Thursday, Aug 16, 2018

आप से बगावत करने वाले सुखपाल खैहरा से कट्टरपंथी जोड़ सकते हैं तार!

  • Updated on 8/5/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल।  आम आदमी पार्टी की हाईकमान से बगावत करके पंजाब में मोर्चा खोलने वाले पार्टी के नए गुट के साथ कट्टरपंथी समूहों की नजदीकियां बढ़ने के आसार हैं। पार्टी से बगावत करने वाले खैहरा ग्रुप ने अपनी रैली के दौरान पंजाब में डेरावाद के खिलाफ सख्त स्टैंड लेने की हिमायत की है। इस बीच करीब डेढ़ साल पहले सरबत खालसा के जरिए बने जत्थेदार बलजीत सिंह दादूवाल द्वारा भी खैहरा के स्टैंड का दबी आवाज में समर्थन किया गया है। रैली के दौरान भी दादूवाल के समर्थक रैली स्थल पर मौजूद थे। 

इससे पहले विधानसभा चुनाव से पूर्व भी पंथक समूहों ने अरविंद केजरीवाल के साथ तालमेल बनाने की कोशिश की थी। आम आदमी पार्टी और पंथक समूहों की नजदीकियों की खबरों के चलते ही पार्टी को विधानसभा चुनाव में नुक्सान झेलना पड़ा और चुनाव से कुछ दिन पूर्व अरविंद केजरीवाल के एक पूर्व आतंकी के घर पर रहने के कारण आम आदमी पार्टी को लेकर यह धारणा बनी कि पार्टी पंजाब के कट्टरपंथी सिखों की विचारधारा की समर्थक है।

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बठिंडा में की गई रैली के दौरान सुखपाल सिंह खैहरा ने भी श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी का मुद्दा उठाया और इस मामले में डेरा सिरसा को निशाने पर लिया। इससे पहले खैहरा ने बरगाड़ी इंसाफ मोर्चे के धरने में जाकर उन्हें समर्थन दिया था और अब रैली के दौरान उन्होंने बहिबल गोलीकांड में भी सख्त स्टैंड लेने की घोषणा की। इससे पूर्व खैहरा का रैफरैंडम 2020 को लेकर आया बयान भी सुर्खियों में रहा था। हालांकि पार्टी की फटकार के बाद खैहरा ने इस पर सफाई दी थी।  
इसलिए खैहरा ग्रुप से नजदीकी बढ़ा रहे कट्टरपंथी
खैहरा ग्रुप को पंथक समूहों का समर्थन इसलिए भी मायने रखता है क्योंकि आने वाले महीनों में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव हैं और इन चुनावों में कट्टरपंथी समूहों द्वारा उम्मीदवार उतारे जाते हैं। लिहाजा कट्टरपंथी समूहों की खैहरा ग्रुप से नजदीकी इस गुट द्वारा गुरुद्वारा चुनाव में समर्थन की उम्मीद पर भी आधारित हो सकती है। इस बीच खैहरा ने समान विचारधारा वाले समूहों के साथ मिल कर पंजाब में तीसरा विकल्प बनाने की भी जरूरत बताई है जिसमें ये कट्टरपंथी समूह भी अहम भूमिका निभा सकते हैं। 
खैहरा के लिए मुसीबत बन सकता शब्द ‘भाभी’!
लुधियाना (मुल्लांपुरी): आप पार्टी के विरोधी पक्ष की कुर्सी से वंचित हुए सुखपाल खैहरा ने बठिंडा में रैली करके जो विरोधी पक्ष के नवनिर्वाचित नेता हरपाल सिंह चीमा की तरफ इशारा करके स्टेज से जो शब्द बोले हैं कि दिल्ली वालों ने विरोधी पक्ष का जो नेता बनाया है, उसको लोग अब से ‘भाभी’ कहने लगे हैं।

इन शब्दों को सुनकर युवा पीढ़ी सोचने लगी कि खैहरा ने ‘भाभी’ शब्द क्यों कहा है, जबकि बुजुर्ग तो उसी समय समझ गए थे कि खैहरा कौन से स्टेशन से बोल रहे हैं, क्योंकि पंजाब के गांवों में गरीब व दलित व्यक्ति की पत्नी को गांव का हरेक व्यक्ति मजाक से ‘भाभी’ कहना लंबे समय से चलता आ रहा है। 

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खैहरा की ओर से स्टेज से ‘भाभी’ शब्द से पंजाब में बैठे लाखों दलित परिवारों पर सीधी चोट स्वभाविक है, क्योंकि इन बिगड़े हुए बोलों को लेकर अकाली व कांग्रेस ने भी खैहरा को चौराहे में घेरा है। लेकिन अभी तक दलित भाईचारा इस समय चुप्पी साधे बैठा है परन्तु राजनीतिक माहिरों ने कहा कि खैहरा की ओर से ‘भाभी’ बोल कर अपने आपको धनाढ्य व बड़े घराने के होने का जो दिखावा किया है, इसका बड़ा राजनीतिक नुक्सान उनके लिए मुसीबत बन सकता है, क्योंकि दलित के वोट की ताकत खास कर दोआबा में बड़ा स्थान रखती है।

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