नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कोरोना वायरस ने दुनियाभर में 8,265,174 लोगों को अपनी चपेट में ले रखा है। जबकि इस बीमारी के कारण अब तक 446,149 लोगों की जान जा चुकी है। इस बीच दुनियाभर के वैज्ञानिक कोरोना की दवा खोजने में लगे हैं। जब तक एक सफल दवा नहीं मिल जाती तब तक गंभीर कोरोना के मरीजों को कई दूसरी प्रभावी दवाएं वैकल्पिक तौर पर दी जा रही हैं। जिससे काफी हद तक कोरोना के प्रभाव को कम किये जाने में सफलता भी मिल रही है।
ऐसी ही एक दवा इंग्लैंड के वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तावित की गई है। इस दवा के बारे में वैज्ञानिकों का दावा है कि इसके इस्तेमाल से कोरोना संक्रमण के गंभीर मरीजों को मौत से बचाया जा सकता है।
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क्या है ये दवा इस दवा का नाम डेक्सामेथासोन है जो एक तरह का स्टेराइड है। इस दवा को लेकर काफी रिसर्च के बाद पता चला है कि इस दवा के इस्तेमाल से कोरोना के गंभीर मरीजों की मृत्यु दर एक तिहाई तक घट गयी है। इस दवा का उपयोग 1960 के दशक से गठिया और अस्थमा के लिए किया जा रहा है और अब कोरोना के वो मरीज जिन्हे वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी है उनके लिए इस दवा ने चमत्कारी रूप से काम किया है।
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दवा के ऐसे रहे हैं रिजल्ट बताया जा रहा है कि इस दवा से जुड़े अध्ययन को जल्द ही पब्लिश किया जाएगा। इस अध्ययन में बताया गया है कि जांच के बाद 2104 मरीजों को ये दवा दी गयी। इन मरीजों की तुलना उन 4321 मरीजों से की गयी जिनकी नार्मल देखभाल हो रही थी. अध्ययन में देखा गया कि जिन मरीजों के गंभीर रूप से बीमार होने के कारण वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी, उनके मरने का जोखिम इस दवा को देने के बाद, एक तिहाई तक कम हो जाता है।
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मृत्यु दर हुई कम इतना ही नहीं, जिन मरीजों को ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ रही है, उनमें पांचवें हिस्से के बराबर मौत का रिस्क कम हो जाता है। साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि सांस लेने से जुड़ी मशीनों का सहारा लेकर इलाज करा रहे मरीजों की मृत्यु दर 35% तक घट गई और जिन लोगों ऑक्सीजन की जरूरत थी उनके इलाज में भी 20% तक मृत्यु दर कम हो गयी।
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सस्ती है दवा वैज्ञानिकों ने इस दवा के रिजल्ट को देखकर ख़ुशी जाहिर की है और कहा है कि ये काफी उत्साहजनक नतीजे है। साथ ही इस दवा की सबसे अच्छी बात ये है कि डेक्सामेथासोन दवा महंगी भी नहीं है और दुनिया का हर देश अपनी सहूलियत के हिसाब से खरीद सकता है। डेक्सामेथासोन के दस दिन के इलाज का खर्चा एक मरीज पर मात्र 500 रूपया पड़ता है और अनुमान के हिसाब से केवल 3500 रूपये में एक मरीज की जान आसानी से बचाई जा सकती है।
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