Friday, Jan 21, 2022
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Syapa after politics: Baspai saved in ruckus, trapped

सियासत के बाद स्यापा : बवाल में बच गए बसपाई, फंस गए आसपाई

  • Updated on 10/5/2021

नई दिल्ली/टीम डिजीटल। बगैर रणनीति और सूझ-बूझ के सियासत करना अक्सर भारी पड़ जाता है। इसका ताजा उदाहरण आजाद समाज पार्टी (आसपा) में देखने को मिला है। दलित परिवार को न्याय दिलाने की खातिर चलाए गए आंदोलन में आवेश में आकर अति उत्साह दिखाना और पुलिस से उलझना आसपा के 10 समर्थकों को काफी महंगा पड़ा है। गंभीर धाराओं में केस दर्ज होने के बाद से वह जेल की हवा खा रहे हैं। उनके परिजन अब परेशान हैं। अपने बच्चों की चिंता में वह विलाप कर रहे हैं। खास बात यह है कि इस आंदोलन की लीडरशिप बसपा ने की थी। बसपा नेताओं ने चतुराई दिखाकर पुलिस और पीड़ित पक्ष की हमदर्दी बटोर ली। जबकि बसपा को 19 साबित करने के चक्कर में असपा समर्थक बुरी तरह फंस गए। 

यह है मामला
लोनी बॉर्डर कोतवाली क्षेत्र के संगम विहार में खुशीराम सपरिवार रहते हैं। दलित खुशीराम का बेटा राहुल कुमार (27) पेशे से ऑटो चालक था। विगत 20 जून को पड़ोस में विवाद होने पर राहुल की बेरहमी से पिटाई कर दी गई थी। मारपीट में गंभीर रूप से घायल पीड़ित ने एक अक्तूबर को घर पर दम तोड़ दिया था। इसके अगले दिन पीड़ित परिवार और बड़ी संख्या में नागरिकों ने लोनी की इंद्रापुरी पुलिस चौकी के सामने शव रखकर जमकर हंगामा किया था। इस बीच यातायात जाम तक कर दिया गया था। बाद में पुलिस ने आजाद समाज पार्टी (आसपा) के 10 समर्थकों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। 

जेल में बंद आसपा समर्थक
जिनमें आशिक निवासी ट्रोनिका सिटी, कपिल वेदी निवासी पटेल नगर गाजियाबाद, सुशांत व अंकित निवासी जटवाड़ा गाजियाबाद, अमित, सुनील व पवन निवासी पप्पू कॉलोनी साहिबाबाद, राहुल निवासी संजय कॉलोनी अर्थला तथा आजाद निवासी अर्थला शामिल हैं। पुलिस ने सभी आरोपियों पर 9 धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी। इनमें 7 सीएलए एक्ट सबसे गंभीर है। खास बात यह है कि दलित परिवार को न्याय दिलाने की इस मुहिम की अगुवाई बसपा जिलाध्यक्ष वीर सिंह जाटव कर रहे थे, मगर बवंडर के चक्कर में फंस आसपा के समर्थक गए। 

चतुराई दिखा बच गई बसपा 
दरअसल बसपा नेता ने कानूनी पचड़े से बचने को जहां चतुराई दिखाई, वहीं आसपा समर्थक आवेश में थे। सियासी गलियारों में चर्चा है कि बसपा के मुकाबले खुद को 21 साबित करने की कोशिश आसपा समर्थकों को महंगी पड़ी है। उधर, आजाद समाज पार्टी (आसपा) के राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य गुलजार सिद्दीकी ने इस मामले में योगी सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाया है। सिद्दीकी ने कहा कि जेल में बंद पार्टी कार्यकर्ताओं को छुड़ाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। 
 

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