Wednesday, Jul 24, 2019

दिल्ली में बढ़ते अपराधों में नाबालिगों की अहम भूमिका, पढ़िए खास खबर

  • Updated on 6/16/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। नाबालिगों द्वारा किए जा रहे राजधानी में अपराध के आंकड़े प्रत्येक वर्ष बढ़ते जा रहे हैं। हाल के दिनों में नाबालिग पैसों के लिए हत्या, फिरौती के लिए अपहरण, चोरी, लूट समेत कई अन्य घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। ये घटनाएं दिल्ली में अपराध जगत की बदली हुई तस्वीर दिखाती हैं। यहां नाबालिगों से ऐसे-ऐसे गुनाहों को अंजाम दिलवाया जा रहा है, जिसके बारे में हम और आप सोच भी नहीं सकते। दिल्ली में सालों से चल रहे गैंगवार में अब इन नाबालिगों को मोहरा बनाया जा रहा है।

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एक-दूसरे को खत्म करने के लिए ऐसे लड़कों के हाथ में हथियार थमाए जा रहे हैं, जिन्हें ये तक नहीं पता कि गुनाह को अंजाम देने के बाद उनका क्या होगा? गैंगस्टर नाबालिगों से हत्या जैसी संगीन वारदात करवाकर अपने मकसद में कामयाब हो रहे हैं। यदि वे पकड़े जाते हैं तो कानून में नाबालिगों के खिलाफ बहुत कम सजा का प्रावधान होने से उन्हें चंद महीने में जमानत मिल जाती है। बाल सुधार गृह में भी उनके साथ कैदी जैसा व्यवहार नहीं किया जाता है। बेहद लचीला कानून होने का हवाला देते हुए गैंगस्टर नाबालिगों का ब्रेन वॉश कर अपने गैंग में शामिल कर लेते हैं। यमुना पार, बाहरी और दिल्ली में रहने वाले 60 से अधिक नाबालिग टिल्लू व गोगी, नासिर और छेनू पहलवान गैंग में शामिल हैं।

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गैंग में 60 से अधिक नाबालिग 
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि पिछले कई साल से देखा जा रहा है कि बड़े गैंगस्टर 15-17 साल के नाबालिगों को गैंग में शामिल कर उनसे बड़ी वारदात करवा रहें हैं। गरीब परिवार के अनपढ़ नाबालिगों को ढूंढ़कर गैंगस्टर पहले तो उन्हें बड़े होटलों में अच्छा खाना खिला, महंगी कारों में बैठाकर कई दिनों तक घुमाते हैं। उन्हें जेब व घर खर्च के लिए हजारों रुपये देते हैं। उन्हें अच्छी शराब पिलाते हैं। बुरी लत लग जाने पर यह कहकर ब्रेन वॉश करते हैं कि नाबालिगों को पुलिस नहीं पकड़ सकती है।

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वारदात के बाद भाग जाने पर पुलिस उनके बारे में पता नहीं लगा सकती है। अगर पकड़े भी जाते हैं तो बाल सुधार गृह में रखा जाएगा। वहां कैदियों जैसा व्यवहार नहीं किया जाता है। चंद महीने में जमानत पर छोड़ दिया जाता है। इसके बाद वे गैंगस्टरों के झांसे में आकर वारदात के लिए तैयार हो जाते हैं। वे यह भी भूल जाते हैं कि उनके माता-पिता उन्हें सभ्य नागरिक बनाना चाहते थे और वे अपराध की किस काल कोठरी में पहुंच गए। फिलहाल नाबालिगों को लेकर देश के कमजोर कानून का फायदा गैंगस्टर उठा रहे हैं और नशे के आदी मासूम उनके हाथों में खेलने को मजबूर हैं। 

इन वारदातों को दिया अंजाम

  • तारीख-23 दिसम्बर 2015 को दिल्ली के कड़कडडूमा कोर्ट परिसर में चार नाबालिग लड़कों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। इस वारदात में एक कांस्टेबल की मौत, एक कांस्टेबल और एक अपराधी घायल हुआ।
  • तारीख-6 अगस्त 2014 को दिल्ली के मदनगीर इलाके के भीड़भाड़ वाले बाजार में एक युवक को दौड़ा-दौड़ाकर चाकू मारा गया। सचिन नाम के युवक की मौत हो गई। इस सनसनीखेज वारदात के बाद पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया था, उनमें से 4 नाबालिग थे।
  • तारीख-29 मई-2018 तीस हजारी कोर्ट के गेट नंबर-2 के बाहर जेल वैन में बिठाते ही एक नाबालिग लड़के ने गोगी गैंग के शार्प शूटर दिनश माथुर (30) पर देसी तमंचे से गोली चला दी। गोली उसके हाथ में लगी। सुरक्षा कर्मियों व वहां मौजूद पुलिस कर्मियों ने आरोपी लड़के को मौके से ही 
  • दबोच लिया।
  • तारीख-15 जनवरी-2018 प्रशांत विहार स्थित रोहिणी सेक्टर-14 में लग्जरी कार सवार बदमाशों ने प्रतिद्वंद्वी टिल्लू गैंग के 28 वर्षीय युवक रवि भारद्वाज को गैंगवार में गोलियों से भून दिया। हमलावरों ने करीब 29 राउंड गोलियां चलाईं। दो नाबालिग सहित तीन युवकों ने रवि पर करीब बीस सेकेंड तक फायरिंग कर हत्या कर दी थी। 
  • तारीख-15 मार्च-2016 नजफगढ़ स्थित चार हत्याओं के आरोपी दिनेश मोगली के पिता जनकराज (60) की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड को नवीन खाती गैंग के बदमाशों ने नाबालिगों सहित अंजाम दिया था। 
  • अजय छोटू और राजू बाबा नाम के गैंग के बीच पिछले एक साल से दिल्ली के सट्टेबाजी के बाजार पर कब्जे की जंग चल रही है। इस झगड़े में अब तक एक दर्जन से ज्यादा हत्याएं हो चुकी हैं। अब ये दोनों गैंग अपने दुश्मनों को रास्ते से हटाने के लिए नाबालिग बच्चों का सहारा ले रहा है।
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