Sunday, May 22, 2022
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Crowd seen in trade fair, estimated to reach about 50 thousand people

ट्रेड फेयर में दिखी भीड़, करीब 50 हजार लोगों के पहुंचने का अनुमान

  • Updated on 11/26/2021

नई दिल्ली। अनामिका सिंह। ट्रेड फेयर में अभी तक की सबसे अधिक भीड़ शुक्रवार को देखने को मिली। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि करीब 50 हजार से अधिक लोग मेला देखने पहुंचने थे। वहीं मेले की समाप्ति को देखते हुए सभी पवेलियनों में जमकर छूट दी जा रही थी, जिसके चलते लोगों ने मेले में छूट का भरपूर लाभ उठाते हुए जमकर खरीदारी की। ट्रेड फेयर में शुक्रवार का दिन ऐसा लग रहा था मानौ सभी अपने परिवार के साथ पिकनिक मनाने आए हैं। पवेलियन के बाहर बिछे हरे कालीन से लेकर हॉल के अंदर तक लोग बैठकर आनंद लेते दिखाई दिए। बता दें कि शनिवार यानि आज ट्रेड फेयर का आखिरी दिन है और इसके समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि मिनिस्ट्री ऑफ माइनोरिटी अफेयर्स के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी मौजूद रहेंगे।
trade fair 2021: मन की बात करना भा रहा है युवाओं को

सुरक्षा रही पूरी तरह मेले में चाक चौबंद
बता दें कि इंडिया ट्रेड प्रमोशन आर्गनाइजेशन (आईटीपीओ) की ओर से 40वें ट्रेड फेयर का आयोजन किया गया। इसमें सुरक्षा के मद्देनजर बेहतरीन इंतजाम देखने को मिले। दिल्ली पुलिस, सीआईएसएफ, ट्रेफिक पुलिस, नागरिक सुरक्षा और आईटीपीओ की सुरक्षा सहित विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों द्वारा कड़े प्रयास किए जा रहे हैं। यहां व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस के 2100 कर्मचारी, नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवक करीब 300, सीआईएसएफ के 50 और दिल्ली यातायात के 500 जवान मौजूद लगे रहे। इसके अलावा मेले में दिल्ली अग्निशमन सेवा की व्यवस्था की गई और लॉस्ट एंड फाउंड बूथ भी बनाए गए। आईटीपीओ के प्रवक्ता संजय वशिष्ठ ने बताया कि जहां कम समय में सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की गईं, वहीं आईटीपीओ के पीआर विभाग ने मीडिया को मेला कवर करने में परेशानी ना हो इस पर भी पूरी नजर बनाए रखी थी।

सुरेश वाडेकर और पद्मा वाडेकर ने समां बांधा
हुनर हाट में आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में मेरा वतन, मेरा चमन कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें मशहूर गायक सुरेश वाडेकर व पद्मा वाडेकर ने अपनी प्रस्तुति देते हुए समां बांध दिया। उन्होंने चांदनी फिल्म का गाना लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है और मेघा रे मेघा गाकर दर्शकों को झुमने के लिए मजबूर कर दिया। वहीं उनकी पत्नी पद्मा वाडेकर जोकि एक क्लासिकल सिंगर है उनके साथ तुमसे मिलकर ऐसा लगा तुमसे मिलकर गाना गाया। मेले के आखिरी दिन किशोर कुमार के बेटे अमित कुमार अपनी प्रस्तुति देंगे।

यहां से जाती है बनारसी साडिय़ां
हॉल नंबर 7 में एमएसएमई के पवेलियन में मुबारकपुर आजमगढ़ से आए मोहम्मद अकमल ने बताया कि हमारे यहां कि साडिय़ां पूरी तरह हाथ से बनाई जाती हैं और पुुश्तों से लोग इस व्यवसाय में लगे हुए हैं। उन्होंने बताया कि मुबारकपुर से ही बनकर बनारसी साडिय़ां बनारस पहुंचती है जहां से इसे पूरी दुनिया में भेजा जाता है। उन्होंने बताया कि उनके पास 1200 रूपए से डेढ़ लाख रूपए तक की बनारसी साडिय़ां मौजूद हैं। ये वर्क मशीनों से किया नहीं जा सकता पूरा हैंडवर्क होता है।

विलुप्त होती कला को प्रदर्शित कर रही हैं मारिया बाई
विलुप्त होती कलाओं को बचाने की मुहिम ट्रेड फेयर के सरस आजीविका मेला में मारिया बाई जगाती दिखती हैं। वो गुजरात के कच्छ से आई हुईं हैं और बेल एंड क्राफ्ट एसएचजी से ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने बताया कि उनके एसएचजी में 10 महिलाएं हैं जो उनके साथ मिलकर मेटल बेल्स की विलुप्त होती हुई कला को सजोने का काम कर रही है। इसके अलावा विंड चैम्प्स, झूमर व लटकन भी बनाती हैं जोकि घरों में लगाने से पॉजिटिव एनर्जी आती है।

भा रहा है युवाओं को बनम व बांसुरी
आदिवासियों द्वारा बजाई जाने वाली बनम और बांसुरी लोगों खासकर युवाओं को ट्रेड फेयर में खासा आकर्षित कर रही है। झारखंड पवेलियन में कला मंदिर सक्षम एसएचजी फेडरेशन के स्टॉल पर इसे बिक्री के लिए रखा गया है। दुर्गा प्रसाद हंसदा यहां बेचने के साथ ही लोगों को बजाना सीखा भी रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह झारखंड का एक ऐसा वाद्ययंत्र है जो संथाल के आदिवासियों द्वारा पूजा के दौरान बजाया जाता है। इसका निर्माण लकड़ी, चमड़ा और घोड़े के बाल से किया जाता है जो पारंपरिक और शास्त्रीय दोनों धुनें निकाल सकती है।

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