होगा।

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