Tuesday, Nov 29, 2022
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farmers suicide cases increased in corona lockdown

कोरोना लॉकडाउन में किसानों की खुदकुशी के मामले बढ़े

  • Updated on 10/29/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ने 2020 में कृषि आत्महत्या की संख्या 10677 आंकी है और इस पर संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि 2020 के भारत में दुर्घटना मृत्यु और आत्महत्याओं पर एनसीआरबी की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, इन आत्महत्याओं में से 5579 खेती करने वालों की हैं और 5098 खेतिहर मजदूरों की है। 
      महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा कृषि आत्महत्या हैं। से है। कृषि आत्महत्याओं की संख्या कुल आत्महत्याओं का 7 फीसदी है। जबकि वर्ष 2019 की तुलना में 2020 में कृषि आत्महत्याओं की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है, वहीं कृषि आत्महत्याओं के आंकड़ों पर एनसीआरबी की रिपोर्ट की विश्वसनीयता की कई आलोचनाएं भी मौजूद हैं और इसमें 2016 से कृषि आत्महत्याओं में गिरावट का उल्लेख है। किसान नेताओं ने यह जानकारी देते हुए कहा कि इन रिपोर्टों में शून्य कृषि आत्महत्याओं रिपोर्ट करने वाले कई राज्यों की विसंगति सामने आई है। 
जबकि यह सब कृषि आत्महत्याओं के संबंध में वास्तविक तस्वीर को दबाने के प्रयास दिखते हैं। 
       संयुक्त किसान मोर्चा के बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि देश में किसान जिस विकट कृषि संकट से गुजर रहे हैं, लॉकडाउन, कठिनाइयों के साथ ही संकट और बढ़ रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा एक बार फिर मांग करता है कि भारत सरकार कॉर्पोरेट.समर्थक कानूनों को लाकर किसानों की स्थिति को बदतर न करे और मांग करता है कि सरकार तीन किसान विरोधी कानूनों को तुरंत निरस्त करे। 
       एसकेएम यह भी मांग करता है कि भारत सरकार सभी किसानों और सभी कृषि उत्पादों के लिए एमएसपी गारंटी कानून तत्काल लागू करे। कृषि में लागत कम करने और बाहरी इनपुट निर्भरता से संबंधित कई अन्य लंबे समय से लंबित मुद्दोंए विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन के युग में प्राकृतिक आपदाओं सहित जोखिमों को कम करने और उनसे बचाव करनेए कृषि में वास्तविक खेतिहरों का समर्थन करना आदिए को सरकारों द्वारा गंभीरता से संबोधित करने की आवश्यकता है।
 

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