Sunday, Mar 07, 2021
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Kerala Plane Crash: पायलट डीवी साठे ने आखिरी समय तक की थी विमान को बचाने की हर संभव कोशिश

  • Updated on 8/8/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। केरल स्थित कोझिकोड एयरपोर्ट पर वंदे भारत मिशन के तहत दुबई में फंसे भारतीयों को लेकर आ रहे एअर इंडिया के विमान के रनवे पर फिसल जाने के कारण बड़ा हादसा हो गया, जिसके बाद विमान खाई में जा गिरा जहां विमान दो टुकड़ों में बंट गया था। 

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आखिर वक्त तक विमान को बचाने की कोशिश
ऐसे में अब विमान की लैंडिंग को लेकर कई तरह के सवाल खड़े किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एयरपोर्ट के अधिकारियों का कहना है कि विंग कमांडर दीपक वसंत साठे ने आखिर वक्त तक विमान को किसी भी दुर्घटना से बचाने की हर संभव कोशिश की थी। इसके बाद भी वे इस हादसे को नहीं टाल सके। इन सबके बाद भी कमांडर दीपक वसंत साठे ने अपनी जान गंवाकर अधिकतर यात्रियों की जान बचा ली।   

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1981 में वायुसेना में भर्ती हुए थे साठे
इस हादसे में पायलट कैप्टन दीपक वसंत साठे के साथ-साथ उनके सह पायलट अखिलेश कुमार की भी मौत हो गई। साठे 1981 में वायुसेना में भर्ती हुए थे। मिली जानकारी के मुताबिक उन्होंने विमान की लैंडिंग कराने से पहले आसमान में कई चक्कर लगाए, जो उनकी सूझ-बूझ का परिचय देते हैं। इसके बाद उन्होंने अंत में विमान की लैंडिंग कराने का फैसला लिया। केरल में हो रही भारी बारिश के कारण रनवे पर काफी पानी जमा हो गया था। ऐसे में विमान लैंडिंग करते ही फिसल गया और खाई में जा गिरा, जिसके चलते ये बड़ा हादसा हो गया। 

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डीजीसीए ने दीए जांच के आदेश
फिलहाल, इस हादसे की चांज के आदेश डीजीसीए ने दे दिए हैं। डिजीसीए बीते साल कोझिकोड के कारीपुर एयरपोर्ट पर खतरे की चेतावनी दे चुका था। वहीं अब उड्डयन नियामक का इस घटना पर कहना है कि रनवे पर बहुत ज्यादा रबर का जमाव हो गया था, जिसके कारण यहां विमानों की लैंडिंग दिन ब दिन खतरनाक होती जा रही थी।

टेबलटॉप एयरपोर्ट पर इस तरह का ये पहला हादसा नहीं है इससे पहले 2010 में मंगलूरू के टेबलटॉप एयरपोर्ट पर भी इसी तरह विमान हादसा हुआ था जिसमें विमान के फिसलकर खाई में गिरने से 158 यात्रियों की मौत हो गई थी।

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काफी खतरनाक माने जाते हैं टेबलटॉप एयरपोर्ट
दरअसल, कोझिकोड एयरपोर्ट एक छोटी सी पहाड़ी पर बनाया गया है, जो भौगोलिक रूप से 'टेबलटॉप' है। पट्टी के किनारे घाटी होने के कारण ये एयरपोर्ट लैडिंग के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। अधिकतर टेबलटॉप रनवे पठार या पहाड़ के टॉप पर ही बने होते हैं। जिसके चलते यहां हादसा होने की संभावना बनी रहती है। कर्नाटक के मंगलुरु और मिजोरम में भी इस तरह के टेबलटॉप रनवे बने हुए हैं।

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