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Why quarantine and isolation are important for corona special report PRSGNT

क्यों कोरोना के लिए जरुरी हैं क्वारंटाइन और आइसोलेशन, पढ़ें खास रिपोर्ट

  • Updated on 3/30/2020

नई दिल्ली/प्रियंका। दुनियाभर में कोरोना का कहर बढ़ता जा रहा है। दुनियाभर में इस वायरस से संक्रमित होने वालों की संख्या 7,21,817 तक पहुंच गई है। जबकि 30,968 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इस दौरान कोरोना से संक्रमित हुए मरीजों को क्वारंटाइन में और संक्रमण के अंदेशे वाले लोगों को आइसोलेशन में रहने के लिए कहा जाता है।

इन दोनों शब्दों को लेकर लोगों के मन में असमंजस की स्थिति है। कुछ लोग समझते हैं कि दोनों एक ही शब्द हैं तो कुछ लोग इसे एक खास प्रक्रिया मानते हैं जिससे कोरोना ठीक हो जाता है। आईये आपको इन शब्दों के बारे में विस्तार से बताते हैं। लेकिन पहले जाने कि कोरोना क्या है?

कोरोना वायरस
SARS-CoV-2 को ही कोरोना कहा जाता है, ये कोरोना का तकनीकी नाम है। इसकी वजह से ही जो संक्रमण होता है उसे कोरोना बीमारी कहा जाता है। इसे Covid-19 भी कहते हैं क्योंकि इसका सबसे पहला मामला 2019 में सामने आया इसलिए इसके साथ 19 जुड़ गया। इस बीमारी में गले में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, सूखी खांसी, बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

क्वारंटाइन क्या है
क्‍वारंटेना (quarantena) शब्द से बना क्‍वारंटाइन, वेनशियन भाषा का शब्‍द है। जिसका मतलब 40 दिन होता है। इसे प्लेग महामारी के समय से इस्तेमाल किया जा रहा है। सामान्य तौर पर इसे ऐसे समझा जा सकता है कि अगर आपको सर्दी, खांसी, जुकाम या बुखार होता है और नहीं चाहते कि आपके परिवार के बाकी लोगों को भी यह हो, तो खुद को कमरे में बंद कर लेते हैं या परिवार के बाकी लोगों से अपने खाने-पीने को अलग कर लेते हैं। इस अवस्था को होम क्वारंटाइन कर सकते हैं, यानी आप अपने घर में रहते हुए अपने आप को दूसरे लोगों से अलग कर लेते हैं।

ठीक इसी तरह अगर आपको कोरोना से संक्रमित है तो आप खुद को अपने घर के ही एक कमरे में कम से कम 14 दिन के लिए अलग कर लें, या बाहर भी किसी ऐसी जगह क्वारंटाइन हो सकते हैं जहां लोगों को आपसे संक्रमण का खतरा न हो। एक लाइन में कहें तो अगर किसी से बीमारी होने का खतरा होता है तो उसे क्वारंटाइन में रहना होता है।

क्या है आइसोलेशन
इसे यूं समझें कि अगर आपको ऐसा लगता है कि आप संक्रमित हो सकते हैं तो आप खुद को सेल्फ आइसोलेट कर लें या आइसोलेशन में चले जाएं। इसका मतलब खुद को लोगों से दूर रखने के लिए अलग कर लेना। ये बचाव वाला कदम है अगर आपको संक्रमण का डर है तो आप दूसरों तक इसे न पहुँचने के लिए खुद की तरफ से सतर्कता बरतते हैं। ताकि आप लोगों के संपर्क में आएं ही नहीं।

14 दिन ही क्यों
आइसोलेशन और क्वारंटाइन के समय कम से कम 14 दिन लोगों से बिलकुल दूर रहने के लिए कहा जाता है। दरअसल, कोरोना के लक्षण आने में ज्यादातर मामलों में 6 दिन लगते हैं और अगले 8 दिन तक संक्रमित व्यक्ति में बुरी तरह से संक्रमण फैला सकता है यानी बीमारी के लक्षण उजागर होने के पहले के 6 दिन और लक्षण उजागर होने के बाद के 8 दिन, मतलब 6+8=14 दिन।

इस दौरान अगर व्यक्ति को लक्षण दिखाई देते हैं तो फिर उसका इलाज शुरू किया जाता है। आगे भी इस बात का ध्यान रखा जाता है कि उस व्यक्ति से संक्रमण किसी को न हो इसलिए उसे आगे 8 दिनों तक रखा ही जाता है।

 

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