Saturday, Jun 10, 2023
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लोगों के फोन में घुसकर गूगल ने किया ये बदलाव, बाद में मांगी माफी

  • Updated on 9/19/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। पिछले हफ्ते की शुरुआत में गूगल पिक्सल यूजर्स ने देखा कि उनके फोन में बैटरी सेवर सेटिंग ऑन थी जबकि किसी ने भी इस फीचर को एक्टिवेट नहीं किया था। बाद में पता चला कि गूगल ने दूर से ही अपने आप ये फीचर एक्टिवेट कर दिया था जिसके लिए अब उन्होंने माफी मांग ली है। 

सबसे पहले ये शिकायत 14 सितंबर को आई। एक गूगल पिक्सल फोन यूजर ने सोशल मीडिया पर सवाल किया कि क्या किसी और के फोन का पावर सेविंग मोड अपने आप ऑन हो गया जबकि आपने उसे ऑफ किया हुआ था?

इसी के बाद शिकायतों की लाइन लग गई। हालांकि लोगों को इस बात पर गौर करने में बहुत समय लग गया कि उन सभी शिकायतकर्ताओं में एक बात समान थी। दरअसल वो सभी आने वाले नए एंड्रॉयड 9.0 पाई सॉफ्टवेयर का बिटा वर्जन इस्तेमाल कर रहे थे। 

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बता दें कि बैटरी सेवर मोड से फुल चार्ज करने के बाद ज्यादा बैटरी इस्तेमाल नहीं होती क्योंकि वो बैटरी पर चल रही ऐप्स को बंद कर देता है, नोटिफिकेशन को देर से दिखाता है और लोकेशन सर्विस को भी बंद कर देता है। ये उन लोगों के लिए सही नहीं है जो बैटरी को बचाने की जगह इन फीचर्स का इस्तेमाल करना पसंद करेंगे। 

शिकायतें आने के थोड़ी देर बाद गूगल के प्रवक्ता ने कहा कि एक इंटरनल टेस्ट किया जा रहा था जो गलती से पाई बिटा वर्जन इस्तेमाल कर रहे यूजर्स के फोन पर चालू कर दिया गया। जिससे उनके फोन की बैटरी सेवर सेटिंग शुरू हो गई। हालांकि तुरंत इसको सुधारने के लिए प्रोसेस किया गया और सेटिंग्स को डिफॉल्ट कर दिया गया। गड़बड़ी के लिए माफी।

बता दें कि ये केवल पिक्सल फोन में ही नहीं बल्कि कई और फोन के साथ भी हुआ जैसे की ऐसेन्शियल फोन, वन प्लस 6 और नोकिया 7 प्लस।

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कुछ लोग इस समस्या के ठीक हो जाने से खुश थे तो कुछ ने पिक्सल फोन इस्तेमाल करने वालों के लिए चिंता जताई। इसी के सुरक्षा और गोपनियता पर सवाल खड़े हो जाते हैं। गूगल यदि दूर से ही फोन की सेटिंग बदल सकता है तो वो बिना बताए प्राइवेट डाटा भी अपने पास रख सकता है। 

गूगल पहले भी कई बार इस तरह के काम कर चुका है। पहले भी सिस्टम ऐप्स के जरिए जैसे डिवाइस हेल्थ सर्विस और गूगल प्ले सर्विस से वो लोगों की निजता का उल्लंघन कर चुका है। ये बात मानी जा सकती है कि ये केवल एक एक्सपेरिमेंट के लिए होते हैं। लेकिन गलती ये है कि ये एक्सपेरिमेंट गलती से सभी यूजर्स के पास क्यों जाते हैं बजाय इसके कि टेस्ट में मौजूद कर्मचारियों के ही फोन पर भेजे जाएं।

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