Friday, Jun 21, 2019

‘मिलावटी और दिखावटी है मोदी की राजनीति’

  • Updated on 4/17/2019

यह पहला मौका है जब बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के बेटे  तेजस्वी यादव लोकसभा चुनावों में  राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का नेतृत्व कर रहे हैं क्योंकि लालू प्रसाद चारा घोटाले में जेल की सजा काट रहे हैं।  मौजूदा चुनावी परिदृश्य और राजद के समक्ष चुनौतियों के बारे में हमने बात की बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री  तेजस्वी यादव से : 

तेजस्वी यादव ने कहा कि पहली बार उनकी पार्टी मंझे हुए और अनुभवी नेता लालू प्रसाद की गैर मौजूदगी में आम चुनाव लड़ रही है।  ऐसे में उनकी अनुपस्थिति पार्टी और परिवार दोनों जगह महसूस की जा रही है। लेकिन निश्चित तौर पर जब भी मैं आम जनता में जाता हूं और सभाएं करता हूं और अपने पिता के बारे में बात करता हूं तो मैं देखता हूं कि लोगों में बहुत गुस्सा है और वे उन्हें याद करते हैं।

लोगों के चेहरे से पता चलता है कि लालू प्रसाद के साथ अन्याय हुआ है। वे शारीरिक रूप से हमारे साथ नहीं हैं लेकिन उनकी विचारधारा हमारे साथ है। इसी विचारधारा के साथ हम चुनाव में आगे बढ़ रहे हैं।  न केवल बिहार में बल्कि देशभर में  जो कोई भी सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता को मानता है वे उन्हें याद करते हैं। यदि कोई सबसे ज्यादा मजबूती से साम्प्रदायिकता से लड़ा है तो वह लालू जी हैं। 

बेरोजगारी और आरक्षण हैं बड़े मुद्दे 
यह पूछे जाने पर कि क्या वह पार्टी की विरासत को आगे बढ़ाने में  बोझ महसूस कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि यह मेरी जिम्मेदारी है और लोगों का मुझमें विश्वास है। हम लालू जी की लड़ाई को आगे बढ़ा रहे हैं। यह कोई बोझ नहीं है, यह मेरा काम है,  मेरा कत्र्तव्य है। 

तेजस्वी का कहना है कि इन चुनावों में बेरोजगारी, आरक्षण और संविधान की रक्षा प्रमुख मुद्दे हैं। विपक्षी पाॢटयों   का कोई राष्ट्रीय नेतृत्व और सामान्य एजैंडा न होने के सवाल पर तेजस्वी का कहना है कि एन.डी.ए. में तीन तलाक और कश्मीर पर नीतीश जी के विचार बिल्कुल अलग हैं। एन.डी.ए. के सहयोगी चिराग पासवान ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था और पूछा था कि नोटबंदी का क्या फायदा हुआ? सरकार के प्रति धारणा और  जमीन पर जो कुछ हो रहा है उसमें काफी अंतर है। 

बिहार को नहीं मिला विशेष दर्जा
आप देखते हैं कि यह वही एन.डी.ए. है। हम बिहार को विशेष दर्जा देने के लिए लड़ते थे, नीतीश जी का भी वही एजैंडा था,लेकिन भाजपा यह दर्जा नहीं दे रही है। वह ऐसा क्यों नहीं कर रहे हैं। बिहार की मुख्य मांग पिछड़े हुए राज्य को आगे ले जाना है, तभी देश आगे बढ़ सकेगा। हमें सहायता की जरूरत है। लेकिन मोदी जी के सत्ता में आने के बाद बिहार जैसा पिछड़ा राज्य और ज्यादा बोझ महसूस कर रहा है।  

काफी लम्बे समय के बाद केन्द्र और बिहार में समान दलों की सरकार है जिसे डबल इंजन कहा जाता है। लेकिन क्या हुआ? कुछ नहीं हुआ। हमें मुद्दों पर बात करनी चाहिए। किसानों का क्या हुआ? न तो आय दोगुनी हुई, न ही ऋण माफ हुआ। शिक्षा की गुणवत्ता बहुत नीचे चली गई। 

तेजस्वी का मुकाबला मोदी और नीतीश जैसे मशहूर चेहरों से होने के जवाब में तेजस्वी ने कहा कि अब वे मशहूर नहीं हैं। मोदी जी की राजनीति मिलावटी, दिखावटी और बनावटी है। नीतीश कुमार अपनी विश्वसनीयता खो चुके हैं। 4 साल में 4 सरकारें आ चुकी हैं। नीतीश जी बहुत बार  पाला बदलते हैं। काम कहां हुआ? सात निश्चयों का क्या हुआ? 

विपक्ष में राहुल गांधी के नेतृत्व की स्वीकार्यता को लेकर उठ रहे सवालों के बारे में तेजस्वी का कहना है कि मोदी जी के बारे में क्या विचार है? क्या वे अपने गठबंधन में सभी को स्वीकार्य हैं? विपक्ष में किसने कहा कि वह प्रधानमंत्री बनना चाहता है? क्या किसी ने कहा है?

जब किसी ने नहीं कहा तो स्वीकारने या नकारने का सवाल ही कहां पैदा होता है? राहुल गांधी मोदी जी से ज्यादा सक्षम हैं। वह तीन बार सांसद रहे हैं। वह भारत की सबसे पुरानी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं जिसका स्वतंत्रता की लड़ाई में अहम योगदान रहा है। 

वास्तविकता है जाति
क्या बिहार में अब भी जाति के आधार पर चुनाव लड़े जाते हैं? इस सवाल के जवाब में तेजस्वी ने कहा कि बिहार में जाति के आधार पर राजनीति होती है, जाति एक वास्तविकता है। लेकिन हम समानता में विश्वास रखते हैं। समान अधिकार किसे मिल रहे हैं। हम अंतिम व्यक्ति की लड़ाई लड़ रहे हैं और यदि हम ऐसा करते हैं तो   क्या हम जातिवादी हो जाते हैं? ऐसा नहीं है। हम यह नहीं कहते कि किसी से छीन कर हमें दे दो।

हम कहते हैं कि जो उनका है उन्हें दे दो। यदि कोई अनुसूचित जाति का व्यक्ति शादी में घोड़ी पर चढ़ता है तो उसे ऐसा करने दिया जाए। यदि संविधान  में आरक्षण का प्रावधान है तो यह मिलना चाहिए। 

यदि ऊंची जातियों में गरीब हैं तो  उन्हें भी दो, आपको कौन रोकता है। लेकिन यह काम कौन करेगा। वे इस बारे में बात नहीं करते। वे मंदिर, मस्जिद, पाकिस्तान और कश्मीर की बात करते हैं। किसानों और बेरोजगारों के बारे में कोई बात नहीं करता। सकारात्मक बात की जानी चाहिए। 

अपने विकास के एजैंडे के बारे में तेजस्वी ने कहा कि बिहार एक पिछड़ा हुआ राज्य है। यहां प्रवास, बेरोजगारी, स्वास्थ्य, आधारभूत ढांचा व यातायात जैसे मुद्दे हैं। बहुत से क्षेत्रों में काम किए जाने की जरूरत है। हमारे विकास का एजैंडा मूलभूत जरूरतों को पूरा करने का है। सही समय आने पर हम और भी  बहुत कुछ करने का इरादा रखते हैं। बिहार के चुनाव काफी दूर हैं और हमारे चाचा (नीतीश) बहुत समझदार हैं।                                                             ---अनुजा

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