सरकार ने विदाई बजट में खोला सुविधाओं का पिटारा

  • Updated on 2/2/2019

जैसी कि उम्मीदें थीं बजट में नरेंद्र मोदी सरकार से नाराज चल रहे वर्ग पर सुविधाओं की वर्षा करते हुए कार्यवाहक वित्त मंत्री श्री पीयूष गोयल ने 2019-20 का अंतरिम बजट शुक्रवार को पेश किया।

पहली बार बजट पेश करते हुए उन्होंने कहा कि ‘‘यह अंतरिम बजट नहीं, विकास यात्रा का माध्यम है।’’  उन्होंने दावा किया कि ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहां देश को भ्रष्टाचार मुक्त, साफ और मजबूत सरकार दी वहीं इस अवधि में दुनिया ने भारत की ताकत को पहचाना है।’

श्री गोयल के अनुसार ‘‘सरकार ने कमरतोड़ महंगाई की कमर तोड़ दी है और महंगाई कम करके सरकार का घाटा कम किया है। इस समय महंगाई 10 प्रतिशत से घट कर 4 प्रतिशत के निम्रतम स्तर पर है।’’

उन्होंने कहा कि भारत विश्व में सबसे तेज बढऩे वाली और विश्व की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं शुरू कीं ताकि किसी को भूखे पेट न सोना पड़े।
2022 तक नया भारत बनाने और हर बेघर को घर देने का वादा करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने टैक्स सुधारों में बड़े बदलाव किए हैं और जी.एस.टी. सबसे क्रांतिकारी कदम है।

गांवों में भी शहरों जैसी सुविधाएं देने का दावा करते हुए उन्होंने कहा,‘‘अगले 5 वर्षों में देश में एक लाख डिजीटल गांव बनाए जाएंगे। सरकार ने जो कहा वह किया और 2014 से 2018 के दौरान 1 करोड़ 53 लाख मकान बनाए।’’

‘‘1.43 करोड़ एल.ई.डी. बल्ब बांटे, देश में रोज 27 किलोमीटर हाईवे बन रहे हैं, 14 एम्स निर्माणाधीन हैं तथा दुनिया की सबसे बड़ी आयुष्मान हैल्थ केयर योजना के अंतर्गत 5 वर्षों में 10 लाख लोगों का इलाज किया गया।’’ 

‘जय किसान’ नारे के बीच उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में किसानों की आय में दोगुनी वृद्धि हुई है, 22 फसलों की एम.एस.पी. में  50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की गई है तथा स्वच्छ भारत अभियान से 98 प्रतिशत गांव स्वच्छ हुए हैं।

ब्रॉडगेज पर सभी मानव रहित फाटक समाप्त कर दिए गए हैं और बीता वर्ष रेलवे के लिए सर्वाधिक सुरक्षित वर्ष रहा है। पहली बार ‘वंदे मातरम सैमी हाई स्पीड रेलगाड़ी’ भारत में बनी जिसमें सभी सुविधाएं दी गई हैं।

चूंकि देश में इसी वर्ष मई से पहले लोकसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में सरकार ने इस बजट में आने वाले समय के लिए गांव, गरीब, किसानों, मजदूरों और मध्यम वर्ग के लिए सुविधाओं का पिटारा खोला है :

आयकर छूट 2.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए की गई तथा ग्रैच्युटी की सीमा 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 20 लाख रुपए की गई है। 

स्टैंडर्ड डिडक्शन 40,000 रुपए से बढ़ाकर 50,000 रुपए की गई है। 

टी.डी.एस. के लिए ब्याज से अर्जित आय की सीमा बढ़ाकर 40,000 रुपए की गई। यह छूट पहले 10,000 रुपए थी। 

ई.पी.एफ.ओ. की बीमा राशि 2.5 लाख रुपए से बढ़ा कर 6 लाख रुपए। 

21,000 रुपए वेतन वाले लोगों को 7,000 रुपए तक बोनस मिलेगा। 

वेतन आयोग की सिफारिशें शीघ्र लागू की जाएंगी।  

किसान सम्मान निधि के अंतर्गत 2 हैक्टेयर से कम जमीन वाले किसानों को 6,000 रुपए वाॢषक सहायता देने का प्रस्ताव है। इसे दो-दो हजार रुपए की तीन किस्तों में दिया जाएगा, इससे 12 करोड़ किसानों को लाभ पहुंचेगा तथा पहली किस्त दिसम्बर, 2018 से देय होगी।

पशु पालन और मत्स्य पालन के लिए ऋण में 2 प्रतिशत छूट दी जाएगी। 

आपदा पीड़ित किसानों को ब्याज दर में 5 प्रतिशत छूट और समय पर कर्ज चुकाने पर 3 प्रतिशत अतिरिक्त छूट दी जाएगी।

रक्षा बजट पहली बार 3 लाख करोड़ रुपए से बढ़ा दिया गया है। 

असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए 60 वर्ष आयु के बाद हर महीने 3,000 रुपए पैंशन का प्रावधान। इससे 10 करोड़ मजदूरों को लाभ पहुंचेगा। 

गौ संरक्षण के लिए राष्ट्रीय कामधेनु योजना शुरू की जाएगी।  

नीयत साफ है, नीति स्पष्टï है और निष्ठïा अटल है’ कह कर समाप्त किए अपने भाषण में श्री गोयल ने आशा के अनुरूप उन सभी वर्गों को कुछ न कुछ देने की कोशिश की है जो सरकार से नाराज चल रहे थे। 

जहां सत्ता पक्ष, व्यापार जगत और नौकरीपेशा ने इस बजट को विकासोन्मुखी  बताया है वहीं विरोधी दलों ने इसे जुमलों से भरपूर और अव्यावहारिक करार दिया है।

कांग्रेस के अनुसार, ‘‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत किसानों को प्रतिदिन 17 रुपए देना किसानों का अपमान है।’’ 

माकपा ने कहा कि ‘‘ïïकिसानों को 500 रुपए मासिक देने की घोषणा से पता चलता है कि गांव और किसानों के, सरकार द्वारा पैदा किए गए संकट से स्वयं सरकार किस कदर अपरिचित है।’’

बसपा ने कहा है कि ‘‘यह बजट जुमलों से भरपूर और जमीनी हकीकत से दूर है।’’  ‘आप’ के अनुसार, ‘‘किसानों सहित सभी वर्गों से छल कर रही मोदी सरकार ने किसानों को 500 रुपए मासिक देने की घोषणा करके उनकी बदहाली का अपमान किया है।’’

रेटिंग एजैंसी मूडीज ने इस अंतरिम बजट को साख की दृष्टि से नकारात्मक बताया और कहा है कि ‘‘अंतरिम बजट में राजस्व बढ़ाने बारे नई नीतियों का अभाव है।’’                                                                             —विजय कुमार 
     

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