Thursday, Aug 11, 2022
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Environment Day: Delhi will be buzzing with lakes

पर्यावरण दिवस : झीलों से गुलजार होगी दिल्ली

  • Updated on 6/5/2022

नई दिल्ली। अनामिका सिंह। जल ही जीवन है ये तो परम सत्य है लेकिन जल से ही पारिस्थितिक तंत्र बना रहता है ये उससे भी बड़ा सत्य है। इसी सत्यता को ध्यान में रखते हुए, अब दिल्ली की 20 झीलों का जल्द कायाकल्प होने जा रहा है। जिसके बाद झीलों से दिल्ली गुलजार होगी। बता दें कि झीलों को पुर्नजीवित करने के लिए दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग व वेटलैंड अथॉरिटी द्वारा अथक प्रयास किया जा रहा है। झीलों के संरक्षण व उसके सौंदर्यीकरण से पारिस्थितिक तंत्र मजबूत होगा, पानी के स्त्रोत के साथ ही ये जलीय जीवन को सपोर्ट व जलवायु को नियंत्रित करेगा। 


नजफगढ़ झील
कभी दिल्ली में बहने वाली साहिबी नदी जो यमुना नदी में मिलती थी, इसे बाद में नजफगढ़ झील और वर्तमान में नजफगढ़ नाला कहा जाने लगा। इसमें अनाधिकृत कॉलोनियों की जलनिकासी कर दी गई, जिससे दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली की लाईफ लाईन कही जाने वाली झील आज गंदे नाले में तब्दील हो गई है।
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भलस्वा झील
भलस्वा झील किसी जमाने में देशी-विदेशी पक्षियों की मेजबानी करने के लिए जाना जाता था। खासकर जलपक्षी जैसे सारस व बत्तखों का यह प्रिय स्थान हुआ करता था। यह झील घोड़े की नाल के आकार की है। लेकिन बीते कई सालों में इसका आधा हिस्सा लैंडफिल क्षेत्र के रूप में इस्तेमाल किया गया। 

टिकरी खुर्द झील
टिकरी खुर्द गांव में बनी झील को टिकरी खुर्द झील कहा जाता है, ये एक प्राकृतिक झील है। जिसे बैल झील यानि यमुना नदी का एक चैनल भी कहा जाता है। ये इस गांव का कभी प्रमुख जल निकाय हुआ करता था। इस झील के देखभाल की जिम्मेदारी दिल्ली विकास प्राधिकरण को मिली हुई है।
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संजय वन झील
संजय वन झील दक्षिणी दिल्ली में स्थित है, जिसका संरक्षण दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा किया जा रहा है। संजय वन में स्थित यह झील एक प्राकृतिक झील है, जोकि अनंगपाल तोमर द्वितीय के लालकोट की प्राचीर के समीप स्थित है। बताया जाता है कि यह झील कभी गांव के लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को भी पूरा किया करती थी।

धीरपुर झील
आजादपुर से यमुना नदी के वर्तमान तट तक दलदल के अवशेष फैले हुए थे। जोकि अब धीरपुर में देखने को मिलते हैं। इसे धीरपुर वेटलैंड कहा जाता है। हाल ही में धीरपुर की आर्द्रभूमि को बहाल करने का फैसला लिया गया था। यही नहीं डीडीए ने अंबेडकर विश्वविद्यालय के साथ एक प्रबंधन समझौता भी किया था।

कुछ कृत्रिम व ऐतिहासिक झीलों का भी होगा कायाकल्प
प्राकृतिक झीलों के साथ ही कुछ कृत्रिम झीलों का कायाकल्प भी किया जाएगा। इनमें संजय लेक, हौजखास लेक, स्मृति वन कोंडली, स्मृति वन वसंत कुंज, वेलकम झील, डिस्ट्रिक पार्क अवंतिका सेक्टर 1 रोहिणी, राजौरी गार्डन लेक इत्यादि शामिल हैं। 

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