Tuesday, May 21, 2019

मालदीव पर प्रभुत्व बनाने की चाल चल रहा है चीन : नशीद

  • Updated on 8/26/2017

Navodayatimesनई दिल्ली/रंजीत कुमार। मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मुहम्मद नशीद ने चीन का नाम लिए बिना खुले इशारों में आरोप लगाया है कि वह मालदीव पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने की चाल चल रहा है। नशीद ने कहा कि मालदीव के कुल विदेशी कर्ज का 75 प्रतिशत चीन के खाते में है जिससे भविष्य में मालदीव की सम्प्रभुता पर आंच आ सकती है। 

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 नशीद ने यहां दक्षिण सहयोग पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कहा कि चीन को मालदीव में कई  बड़े ढांचागत प्रोजेक्टों का ठेका मिल चुका है जिससे मालदीव चीन के कर्ज जाल में फंस जाएगा। उन्होंने कहा कि चीन न केवल  अपनी वित्तीय ताकत के दम पर मालदीव के प्रवाल -द्वीपों पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रहा है बल्कि वह मालदीव में कई ढांचागत परियोजनाओं का ठेका ले चुका है जिससे मालदीव पर केवल एक ही देश का कर्ज इतना अधिक हो जाएगा कि भविष्य में मालदीव पूरी तरह उस देश के प्रभुत्व में आ जाएगा। नशीद ने मिसाल के तौर पर बताया कि  अकेले चीन को ही यह ठेका मिलना रोचक है।

चीन  ने 80 करोड़ डॉलर का माले अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा का ठेका, 21करोड़ डॉलर का माले से हवाई अड्डे के बीच पुल बनाने का ठेका, थाल प्रवाल-द्वीप पर 20 करोड़ डॉलर का ठेका, दस करोड़ डॉलर का बिजली घर बनाने का ठेका, और लामू प्रवाल द्वीप पर 15 किलोमीटर सड़क बनाने का ठेका हासिल कर चुका है। नशीद ने यहां ये आरोप विदेश मंत्रालय के तहत संस्था आरआईएस द्वारा आयोजित एशिया अफ्रीका गोष्टी में लगाए। उन्होंने कहा कि दक्षिण-दक्षिण सहयोग की यह एक मिसाल चीन ने पेश की है।

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चीन छोटे देशों पर प्रभुत्व जमाने के लिए नव-उपनिवेशवादी नीतियां अपना रहा है। हालांकि, भारत ने मालदीव की यामीन सरकार के साथ सम्पर्क बनाया हुआ है और इनकी अजनतांत्रिक नीतियों पर कोई टिप्पणी नहीं की है लेकिन यहां राष्ट्रपति यामीन के विरोधी माने जाने वाले सत्ताच्युत राष्ट्रपति नशीद को आमंत्रित करना रोचक है। नशीद ने इस मौके पर यह भी कहा कि हमें भारत से मालदीव की पारम्परिक दोस्ती को लेकर चिंता है। हम चाहेंगे कि मालदीव भारत के सामरिक प्रभाव में रहे। भारत हमेशा ही मालदीव का ऐतिहासिक संरक्षक रहा है। हमें अपनी सम्प्रभुता को नए खतरों को लेकर चिंता है।

नशीद ने कहा कि हम भारत को एक विश्व शक्ति के तौर पर उभरने का स्वागत करते हैं। लेकिन हम इस दुनिया में अपनी हैसियत को लेकर भी चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि भारत और मालदीव का साझा इतिहास रहा है। इसलिए हमें यदि किसी देश को चुनना होगा तो हम भारत को ही चुनेंगे। हम भारत का साथ लेकर ही 21वीं सदी में आगे बढऩा चाहते हैं। उल्लेखनीय है कि पौने चार लाख आबादी वाला मालदीव द्वीप समूह केरल से महज तीन सौ किलोमीटर की दूरी पर है। इस मुस्लिम देश के बारे में नशीद ने कहा कि एक विदेशी ताकत इस्लामी कट्टरपंथ फैलाने की कोशिश कर रही है। नशीद ने कहा कि यह देश इस्लाम के खतरनाक स्वरूप का निर्यात मालदीव में करना चाह रहा है। 

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