Tuesday, May 17, 2022
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World Bank estimates growth in India to be between 7.5 to 12.5% in next financial year prshnt

विश्व बैंक का अनुमान, अगले वित्तीय वर्ष में भारत में विकास दर 7.5 से 12.5% के बीच रहने की उम्मीद

  • Updated on 4/1/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2021-22 में भारत की ग्रोथ रेट 7.5 से 12.5 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान जताया है। विश्व बैंक (World Bank) ने साऊथ एशिया वैक्सीनेट्स (South Asia Vaccination) नाम की अपनी रिपोर्ट में यह अनुमान जताया है। कोरोना महामारी (Corona Pandemic) से जूझ रही भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह शुभ संकेत माना जा सकता है। वहीं अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund) के अनुसार 2021-22 में भारत की विकास दर 11.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। 

रिपोर्ट के अनुसार यह विकास दर इस बात पर भी निर्भर करेगा कि वैक्सीनेशन कैसा हो रहा है, साथ ही बाजार पर कोई प्रतिबंध है या नहीं। बाजार जितना ज्यादा खुला रहेगा अर्थव्यवस्था उतनी तेजी से रिकवर करेगी। टूरिज्म, ट्रेड, कंस्ट्रक्शन पर लॉकडाऊन का सबसे बुरा प्रभाव पड़ा था। 

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भारतीय अर्थव्यवस्था धीमी गति से आगे बढ़ेगी
वहीं कृषि क्षेत्र इससे मुक्त रहा। कोरोना से रोकथाम के लिए भारत सरकार ने अप्रैल 2020 से जून 2020 तक लॉकडाऊन लगा दिया था। जिससे वित्तीय व्यापार और उद्योग पूरी तरह से ठप्प पड़ गए थे। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था धीमी गति से आगे बढ़ेगी। इसका बड़ा कारण है कि लॉकडाऊन से पहले से गैर-बैंक वित्तीय फर्म और वित्तीय सिस्टम को बड़ा झटका लगा था। जिसका बाद में लगाए गए लॉकडाऊन ने भारतीय अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से झकझोर दिया। 

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औद्योगिक श्रमिकों के लिए खुदरा महंगाई 4.48 प्रतिशत पर पहुंची
औद्योगिक श्रमिकों से संबंधित खुदरा महंगाई फरवरी में बढ़ कर 4.48 प्रतिशत पर पहुंच गई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार ईंधन और कुछ खाद्य वस्तुओं के महंगा होने से मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ा। जनवरी में औद्योगिक श्रमिकों से संबंधित खुदरा मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति 3.15 प्रतिशत थी। 

श्रम मंत्रालय ने कहा कि औद्योगिक श्रमिकों से संबंधित खुदरा मुद्रास्फीति सालाना आधार पर फरवरी 2021 में 4.48 प्रतिशत थी जो इससे पिछले महीने (जनवरी 2021) में 3.15 प्रतिशत थी। फरवरी 2020 में यह मुद्रास्फीति 6.84 प्रतिशत थी। मंत्रालय के बयान के मुताबिक इस साल फरवरी में औद्योगिक श्रमिकों के लिए खाद्य मुद्रास्फीति 4.64 प्रतिशत रही। जनवरी में यह 2.38 प्रतिशत थी। पिछले वर्ष फरवरी में खाद्य मुद्रास्फीति 8.33 प्रतिशत थी।  फरवरी 2021 में औद्योगिक श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 0.8 अंक बढ़ कर 119 अंक रहा। जनवरी की तुलना में इसमें 0.68 प्रतिशत की बढ़ौतरी हुई। 

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ईंधन एवं बिजली की महंगाई
सूचकांक में सबसे ज्यादा 0.31 प्रतिशत वृद्धि ईंधन एवं बिजली की महंगाई के चलते हुई। ‘अन्य’ और ‘खाद्य वर्ग’ की कीमतों में बढ़ौतरी से सूचकांक में क्रमश, 0.23 प्रतिशत और 0.21 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सामान के हिसाब से दूध, तेलों (सरसों, सोयाबीन, सूरजमुखी), फल (सेब, आम), सब्जियों (भिंडी, प्याज, परवल) प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों, रसोई गैस, सैलून खर्च और पैट्रोल के दाम बढ़ने से मुद्रास्फीति बढ़ी। इस दौरान चावल, आलू, टमाटर, अंडे, गोभी और अदरक जैसे उत्पाद सस्ते हुए।

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बाजार को वैक्सीन से है उम्मीद 
देश में कोरोना की दूसरी लहर ने दस्तक दे दी है। पिछले कई दिनों से 50,000 से अधिक केस आ रहे हैं। ऐसे में कुछ जगहों पर लॉकडाऊन जैसी उत्पन्न हो गई है। लगातार बढ़ते कोरोना के मामले से एक बार फिर बाजार सशंकित है। ऐसे में वैक्सीन से मार्कीट को काफी उम्मीदें हैं। 

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